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स्मॉल-कैप फ़ंड में गिरावट से बचना है तो ये 5 बातें ज़रूर देखिए

Invesco India Small-Cap के अदित्य खेमानी के अनुभव से सीखें, मुश्किल बाज़ार में फ़ंड को कैसे परखें

Invesco India Small-Cap के अदित्य खेमानी के अनुभव से सीखें, मुश्किल बाज़ार में फ़ंड को कैसे परखेंVRO Team

बीते दो साल स्मॉल-कैप निवेशकों के लिए मुश्किल रहे - सितंबर 2024 से अब तक स्मॉल-कैप बेंचमार्क करीब 1.5 प्रतिशत नीचे रहा है. लेकिन इसी दौर में Invesco India Smallcap फ़ंड करीब 8 प्रतिशत ऊपर रहा - यानी बेंचमार्क के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत का बेहतर प्रदर्शन. असली सवाल यह नहीं कि "किसने ज़्यादा कमाया" - सवाल यह है कि मुश्किल बाज़ार में किसने कम खोया, और क्यों.

Invesco India Mutual Fund के हेड (इक्विटी) अदित्य खेमानी का हालिया इंटरव्यू इसी सवाल का जवाब देता है. यह आउटपरफॉर्मेंस किसी नई स्ट्रैटेजी का नतीजा नहीं थी - यह फ़ैसले ढाई साल पहले लिए गए थे. खेमानी का यह पूरा इंटरव्यू Value Research को दिया गया था; इसे विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. इसी बातचीत से निकलती हैं वो 5 बातें, जो एक निवेशक को कोई भी स्मॉल-कैप फ़ंड चुनने से पहले देखनी चाहिए.

1. पोर्टफोलियो की क्वालिटी - रिटर्न से पहले

अच्छे बाज़ार में लगभग हर फ़ंड अच्छा दिखता है; असली फ़र्क़ बुरे बाज़ार में सामने आता है. खेमानी के मुताबिक क्वालिटी बनाए रखना ही सबसे बड़ा रिस्क-मैनेजमेंट टूल है. देखें: पोर्टफ़ोलियो में शामिल कंपनियों का डेट का स्तर, मुनाफे़ की निरंतरता और गवर्नेंस रिकॉर्ड - सिर्फ पिछले 1 साल का रिटर्न नहीं.

2. बहुत छोटे शेयरों से कितनी दूरी है?

ढाई साल पहले इन्वेस्को ने जानबूझकर ₹7,000–8,000 करोड़ से कम मार्केट-कैप वाले शेयरों में एक्सपोज़र घटाया था. पिछले 18 महीनों में ज़्यादातर नुक़सान इसी हिस्से में हुआ. आज इस फ़ंड में $1 अरब से कम मार्केट-कैप वाली कंपनियों का हिस्सा सिर्फ़ 8–9 प्रतिशत है. देखें: फ़ंड की औसत मार्केट-कैप और सबसे छोटी कंपनियों का प्रतिशत, जो फ़ैक्टशीट में मिलता है.

3. साइक्लिकल सेक्टरों में कितना निवेश, किस वैल्यूएशन पर?

लंबी रैली के बाद कई सेक्टर महंगे हो गए थे और निवेशक अच्छी-बुरी कंपनी में फ़र्क़ करना भूल गए थे. खेमानी की टीम ने इंडस्ट्रियल्स जैसे ओवरहीटेड, साइक्लिकल सेक्टरों में एक्सपोज़र घटाया, जो उस वक्त 40–50 P/E पर ट्रेड हो रहे थे - और यही हिस्सा बाद में सबसे ज़्यादा टूटा. देखें: फ़ंड के सेक्टर एलोकेशन में साइक्लिकल सेक्टरों का हिस्सा और हाल में उसमें बदलाव.

4. पोर्टफ़ोलियो की क्वालिटी जांचें कैसे?

मार्केट-कैप ब्रेकडाउन और सेक्टर एलोकेशन बेंचमार्क से तुलना करें; डाउनसाइड कैप्चर रेशियो (downside capture ratio) देखें - गिरते बाज़ार में फ़ंड बेंचमार्क से कितना कम गिरा, यही "बुरे समय के प्रदर्शन" का सबसे सीधा सबूत है; और फ़ंड मैनेजर की पुरानी कमेंट्री पढ़ें - वह रिटर्न के साथ रिस्क की भी बात करता है या नहीं.

5. दूसरे स्मॉल-कैप फ़ंड्स का हाल कैसा रहा?

यह इंटरव्यू सिर्फ Invesco के नज़रिए पर केंद्रित है, इसलिए बाकी कैटेगरी को समझने के लिए स्वतंत्र डेटा ज़रूरी है. Value Research के आंकड़ों के मुताबिक, रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न (Sharpe ratio) में टॉप एक्टिव स्मॉल-कैप फ़ंड ये रहे:

फ़ंड फ़ंड रिटर्न ग्रेड स्टैंडर्ड डेविएशन शार्प रेशियो अल्फ़ा
Bandhan Small Cap High 20.55 1 10.58
ITI Small Cap Above Average 19.81 0.95 9.43
Invesco India Smallcap High 19.55 0.89 8.38
Mahindra Manulife Small Cap Above Average 19.7 0.81 6.6
Bank of India Small Cap High 21.79 0.77 6.54

स्रोतः Value Research, 21 अगस्त 2026.

दिलचस्प बात यह है कि टॉप 3 फंड - Bandhan, ITI और Invesco India - का Fund Return Grade भी "High" या उसके करीब है, और इनका Standard Deviation (जोखिम/उतार-चढ़ाव) कैटेगरी के बाकी फ़ंड्स से कम या बराबर ही है - यानी इन्होंने अतिरिक्त रिटर्न ज़्यादा जोखिम लेकर नहीं, बल्कि बेहतर जोखिम-प्रबंधन से हासिल किया, जो ठीक खेमानी के तर्क से मेल खाता है.

यह भी पढ़ेंः Quant के फ़ंड पहले 16% गिरे, फिर 37% चढ़े-ये स्ट्रैटेजी है या रिस्क?

ये लेख पहली बार अगस्त 21, 2026 को पब्लिश हुआ.

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