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सारांशः 10 साल के डेटा से पता चलता है कि पिछले साल का बेस्ट फ़ंड शायद ही अगले साल भी बेस्ट रहता है. हमने हर साल नए टॉपर में स्विच करने की स्ट्रैटेजी भी सिमुलेट की. ‘स्मार्ट’ समझा जाने वाला कदम पीछे रह गया. रिटर्न का अंतर और असली विनर्स के बारे में विस्तार से जानें.
वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन के पाठक सिवा प्रसाद रविराला एक सीधा लेकिन अहम सवाल पूछते हैं: अगर एक साल के रिटर्न चार्ट में टॉप करने वाले फ़ंड अगले साल अक्सर पिछड़ जाते हैं, तो फिर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फ़ंड चुनने का मतलब क्या है, और सक्रिय निवेशकों को कौन सा तरीक़ा अपनाना चाहिए?
निवेशक अक्सर एक आम ग़लती करते हैं. वे उन म्यूचुअल फ़ंड्स को चुनते हैं जो एक साल के रिटर्न चार्ट में सबसे ऊपर होते हैं. हालिया बेहतर प्रदर्शन से ये उम्मीद बनती है कि फ़ंड आगे भी ऐसी ही चमक दिखाएगा. नीचे दिए गए हमारे चार डेटा अभ्यास परख रहे हैं कि ये भरोसा लंबे समय में कितना टिकता है.
1) एक साल के लीडर कितनी बार टॉप पर बने रहते हैं?
बहुत कम. पिछले 10 साल में एक्टिव फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स (रेगुलर) के हमारे एनालेसिस से साफ़ दिखता है कि एक साल की लीडरशिप कितनी अविश्वसनीय होती है.
बीते दशक में हर साल नंबर-वन पर अलग फ़ंड रहा. यानी 10 साल में 10 अलग-अलग टॉपर. कोई भी फ़ंड लगातार दो साल तक पहले स्थान पर नहीं रहा.
और भी अहम बात ये है कि 10 में से पांच साल में पिछले साल का बेस्ट फ़ंड अगले साल पहले क्वार्टाइल में भी नहीं रहा और दूसरे, तीसरे या चौथे क्वार्टाइल में फिसल गया.
ऐसा क्यों होता है? असल में, मार्केट लीडरशिप बदलती रहती है. एक साल का रिटर्न अक्सर बाज़ार के किसी ख़ास फेज़ से प्रभावित होता है. किसी एक सेगमेंट में तेज़ी आने पर कुछ फ़ंड टेबल में ऊपर पहुंच जाते हैं. इसका मतलब ये नहीं कि उनमें असाधारण स्किल है. अक्सर ये उस फेज़ के साथ उनकी स्टाइल के मेल का नतीजा होता है.
निवेशकों को जिस चीज़ पर ध्यान देना चाहिए, वो है परफ़ॉर्मेंस में स्थिरता, यानी अगर किसी फ़ंड ने एक अवधि में अच्छा प्रदर्शन किया है, तो क्या वो अगली अवधि में भी अच्छा कर पाता है.
2) क्या लॉन्ग-टर्म के विनर्स अक्सर टॉप पर आते हैं?
इसके बाद हमने ये देखने की कोशिश की कि क्या कैलेंडर वर्ष में टॉप करना लॉन्ग-टर्म के बेहतर प्रदर्शन से जुड़ा है.
इसके लिए दिसंबर 2025 तक के 10 साल के ट्रेलिंग या पॉइंट-टू-पॉइंट रिटर्न के आधार पर पांच सबसे अच्छे फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स को देखा. अगर सालाना टॉपर सच में स्किल दिखाते हों, तो ये फ़ंड अक्सर टॉप पर दिखने चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं है.
हमने पिछले दशक में हर साल इनकी रैंकिंग ट्रैक की. कुल 50 रैंक बनीं. इन 50 में से ये लॉन्ग-टर्म के विनर सिर्फ़ तीन बार ही नंबर-वन रहे.
सीधी बात ये है कि उनका लॉन्ग-टर्म का बेहतर प्रदर्शन बार-बार टॉप करने से नहीं आया. वो समय के साथ लगातार औसत से बेहतर प्रदर्शन से बना. ये फ़र्क़ अहम है. लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग लगातार प्रदर्शन से बनती है, कभी-कभार की तेज़ छलांग से नहीं.
3) एक बार विनर्स फ़ंड लगातार कैसा करते हैं?
लगातार प्रदर्शन को परखने के लिए हमने पिछले 10 साल के पांच साल के रोलिंग रिटर्न देखे. दो समूहों के लिए: हर कैलेंडर वर्ष के 10 टॉपर फ़ंड और 10 साल के ट्रेलिंग आधार पर टॉप पांच फ़ंड. रोलिंग रिटर्न, फ़िक्स्ड कैलेंडर वर्षों के बजाय ओवरलैपिंग पांच साल की अवधि में परफ़ॉर्मेंस को मापते हैं. इससे पता चलता है कि समय के साथ कोई फ़ंड कितनी बार अपने बेंचमार्क को हराता है. तुलना के लिए Nifty 500 TRI का इस्तेमाल किया गया.
कैलेंडर साल के 10 टॉपर औसतन सिर्फ़ 48 प्रतिशत समय ही इंडेक्स को हरा पाए. इसके उलट, पांच लॉन्ग-टर्म बेहतर फ़ंड्स ने 79 प्रतिशत समय इंडेक्स को हराया. ये अंतर छोटा नहीं है. इससे साफ़ है कि कभी-कभार टॉप पर आना बेहतर टिकाऊ प्रदर्शन में नहीं बदलता. दोहराने योग्य प्रोसेस ही फ़र्क़ पैदा करता है.
4) अगर हर साल एक विनर से दूसरे में कूदें तो?
आख़िर में हमने एक स्विचिंग स्ट्रैटेजी को लगाया. मान लीजिए किसी निवेशक ने 2016 की शुरुआत में ₹10 लाख पिछले साल के सबसे अच्छे फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में लगाए. हर नए साल की शुरुआत में पूरा जमा कॉर्पस उस साल के नए टॉपर फ़ंड में शिफ्ट कर दिया गया. ये प्रक्रिया दिसंबर 2025 तक जारी रही.
हर साल अंत में फ़ंड बेचते समय, ₹1.25 लाख की छूट के बाद फ़ायदे पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स भी लगाया गया. टैक्स को सालाना जोड़ने के बाद सालाना औसत रिटर्न 14.5 प्रतिशत रहा.
अब इसकी एक आसान विकल्प से तुलना कीजिए.
अगर निवेशक उन्हीं 10 साल के पांच ट्रेलिंग विनर्स में से किसी एक में टिके रहते और कैपिटल गेन टैक्स सिर्फ़ 2025 के अंत में एक बार देते, तो टैक्स के बाद सालाना रिटर्न 14.9 प्रतिशत से 16.2 प्रतिशत के बीच होता. इससे अंतिम कॉर्पस में अच्छा-ख़ासा फ़र्क़ पड़ता. नीचे दी गई टेबल को देखें.
एक साल के विनर के पीछे भागने से नतीजे बेहतर नहीं होते
पिछले साल के विनर का पीछा करने में ज़्यादा मेहनत लगी, लेकिन ज़्यादा पैसा नहीं
| मेट्रिक | पिछले साल के सबसे अच्छे फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में स्विच करें | सबसे अच्छे 5 फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में से किसी में भी निवेश बनाए रखें |
|---|---|---|
| 2016 की शुरुआत में निवेश की गई रक़म (₹) | 10 लाख | 10 लाख |
| दिसंबर 2025 तक फ़ाइनल कॉर्पस (₹) | 38.7 लाख | 40.1 लाख से 44.7 लाख |
| टैक्स के बाद सालाना रिटर्न (%) | 14.5 | 14.9 से 16.2 तक |
| स्विचिंग स्ट्रैटेजी में 2016 से 2025 तक पिछले साल के सबसे अच्छे फ़ंड में सालाना निवेश माना जाता है, जिसमें ₹1.25 लाख की छूट के बाद होने वाले गेन पर हर साल 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. निवेश बनाए रखने की स्ट्रैटेजी 31 दिसंबर, 2025 तक 10 साल के ट्रेलिंग रिटर्न के हिसाब से टॉप पांच एक्टिव फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड पर आधारित है, जिसमें ₹1.25 लाख रुपये की छूट के बाद होने वाले गेन पर 2025 के आखिर में ही 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है. सभी रिटर्न टैक्स के बाद के हैं. | ||
अंतर साफ़ है. एक साल के विनर्स का पीछा करना और बार-बार स्विच करना रिटर्न बेहतर करने में नाकाम रहा. ऊपर से बार-बार टैक्स देने से कंपाउंडिंग भी कमज़ोर हुई. इसके उलट, हर नए आउटपरफ़ॉर्मर के पीछे भागने की चिंता न करते हुए एक सही चुने गए फ़ंड में टिके रहना बेहतर नतीजे लेकर आया.
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निवेशकों को क्या करना चाहिए
फ़ंड चुनना अब भी अहम है. लेकिन मकसद ये नहीं होना चाहिए कि इसकी भविष्यवाणी की जाए, कौन सा फ़ंड आगे भी टॉप पर रहेगा. कुल मिलाकर, प्रोसेस और कंसिस्टेंसी पर जोर देना चाहिए.
- कम से कम पांच से सात साल का प्रदर्शन अलग-अलग बाज़ार हालात में देखें.
- रोलिंग रिटर्न के आधार पर देखें कि फ़ंड कितनी बार बेंचमार्क को हराता है.
- सिर्फ़ ऊंचे सालाना रिटर्न नहीं, बल्कि गिरावट के समय के व्यवहार को भी परखें.
- सालाना रैंकिंग के आधार पर बार-बार फ़ंड बदलने से बचें.
पिछले दशक के फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स का प्रमाण साफ़ है. बाज़ार कैलेंडर साल की चमक से ज़्यादा अनुशासन और निरंतरता को फ़ायदा पहुंचाता है.
कौन से फ़ंड रखने चाहिए?
निवेश में टिके रहना अनुशासन मांगता है. लेकिन वो तभी काम आता है जब रक़म सही म्यूचुअल फ़ंड में लगाई जाए. आपके लक्ष्य और समय-सीमा के मुताबिक़ सही फ़ंड चुनने में मदद के लिए Value Research Fund Advisor की हमारी टीम कई पैरामीटर पर म्यूचुअल फ़ंड्स का गहराई से एनालेसिस करती है. कोई फ़ंड हमारी रेकमंडेशन में तभी आता है जब वो इन कसौटियों पर खरा उतरता है.
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ये लेख पहली बार मार्च 03, 2026 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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