Aditya Roy/AI-Generated Image
पिछले हफ़्ते का नोट पढ़कर जितने पत्र आए, उतने पहले कभी नहीं आए थे. बहुतों ने शुक्रिया कहा. आपका स्वागत है. एक नोट का काम है जो हो रहा है उसे नाम देना. और अगर आपमें से कुछ को लगा कि किसी ने वो बात ज़ोर से कह दी जो आप पहले से महसूस कर रहे थे, तो हफ़्ते भर की मेहनत का यही सबसे अच्छा फल है. लेकिन आज जिन चिट्ठियों का जवाब देना है, वो दूसरी हैं. बहुत से लोगों ने पूछा कि क्या मेरी संभली हुई भाषा के पीछे कुछ और बड़ा छुपा है. क्या मुझे कुछ और पता है जो मैं बता नहीं रहा. नहीं. मैं बस व्यावहारिक बात कर रहा था. और व्यावहारिक बात का ज़्यादातर मतलब होता है "मुझे नहीं पता.
ये लेख पहली बार मई 26, 2026 को पब्लिश हुआ.
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