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IPO बाज़ार में इन दिनों ज़बरदस्त हलचल है. एक के बाद एक कंपनियां अपना IPO ला रही हैं और निवेशकों के पास पैसा लगाने के कई मौक़े हैं. 9 सितंबर को ही 6 मेनबोर्ड IPO एक साथ खुले, जो करीब 30 साल में पहली बार हुआ. इन इश्यू के जरिए कंपनियां कुल ₹4,500 करोड़ से ज़्यादा जुटाने की कोशिश कर रही हैं.
लेकिन IPO की इस बाढ़ के बीच हाल के हफ्तों में दो जाने-माने निवेश विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. उनकी बात का मतलब यह नहीं है कि हर IPO ख़राब है, बल्कि यह है कि सिर्फ़ बाज़ार में तेज़ी या लिस्टिंग गेन की उम्मीद देखकर किसी IPO में पैसा लगाना ठीक नहीं.
Samir Arora ने MF के लिए दिया 30 दिन का सुझाव
Helios Capital के समीर अरोड़ा ने हाल में CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में म्यूचुअल फ़ंड कंपनियों को एक अलग तरह का सुझाव दिया है. उन्होंने कुछ मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि MF कंपनियों को मिलकर 30 दिनों तक नए IPO, QIP और प्लेसमेंट्स में निवेश नहीं करना चाहिए. हालांकि उन्होंने ख़ुद इसे किसी औपचारिक प्रस्ताव के बजाय एक विचार की तरह ही पेश किया, लेकिन इसके पीछे की सोच गंभीर है. उनका मानना है कि बाज़ार में नए शेयरों की लगातार बढ़ती सप्लाई भी मौजूदा शेयरों पर दबाव डाल रही है.
उनके मुताबिक़, अगर म्यूचुअल फ़ंड कुछ समय के लिए नए इश्यू से दूरी बनाएं, तो बाज़ार के प्रदर्शन पर इसका असर देखा जा सकता है. हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत सुझाव है, कोई नियामकीय नियम नहीं.
IPO की भीड़ पर V.K. Vijayakumar की चिंता
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने भी IPO बाज़ार में चल रही होड़ को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक़, उनका मानना है कि तेज़ी से बढ़ते IPO बाज़ार की वजह से बाज़ार से नकदी निकल रही है. दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान तनाव और करीब $100 पर पहुंचा ब्रेंट क्रूड भी बाज़ार के लिए चुनौती बना हुआ है.
विजयकुमार ने निवेशकों को IPO के लिए सिर्फ FOMO यानी मौक़े से कुछ चूक जाने के डर से आवेदन करने से बचने की सलाह दी है. उनका कहना है कि अच्छे और सही क़ीमत वाले IPO ज़रूर मौजूद हैं, लेकिन हर इश्यू में आंख बंद करके पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है. कई IPO अपने इश्यू प्राइस से नीचे भी कारोबार कर सकते हैं.
रिटेल निवेशकों को क्या करना चाहिए?
IPO में निवेश करने से पहले सबसे ज़रूरी सवाल यह नहीं होना चाहिए कि "लिस्टिंग गेन कितना मिल सकता है?" बल्कि यह होना चाहिए कि कंपनी की क़ीमत उसके कारोबार के मुकाबले उचित है या नहीं.
निवेशक को कम से कम इन पांच बातों को देखना चाहिए:
- कंपनी का कारोबार और मुनाफ़ा लगातार बढ़ रहा है या नहीं
- IPO से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल कहां होगा
- IPO का वैल्यूएशन उसके लिस्टेड पीयर्स के मुकाबले कैसा है
- कंपनी पर कितना क़र्ज़ है
- IPO में फ्रेश इश्यू (fresh issue) कितना है और ऑफर फॉर सेल (OFS) कितना
ख़ासकर GMP देखकर IPO में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है. GMP बाज़ार की धारणा बताता है, लेकिन यह लिस्टिंग प्राइस या भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है.
हर IPO में पैसा लगाना ज़रूरी नहीं
IPO बाज़ार में मौक़े हमेशा आते रहेंगे. इसलिए किसी एक इश्यू के हाथ से निकल जाने के डर में निवेश करने की ज़रूरत नहीं है. अगर कंपनी अच्छी है लेकिन वैल्यूशन बहुत महंगा है, तो इंतजार करना बेहतर हो सकता है.
आखिरकार, IPO में निवेश का मकसद सिर्फ लिस्टिंग के दिन मुनाफ़ा कमाना नहीं होना चाहिए. अगर आप लंबे समय के निवेशक हैं, तो कंपनी के कारोबार, वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई को समझना ज्यादा ज़रूरी है.
IPO की बाढ़ में सबसे अच्छी रणनीति हर इश्यू में पैसा लगाना नहीं, बल्कि सही इश्यू का इंतजार करना हो सकती है.
आखिरी बात
IPO की बाढ़ में सबसे अच्छी रणनीति हर इश्यू में पैसा लगाना नहीं, बल्कि सही इश्यू का इंतजार करना हो सकती है.
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