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लगभग एक दशक के इंतजार के बाद National Stock Exchange (NSE) का शेयर लिस्ट होने जा रहा है. देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज का IPO सब्सक्रिप्शन के लिए 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹1,700-₹1,785 तय किया है. अपर बैंड पर IPO का साइज़ करीब ₹22,569 करोड़ और NSE का वैल्यूएशन करीब ₹4.42 लाख करोड़ बैठता है.
NSE का IPO इसलिए भी ख़ास है क्योंकि यह सिर्फ़ एक और कंपनी का IPO नहीं है. NSE ख़ुद उस बाज़ार का हिस्सा है जहां रोज़ लाखों निवेशक शेयर ख़रीदते-बेचते हैं. ऐसे में सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी और मुनाफ़े वाली कंपनी का शेयर किस क़ीमत पर मिल रहा है और निवेशक को इस IPO को किस नज़र से देखना चाहिए.
कब खुलेगा NSE IPO?
NSE IPO के लिए निवेशकों को इन तारीख़ों का ध्यान रखना होगा:
| जानकारी | तारीख़/डिटेल |
|---|---|
| IPO खुलने की तारीख़ | 17 सितंबर, 2026 |
| IPO बंद होने की तारीख़ | 21 सितंबर, 2026 |
| एंकर निवेशकों के लिए बोली | 16 सितंबर, 2026 |
| अलॉटमेंट की संभावित तारीख़ | 22 सितंबर, 2026 |
| रिफंड/शेयर क्रेडिट | 23 सितंबर, 2026 |
| लिस्टिंग की संभावित तारीख़ | 24 सितंबर, 2026 |
| प्राइस बैंड | ₹1,700–₹1,785 |
| लॉट साइज़ | 8 शेयर |
| न्यूनतम निवेश | ₹14,280 |
| अधिकतम रिटेल निवेश | ₹1,99,920 |
रिटेल निवेशक को कम से कम एक लॉट यानी 8 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा. अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹14,280 लगाने होंगे. इसके बाद 8-8 शेयर के मल्टीपल में बोली लगाई जा सकती है.
IPO में रिटेल निवेशकों के लिए 35% हिस्सा, NII के लिए 15% और QIB के लिए 50% हिस्सा आरक्षित है.
IPO में नया पैसा नहीं आएगा
NSE IPO की एक अहम बात समझना ज़रूरी है. यह पूरी तरह Offer for Sale यानी OFS है. यानी IPO में NSE नए शेयर जारी करके पैसा नहीं जुटा रही है. मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे.
RHP के मुताबिक करीब 12.64 करोड़ शेयर IPO में बेचे जाएंगे. यह NSE की कुल इक्विटी का लगभग 5.1% है. पहले करीब 14.89 करोड़ शेयर बेचने की योजना थी, लेकिन कुछ शेयरधारकों के अपनी बिक्री घटाने के बाद अब IPO का साइज़ करीब 15% घटा दिया गया है.
इसका मतलब यह है कि IPO से मिलने वाला पैसा NSE के कारोबार में नहीं जाएगा. पैसा उन मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगा जो अपने शेयर बेच रहे हैं. IPO का एक प्रमुख उद्देश्य NSE के शेयरों को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कराना है.
कौन-कौन शेयर बेच रहा है?
NSE के IPO में कई बड़े संस्थागत शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं. इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस), एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, SBI कैपिटल मार्केट्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं.
LIC NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है, जिसके पास करीब 10.72% हिस्सेदारी है. हालांकि, वह मौजूदा OFS में शेयर बेचने वालों में शामिल नहीं है और अपनी हिस्सेदारी बनाए रखेगी.
NSE इतनी बड़ी कैसे बन गई?
NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है. कंपनी के RHP में शामिल Redseer के आंकड़ों के अनुसार, फ़ाइनेंशियल ईयर 2026 में NSE की इक्विटी कैश मार्केट में करीब 93% हिस्सेदारी थी. इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी करीब 99.8% और इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर) में करीब 74.7% थी. करेंसी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी करीब 99.5% और करेंसी ऑप्शंस में लगभग 100% थी.
NSE लगातार कई वर्षों से कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज रहा है और कैश इक्विटी सेगमेंट में ट्रेड्स की संख्या के लिहाज़ से भी दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंजों में गिना जाता है. यही वजह है कि NSE का IPO सिर्फ़ भारतीय बाज़ार ही नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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लेकिन NSE की कमाई में एक बड़ी बात समझिए
NSE की कमाई का बड़ा हिस्सा बाज़ार में ट्रेडिंग गतिविधि से जुड़ा है, ख़ासकर डेरिवेटिव्स कारोबार से. इसलिए इसका प्रदर्शन बाज़ार में ट्रेडिंग के रुझान और नियामकीय बदलावों से प्रभावित हो सकता है. हाल के वर्षों में SEBI के F&O नियमों में बदलाव के बाद NSE के इक्विटी ऑप्शंस मार्केट शेयर में गिरावट भी देखी गई है.
फ़ाइनेंशियल ईयर 2026 में NSE का मुनाफ़ा ₹10,302.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹12,187.7 करोड़ से 15.5% कम है. इसी दौरान परिचालन राजस्व 3.1% घटकर ₹16,601.3 करोड़ रह गया.
हालांकि, जून 2026 को खत्म तिमाही (Q1 FY27) में तस्वीर बेहतर रही. इस दौरान मुनाफ़ा सालाना आधार पर 6.7% बढ़कर ₹3,120.1 करोड़ और परिचालन राजस्व 13.1% बढ़कर ₹4,560.4 करोड़ हो गया.
यानी NSE बहुत मज़बूत और मुनाफ़े वाली कंपनी है, लेकिन इसकी कमाई को हमेशा एक जैसी मान लेना सही नहीं होगा.
₹1,785 का भाव महंगा है या सस्ता?
यही वह सवाल है जिस पर निवेशकों को सबसे ज़्यादा ध्यान देना चाहिए.
ऊपरी प्राइस बैंड पर NSE का वैल्यूएशन करीब ₹4.42 लाख करोड़ होगा. यह इसे भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर देगा. इसलिए सिर्फ़ यह देखकर IPO में निवेश करना सही नहीं होगा कि NSE बाज़ार का सबसे बड़ा एक्सचेंज है.
निवेशक को यह देखना होगा कि ₹1,700–₹1,785 की क़ीमत पर कंपनी की कमाई और भविष्य की संभावित ग्रोथ के मुकाबले वैल्यूएशन कितना उचित है.
यह भी ध्यान रखें कि IPO पूरी तरह OFS है. यानी कंपनी को IPO से मिलने वाले पैसे से अपना कारोबार बढ़ाने के लिए नया पूंजी निवेश नहीं मिलेगा. दूसरी ओर, शेयर बाज़ार में लिस्ट होने से NSE को सार्वजनिक कंपनी के रूप में ज़्यादा पारदर्शिता और बाज़ार आधारित मूल्यांकन मिलेगा.
GMP देखकर फैसला न करें
NSE जैसे चर्चित IPO में ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP को लेकर काफ़ी चर्चा होना स्वाभाविक है. लेकिन निवेशकों को GMP को निवेश का आधार नहीं बनाना चाहिए.
GMP आधिकारिक बाज़ार का हिस्सा नहीं है और इसमें बदलाव बहुत तेजी से हो सकता है. यह सिर्फ़ बाज़ार की अनौपचारिक धारणा बताता है. इससे यह तय नहीं होता कि NSE का शेयर लिस्टिंग के दिन किस भाव पर खुलेगा या लंबी अवधि में कैसा रिटर्न देगा.
अगर किसी निवेशक का नज़रिया सिर्फ़ लिस्टिंग गेन का है, तो जोखिम और ज़्यादा है. लिस्टिंग के बाद शेयर का भाव बाज़ार की उम्मीदों, NSE के कारोबार, डेरिवेटिव्स में गतिविधि, नियामकीय बदलाव और कंपनी की कमाई के हिसाब से ऊपर-नीचे हो सकता है.
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NSE IPO में निवेश से पहले क्या देखें?
निवेशकों को कम से कम इन सवालों के जवाब तलाशने चाहिए:
पहला, ₹1,785 के भाव पर NSE का वैल्यूएशन कितना उचित है?
दूसरा, NSE की कमाई में डेरिवेटिव्स कारोबार की बड़ी भूमिका को देखते हुए नियामकीय बदलावों का क्या असर पड़ सकता है?
तीसरा, फ़ाइनेंशियल ईयर 2026 में मुनाफ़ा और रेवेन्यू घटने के बाद आगे कमाई में ग्रोथ कैसी रह सकती है?
चौथा, IPO पूरी तरह OFS है, यानी NSE को नया पैसा नहीं मिलेगा-क्या मौजूदा वैल्यूएशन इस बात को पहले ही क़ीमत में शामिल कर चुका है?
पांचवां, क्या निवेशक लिस्टिंग गेन के लिए आवेदन कर रहा है या कंपनी को लंबे समय तक रखने के लिए?
आखिर में
NSE IPO कई मायनों में ऐतिहासिक है. यह देश के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों में से एक को शेयर बाज़ार में सीधे निवेश करने का मौक़ा देगा. IPO का प्राइस बैंड ₹1,700–₹1,785 है, न्यूनतम निवेश ₹14,280 है और ऊपरी क़ीमत पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹4.42 लाख करोड़ बैठता है.
लेकिन NSE का बड़ा नाम अपने आप में निवेश का कारण नहीं होना चाहिए. कंपनी का मज़बूत बाज़ार हिस्सा और शानदार मुनाफ़ा सकारात्मक बातें हैं, लेकिन कमाई में डेरिवेटिव्स कारोबार की बड़ी भूमिका, फ़ाइनेंशियल ईयर 2026 में मुनाफ़े में गिरावट और IPO का पूरी तरह OFS होना भी समझना ज़रूरी है.
इसलिए NSE IPO को सिर्फ़ "देश का सबसे बड़ा एक्सचेंज" देखकर नहीं, बल्कि "₹1,785 के भाव पर इस कारोबार की कीमत कितनी उचित है?" इस सवाल से देखना ज़्यादा समझदारी होगी.
क्या करें निवेशक?
NSE जैसे बड़े और चर्चित IPO में भी फैसला सिर्फ़ नाम या GMP देखकर नहीं, बल्कि valuation और कारोबार को समझकर लेना चाहिए. Value Research Stock Advisor आपको ऐसे ही मौक़ों को सही नज़रिए से परखने और अपने पोर्टफ़ोलियो के लिए सोच-समझकर फ़ैसला लेने में मदद कर सकता है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के मकसद से है. इसमें दी गई बातें निवेश की सलाह नहीं हैं. निवेश का कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अपने फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह ज़रूर लें.
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