IPO अनालेसिस

Rentomojo IPO: मुनाफ़ा असली, लेकिन क्या वैल्यूएशन बहुत महंगी है?

कंपनी मुनाफ़ा तो कमा रही है, लेकिन ये मुनाफ़ा कैश में नहीं बदल रहा. क्या इसकी तेज़ ग्रोथ मौजूदा क़ीमत को सही ठहरा सकती है?

कंपनी मुनाफ़ा तो कमा रही है, लेकिन ये मुनाफ़ा कैश में नहीं बदल रहा. क्या इसकी तेज़ ग्रोथ मौजूदा क़ीमत को सही ठहरा सकती है?Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः IPO के ऊपरी भाव पर Rentomojo की क़ीमत उसके मुनाफ़े की क़रीब 40 गुना बैठती है. अपनी कैटेगरी में सबसे आगे और तेज़ी से बढ़ रही कंपनी के लिए पहली नज़र में ये क़ीमत बहुत ज़्यादा नहीं लगती. लेकिन पिछले साल के मुनाफ़े को ध्यान से देखें, तो तस्वीर बदल जाती है. मुनाफ़े का एक बड़ा हिस्सा ऐसी वजह से आया है, जिसका कंपनी के असली कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है. उसे हटा दें, तो इस IPO को देखने का नज़रिया ही बदल जाता है.

शहरों में रहने वाले लोगों को फ़र्नीचर और घरेलू अप्लायंसेज़ किराये पर देने वाली ऑनलाइन कंपनी Rentomojo का IPO 9 सितंबर 2026 को खुला. कंपनी इस IPO से ₹1,256 करोड़ जुटा रही है. लेकिन इसमें सिर्फ़ ₹150 करोड़ का फ़्रेश इश्यू है. यानी IPO से जुटाई जाने वाली ज़्यादातर रक़म कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों के शेयर बेचे जाएंगे.

फ़िलहाल Rentomojo अपने कारोबार में सबसे आगे है और मुनाफ़ा भी कमा रही है. इसके मौजूदा सब्सक्रिप्शन से आगे मिलने वाला किराया पूरे एक साल के रेवेन्यू के लगभग तीन-चौथाई के बराबर है. लेकिन एक मुश्किल भी है. रेवेन्यू दोगुना होने के बावजूद ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव है. साथ ही, कारोबार से आने वाला लगभग पूरा कैश नया फ़र्नीचर और सामान ख़रीदने में लग रहा है.

कंपनी का कारोबार कैसे चलता है

Rentomojo फ़र्नीचर और घरेलू अप्लायंसेज़ ख़रीदती है और उन्हें ग्राहकों को महीने के किराये पर देती है. सब्सक्रिप्शन ख़त्म होने पर सामान वापस आता है. कंपनी ख़ुद उसकी मरम्मत करती है, उसे दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाती है और फिर किसी दूसरे ग्राहक को किराये पर दे देती है. डिलिवरी, इंस्टॉलेशन, मरम्मत, सामान दूसरी जगह पहुंचाने और घर से वापस लेने जैसी सुविधाएं भी किराये में शामिल हैं. ग्राहक ऐप या वेबसाइट से सामान ले सकते हैं. इसके अलावा कंपनी के 82 एक्सपीरियंस स्टोर भी हैं.

कंपनी की लगभग पूरी कमाई किराये से होती है. FY26 में फ़र्नीचर से ₹196 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल कमाई का 50.6 फ़ीसदी थी. अप्लायंसेज़ से ₹182 करोड़ आए, यानी 47.2 फ़ीसदी. बाक़ी कमाई डिलिवरी, इंस्टॉलेशन और सामान की जांच जैसी सेवाओं के लिए लिए गए एकमुश्त चार्ज से हुई.

ऑर्गनाइज़्ड होम फ़र्नीचर और अप्लायंस रेंटल मार्केट में Rentomojo की हिस्सेदारी 42 से 47 फ़ीसदी होने का अनुमान है. इसमें वॉटर प्यूरीफ़ायर का कारोबार शामिल नहीं है. दो साल में इसके लाइव सब्सक्राइबर क़रीब 1.5 लाख से बढ़कर 2.5 लाख हो गए. जिस मार्केट में कंपनी काम करती है, वो भी तेज़ी से बढ़ रहा है. ये मार्केट 2021 में क़रीब ₹350 करोड़ का था और 2025 में बढ़कर क़रीब ₹1,550 करोड़ हो गया. 2030 तक इसके क़रीब ₹6,030 करोड़ का होने का अनुमान है.

कारोबार की अच्छी बातें

#1 आगे की कमाई का एक बड़ा हिस्सा पहले से तय है

Rentomojo को किराया हर महीने मिलता है. इसलिए साल शुरू होने से पहले ही इसकी आने वाली कमाई के एक बड़े हिस्से का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. चल रहे सभी सब्सक्रिप्शन से उनकी पूरी अवधि में मिलने वाली कुल रक़म FY24 में ₹243 करोड़ थी, जो FY26 में बढ़कर ₹707 करोड़ हो गई. इसमें से ₹293 करोड़ की बिलिंग FY26 के अंत तक होनी बाक़ी थी. ये रक़म FY26 के पूरे रेवेन्यू के 76 फ़ीसदी के बराबर है. एक सब्सक्रिप्शन औसतन क़रीब 18 महीने चलता है. किसी कंज़्यूमर बिज़नेस में आगे की कमाई को लेकर इतनी साफ़ तस्वीर कम ही मिलती है. इसका एक फ़ायदा ये भी है कि कंपनी की ग्रोथ सिर्फ़ इस बात पर निर्भर नहीं रहती कि उसे लगातार नए ग्राहक मिलते रहें.

#2 एक बार ख़रीदा सामान कई साल तक कमाता रहता है

FY17 में ख़रीदे गए सामान से कंपनी अब तक उनकी लागत का 5.1 गुना कमा चुकी है. FY26 के अंत में भी इनमें से 56.1 फ़ीसदी सामान किराये पर लगा हुआ था. FY18 में ख़रीदे गए सामान से लागत का 4.5 गुना कमाया जा चुका है और उनमें से 60.9 फ़ीसदी सामान अब भी किराये पर था. पुराने सामान को दोबारा किराये पर देने लायक बनाने का ख़र्च भी बहुत ज़्यादा नहीं है. FY26 में कंपनी ने छह लाख से ज़्यादा सामान की मरम्मत और रीफ़र्बिशिंग पर ₹19 करोड़ ख़र्च किए, जबकि उसका रेवेन्यू ₹387 करोड़ था. कुल सामान में से 83.3 फ़ीसदी किसी न किसी भुगतान करने वाले ग्राहक के पास किराये पर था.

कारोबार की कमज़ोरियां

#1 मुनाफ़ा हो रहा है, लेकिन कैश नहीं बच रहा

FY26 में Rentomojo के कारोबार से ₹173 करोड़ का कैश आया. लेकिन इसी दौरान प्रॉपर्टी, प्लांट और इक्विपमेंट पर ₹176 करोड़ ख़र्च हो गए. यानी कारोबार चलाने और नए एसेट ख़रीदने के बाद कंपनी के पास कैश बचने के बजाय ₹3 करोड़ की कमी रही. FY25 में ये कमी ₹23 करोड़ और FY24 में ₹57 करोड़ थी. इसकी वजह इस कारोबार के तरीक़े में ही छिपी है. कंपनी को रेवेन्यू बढ़ाने के लिए किराये पर देने वाला सामान बढ़ाना पड़ता है और उस सामान से कमाई शुरू होने से पहले उसे ख़रीदना पड़ता है.

#2 पैसा जल्दी चुकाना है, जबकि सामान धीरे-धीरे कमाता है

31 मार्च 2026 को Rentomojo का वर्किंग कैपिटल ₹91 करोड़ निगेटिव था. दो साल पहले ये ₹33 करोड़ निगेटिव था. इसका करेंट रेशियो 0.6 था. अगले 12 महीनों में कंपनी को ₹96 करोड़ की उधारी और लीज़ से जुड़े भुगतान करने हैं, जबकि उसके पास ₹38 करोड़ का कैश और लिक्विड इन्वेस्टमेंट है. समस्या ये है कि उधार लिया गया पैसा फ़र्नीचर ख़रीदने में लगता है और उस फ़र्नीचर से लागत निकालने में क़रीब 10 साल लगते हैं. इसलिए कंपनी को अपनी उधारी बार-बार रीफ़ाइनेंस करनी पड़ती है.

Rentomojo IPO की जानकारी

जानकारी
डिटेल
कुल IPO साइज़ (₹ करोड़) 1,256
ऑफ़र फ़ॉर सेल (₹ करोड़) 1,106
फ़्रेश इश्यू (₹ करोड़) 150
प्राइस बैंड (₹) 384-404
सब्सक्रिप्शन की तारीख़ 9 सितंबर - 11 सितंबर, 2026
इश्यू का मक़सद ₹70 करोड़ क़र्ज़ चुकाने के लिए; ₹43 करोड़ वेयरहाउस और स्टोर की लीज़ रेंटल/लाइसेंस फ़ीस के भुगतान के लिए; और सामान्य कॉरपोरेट ज़रूरतों के लिए

IPO के बाद

जानकारी डिटेल
मार्केट कैप (₹ करोड़) 4,246
नेटवर्थ (₹ करोड़) 446
प्रमोटर हिस्सेदारी (%) 13.4
प्राइस/अर्निंग रेशियो (P/E) 39.7
प्राइस/बुक रेशियो (P/B) 9.5

पिछले तीन साल के फ़ाइनेंशियल आंकड़े

फ़ाइनेंशियल आंकड़े
2 साल की CAGR (%) FY26 FY25 FY24
रेवेन्यू (₹ करोड़) 41.7 387 266 193
EBIT (₹ करोड़) 40.3 88 64 45
PAT (₹ करोड़) 118.4 107* 43 22
नेटवर्थ (₹ करोड़) - 296 184 140
कुल क़र्ज़ (₹ करोड़) - 233 192 167
EBIT यानी ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई; PAT यानी टैक्स के बाद का मुनाफ़ा.
*FY26 के मुनाफ़े में ₹37 करोड़ का एकमुश्त डिफर्ड टैक्स क्रेडिट शामिल है.

मुख्य रेशियो

रेशियो
3 साल का औसत (%) FY26 FY25 FY24
ROE (%) 29.1 44.6 26.7 16.1
ROCE (%) 17.6 19.6 18.7 14.7
EBIT मार्जिन (%) - 22.9 23.9 23.3
डेट-टू-इक्विटी (गुना) - 0.8 1 1.2
ROE यानी रिटर्न ऑन इक्विटी; ROCE यानी रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड.

कारोबार से जुड़े आंकड़े

जानकारी
FY26 FY25 FY24
लाइव सब्सक्राइबर (लाख) 2.5 1.9 1.5
प्रति सब्सक्राइबर सामान 2.8 2.7 2.6
प्रति सामान औसत रेवेन्यू (₹) 6,253 5,853 5,612
ऑक्यूपेंसी रेट (%) 83.3 82.8 86.4
अभी रेवेन्यू में शामिल नहीं हुई कॉन्ट्रैक्टेड कमाई (₹ करोड़) 293 142 68
कैपिटल एक्सपेंडिचर (₹ करोड़) 176 138 149

इस क़ीमत पर निवेशक से क्या उम्मीद की जा रही है

₹404 प्रति शेयर के भाव पर Rentomojo की क़ीमत FY26 के ₹107 करोड़ के एडजस्टेड मुनाफ़े की क़रीब 40 गुना बैठती है. लेकिन यहां एक अहम बात है. FY26 के मुनाफ़े में ₹37 करोड़ डिफर्ड टैक्स क्रेडिट से आए हैं. ये अकाउंटिंग से मिला एक फ़ायदा है और कंपनी के असली कारोबार की कमाई नहीं है. अगर कंपनी के मुनाफ़े पर सामान्य 25 फ़ीसदी टैक्स लगता, तो FY26 का मुनाफ़ा ₹51 करोड़ होता. इस मुनाफ़े के हिसाब से कंपनी की वैल्यूएशन क़रीब 84 गुना बैठती है. इसलिए इस क़ीमत पर निवेश का फ़ैसला पिछले साल के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि इस उम्मीद पर टिका है कि कंपनी अगले चार-पांच साल में कितनी तेज़ी से बढ़ती है.

कंपनी का कारोबार बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद EBIT मार्जिन एक साल में 23.9 फ़ीसदी से घटकर 22.9 फ़ीसदी हो गया. दूसरी चुनौती प्रतिस्पर्धा की है. Rentomojo की प्रतिद्वंद्वी Furlenco में लिस्टेड कंपनी Sheela Foam की 34.5 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. Furlenco ने FY26 में ₹370 करोड़ का रेवेन्यू और ₹60 करोड़ का मुनाफ़ा कमाया. यानी रेवेन्यू के मामले में वो Rentomojo से बहुत पीछे नहीं है.

IPO बाज़ार में आने वाली कई कंपनियों के मुक़ाबले Rentomojo का कारोबार बेहतर स्थिति में दिखता है. कंपनी मुनाफ़ा कमा रही है, ग्राहक बढ़ रहे हैं और जिस मार्केट में ये काम करती है, वो भी तेज़ी से बढ़ रहा है. लेकिन अगर सामान्य टैक्स के बाद के मुनाफ़े के हिसाब से क़ीमत 84 गुना बैठती है, तो आगे का प्रदर्शन भी उतना ही मज़बूत होना चाहिए. मार्केट की ग्रोथ बनी रहनी चाहिए, कंपनी का मार्जिन नहीं बिगड़ना चाहिए और उसकी बाज़ार हिस्सेदारी भी बरक़रार रहनी चाहिए. जब तक ये तीनों बातें साफ़ तौर पर दिखाई नहीं देतीं, मौजूदा क़ीमत महंगी लगती है.

यह भी पढ़ें: वह ग्रोथ जिससे मार्केट चूक गया

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