Fund Advisor's Note

क्या आपका फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर आपकी वेल्थ में 15% का पार्टनर है?

भावनात्मक सवाल का जवाब देने से पहले, ज़रा गणित देख लेते हैं

भावनात्मक सवाल का जवाब देने से पहले, ज़रा गणित देख लेते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः क्या रेगुलर प्लान के ज़रिये निवेश करने का मतलब यह है कि कोई फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर आपकी कुल वेल्थ में लगभग 10–20% हिस्सेदार बन जाता है? ये सवाल असहज लग सकता है, लेकिन इसके पीछे का गणित चौंकाने वाला है. ये स्टोरी उसी गणित और उसके असर को समझाती है.

सारांशः क्या रेगुलर प्लान के ज़रिये निवेश करने का मतलब यह है कि कोई फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटर आपकी कुल वेल्थ में लगभग 10–20% हिस्सेदार बन जाता है? ये सवाल असहज लग सकता है, लेकिन इसके पीछे का गणित चौंकाने वाला है. ये स्टोरी उसी गणित और उसके असर को समझाती है. 27 फ़रवरी को हमारे हालिया Fund Advisor Live सेशन के दौरान, नवनीत अरोड़ा ने एक ऐसा सवाल पूछा जिसने मुझे बोलते-बोलते रोक दिया. उनका सवाल था: जब कोई व्यक्ति रेगुलर प्लान से डायरेक्ट प्लान में स्विच करता है, तो क्या वह उस एडवाइज़र को छोड़ नहीं देता जिसने इतने सालों तक साथ दिया? वही व्यक्ति जिसने 2020 की गिरावट में फ़ोन उठाया. जिसने बैठकर समझाया कि SIP क्यों काम करती है. और कई मामलों में वही वजह था जिसकी वजह से किसी ने निवेश शुरू किया. ये बहुत मानवीय सवाल है. इसका जवाब सिर्फ़ एक्सपेंस रेशियो की एक लाइन से नहीं दिया जा सकता. इसलिए इसे उतनी जगह मिलनी चाहिए जितना ये हकदार है. लेकिन पहले एक नंबर. क्योंकि ये नंबर आगे आने वाली हर बात को देखने का नज़रिया बदल देगा. मान लीजिए कोई व्यक्ति 30 साल तक, अपनी सामान्य कामकाजी ज़िंदगी के दौरान, हर महीने ₹25,000 SIP के ज़रिये निवेश करता है और फ़ंड से जुड़े खर्चों से पहले 12% सालाना रिटर्न कमाता है. ऐसे में क्या होता है? अगर निवेश डायरेक्ट प्लान में है और एक्सपेंस रेशियो 1% है, तो रक़म लगभग ₹7.8 करोड़ तक पहुंच जाती है. वहीं रेगुलर प्लान में, जहां खर्च 1.5% है, वही रक़म लगभग ₹6.3 करोड़ बनती है. वही

ये लेख पहली बार मार्च 09, 2026 को पब्लिश हुआ.

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