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क्या NRI अब बिना आए भारत में निवेश कर पाएंगे? SEBI का नया प्लान

SEBI चाहता है कि एक बार हुई KYC हर जगह चल जाए, ताकि बार-बार काग़ज़ात पर मुहर लगवाने और उन्हें भारत भेजने का झंझट ख़त्म हो.

SEBI चाहता है कि एक बार हुई KYC हर जगह चल जाए, ताकि बार-बार काग़ज़ात पर मुहर लगवाने और उन्हें भारत भेजने का झंझट ख़त्म हो.Mukul Ojha/AI-Generated Image

सारांशः SEBI ने विदेश में रहने वाले भारतीयों और विदेशी नागरिकों के लिए KYC के नियम आसान करने का प्रस्ताव रखा है. अगर यह लागू हुआ, तो NRI, OCI और कई विदेशी नागरिक बिना भारत आए, घर बैठे ऑनलाइन अपना अकाउंट खुलवा सकेंगे. यह कहानी बताती है कि इसमें क्या-क्या बदलने जा रहा है, कौन सी शर्तें फिर भी बनी रहेंगी, और निवेशकों को अब क्या देखना चाहिए.

अगर आप विदेश में रहते हैं और भारत में निवेश करना चाहते हैं, तो अब तक सबसे बड़ी अड़चन बाज़ार नहीं, बल्कि काग़ज़ात का झंझट रही है. वजह एक अजीब सी शर्त थी: ऑनलाइन KYC कराने के लिए आपको उस वक़्त भारत में ही होना पड़ता था.

अब SEBI इसी शर्त को हटाने की तैयारी कर रहा है. 14 अगस्त 2026 को उसने एक पेपर जारी करके, विदेश में रहने वाले लोगों, यानी NRI, OCI और विदेशी नागरिकों के लिए KYC का पूरा तरीक़ा बदलने का प्रस्ताव रखा है. इस पर लोगों की राय 4 सितंबर 2026 तक मांगी गई है, और आख़िरी आदेश आने के 30 दिन बाद नए नियम लागू होंगे.

दिक़्क़त असल में थी क्या

अभी ऑनलाइन KYC करते वक़्त यह दर्ज होता है कि आप उस पल कहां बैठे हैं, और वो जगह भारत के अंदर होनी चाहिए. यानी विदेश में बैठा कोई शख़्स इस रास्ते से अकाउंट खोल ही नहीं सकता था.

तो फिर बचता क्या था? या तो भारत आइए, या फिर अपने काग़ज़ात पर दस्तख़त करके, उन पर किसी अफ़सर की मुहर लगवाकर, उन्हें कूरियर से भारत भेजिए. इसमें हफ़्तों लग जाते थे और अच्छा-ख़ासा ख़र्च भी होता था. SEBI ने ख़ुद माना है कि इसी शर्त की वजह से ब्रोकर और फ़ंड हाउस, विदेश में बैठे लोगों को पूरी तरह ऑनलाइन तरीक़ा नहीं दे पा रहे थे.

प्रस्ताव में क्या-क्या है

1. भारत आने की शर्त हटेगी

सबसे बड़ा बदलाव यही है. FATF (फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स) के नियम मानने वाले देशों में रहने वालों के लिए, भारत में मौजूद होने की शर्त हटाने का प्रस्ताव है. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश आते हैं. और जो देश ये नियम नहीं मानते, वहां रहने वालों पर पुराने नियम ही लागू रहेंगे.

2. एक बार KYC, हर जगह काम 

अभी हर नए ब्रोकर या फ़ंड हाउस के पास जाने पर वही जानकारी दोबारा देनी पड़ती है. प्रस्ताव यह है कि KYC रखने वाली एजेंसियां (KRA) इन रिकॉर्ड को ऐसा बनाएं कि वो हर जगह चल जाएं, और जो जानकारी किसी सरकारी रिकॉर्ड से चेक की जा चुकी हो, उस पर 'जांची हुई' का ठप्पा लगा दें. इसके अलावा, कोई ब्रोकर या फ़ंड हाउस उस KYC पर भरोसा कर सकेगा, जो पहले ही किसी दूसरे ने कर ली हो. 

3. काग़ज़ की जगह डिजिटल दस्तख़त

अब KYC फ़ॉर्म और ज़रूरी काग़ज़ात ऑनलाइन ही भेजे जा सकेंगे, डिजिटल दस्तख़त के साथ. दस्तख़त के नमूने का तरीक़ा भी नया है: पहले आप अपने दस्तख़त की कटी हुई तस्वीर भेजेंगे, और बाद में वीडियो कॉल पर होने वाली जांच (VIPV) के दौरान सामने बैठकर असली दस्तख़त करेंगे, जिसे पहले भेजी तस्वीर से मिलाकर देखा जाएगा.

और अगर असली काग़ज़ात दिखाना मुमकिन न हो, तो कई और विकल्प भी रखे गए हैं: DigiLocker वाले काग़ज़ात, उसी दफ़्तर से सीधे मिले काग़ज़ात जिसने उन्हें जारी किया, आधार वाला e-KYC, या तय की गई संस्थाओं से चेक की हुई कॉपी.

4. मुहर लगाने वालों की लिस्ट बढ़ेगी

मुहर लगवाने की वो अड़चन भी कम होगी. प्रस्ताव है कि जो अफ़सर काग़ज़ात पर मुहर लगा सकते हैं, उनकी लिस्ट में अब उन विदेशी बैंकों के अफ़सर भी जोड़े जाएं, जिनका किसी भारतीय बैंक से रिश्ता है. इससे यह काम कहीं ज़्यादा लोगों की पहुंच में आ जाएगा.

5. पते और ईमेल के नियम भी बदलेंगे

अगर आपका दिया काग़ज़ किसी सरकारी रिकॉर्ड से चेक किया जा सकता हो, तो आप अपना मौजूदा पता ख़ुद बता सकेंगे. साथ ही ईमेल देना ज़रूरी होगा, जबकि मोबाइल नंबर की जांच वाली शर्त ज़रूरत पड़ने पर ढीली की जा सकेगी. यह छोटी बात लगती है, पर विदेश में बैठे किसी निवेशक तक पहुंचने का सबसे भरोसेमंद रास्ता ईमेल ही होता है.

सुरक्षा के इंतज़ाम भी साथ हैं

नियम आसान करने का मतलब यह नहीं कि जांच ढीली कर दी जाए, और SEBI ने इसका ध्यान रखा है. वीडियो जांच के दौरान यह पक्का किया जाएगा कि सामने असली इंसान बैठा है, कोई तस्वीर या पहले से बनाई गई रिकॉर्डिंग नहीं. उसी वक़्त यह भी दर्ज होगा कि आप कहां हैं, और वो जगह उसी देश की होनी चाहिए जो आपके पते वाले काग़ज़ में लिखा है. नक़ली इंटरनेट पते से आने वाले कनेक्शन रोके जाएंगे, अलग से ऑडिट होगा, और साइबर सुरक्षा के नियम भी लागू रहेंगे.

क्या नहीं बदल रहा

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह सब सिर्फ़ अकाउंट खोलने के तरीक़े के बारे में है, निवेश के नियमों के बारे में नहीं.

क्या बदल सकता है क्या वैसा ही रहेगा
भारत आने की शर्त हटेगी (FATF वाले देशों के लिए) PAN अब भी ज़रूरी रहेगा (जिन्हें पहले से छूट है, उन्हें छोड़कर)
एक बार की गई KYC हर जगह चलेगी पासपोर्ट देना ज़रूरी रहेगा, और OCI वालों के लिए OCI कार्ड भी
काग़ज़ात डिजिटल दस्तख़त के साथ भेजे जा सकेंगे FATF के नियम न मानने वाले देशों में पुराने नियम ही चलेंगे
मुहर लगाने वाले अफ़सरों की लिस्ट बढ़ेगी टैक्स, पैसा वापस भेजने और निवेश की बाक़ी शर्तें वैसी की वैसी

इसका मतलब आपके लिए क्या है

SEBI ने ख़ुद कहा है कि विदेश में रहने वाले लोग भारत में निवेश का एक बड़ा और लगातार बढ़ता ज़रिया हैं, और अकाउंट खोलना आसान होने से बाज़ार में उनकी हिस्सेदारी बढ़ेगी और विदेश में जमा उनकी बचत भारतीय बाज़ार तक पहुंचेगी.

ज़ेरोधा के नितिन कामत का कहना है कि इन बदलावों के बाद अकाउंट खुलने में लगने वाला समय घटकर एक-दो दिन रह सकता है, जो आज हफ़्तों में होता है.

पर एक बात साफ़ रखिए. यह अभी सिर्फ़ एक प्रस्ताव है, नियम नहीं. SEBI पहले लोगों की राय पढ़ेगा, फिर आख़िरी नियम तय करेगा, और वो भी आदेश आने के 30 दिन बाद लागू होंगे. यानी असल बदलाव दिखने में अभी वक़्त लगेगा.

अब क्या देखना चाहिए

अगर आप विदेश में रहते हैं और भारत में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो दो बातों पर नज़र रखिए. पहली, आपका देश FATF के नियम मानता है या नहीं, क्योंकि पूरी छूट इसी पर टिकी है. और दूसरी, आपका ब्रोकर या फ़ंड हाउस इस पूरे ऑनलाइन तरीक़े के लिए तैयार है या नहीं, क्योंकि नियम बदलने और उसके ज़मीन पर उतरने के बीच अक्सर फ़ासला रह जाता है.

और आख़िर में एक ज़रूरी बात. अकाउंट खोलना आसान होना अपने आप में अच्छी ख़बर है, पर यह इस सवाल का जवाब नहीं है कि आपको ख़रीदना क्या चाहिए. रास्ता आसान हो जाने से मंज़िल नहीं बदलती. निवेश का फ़ैसला अब भी उन्हीं बातों पर टिकेगा जिन पर पहले टिकता था: आपका लक्ष्य, आपका समय, और वो क़ीमत जो आप चुका रहे हैं.

यह भी पढ़ें: SEBI: ऑनलाइन विवादों का अब 21 दिन जल्दी होगा समाधान, पर असली सवाल कोई नहीं पूछ रहा

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