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KFin और Triveni Turbine के शेयर सस्ते हुए, पर क्या तेज़ी से बढ़ पाएंगे?

KFin Technologies और Triveni Turbine अब अपने अधिकतम P/E के आधे से भी कम पर हैं, पर सस्ते शेयर को भी ऐसे कारोबार की ज़रूरत होती है जो बढ़कर उस प्राइस को सही साबित कर सके

KFin Technologies और Triveni Turbine अब अपने अधिकतम P/E के आधे से भी कम पर हैं, पर सस्ते शेयर को भी ऐसे कारोबार की ज़रूरत होती है जो बढ़कर उस प्राइस को सही साबित कर सकेAnand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः एक कंपनी भारत के म्यूचुअल फ़ंड्स का रिकॉर्ड रखती है. दूसरी ऐसे टर्बाइन बनाती है, जो बिकने के बाद भी दशकों तक कमाई कराते हैं. दोनों बढ़ रही हैं और दोनों अब अपने सबसे ज़्यादा P/E के आधे से भी कम पर हैं. ख़रीदने का यह आसान मौक़ा लगता है, जब तक आप यह नहीं पूछते कि इस सस्ते शेयर से फ़ायदा पाने के लिए, अगले 10 साल में हर कारोबार को क्या करके दिखाना होगा.

2021 से 2024 के बीच निवेशक ग्रोथ की कहानी के लिए लगभग कोई भी प्राइस चुकाने को तैयार थे. हर साल 20-25% बढ़ने वाली कंपनी अपनी कमाई के 70 या 90 गुना पर बिक रही थी और कम ही लोग पूछ रहे थे कि यह ग्रोथ कब तक चलेगी.

अब वो सब्र ख़त्म हो चुका है. ऐसे कई शेयर तब से बुरी तरह गिरे हैं और उनका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो आधा या उससे भी कम हो गया है. आधा हुआ P/E सस्ता लगता है, पर यह अपने आप सस्ता होने की गारंटी नहीं है. कम P/E का मतलब सिर्फ़ इतना है कि शेयर अब भविष्य से कम उम्मीद रख रहा है. पर उम्मीद तो फिर भी है. और अगर कंपनी के मैच्योर होने के साथ P/E और नीचे आता रहे, जो आमतौर पर होता ही है, तो रिटर्न का हर रुपया कमाई बढ़ने से ही आना होगा.

इसलिए काम का सवाल यह नहीं कि शेयर पहले से सस्ता है या नहीं. सवाल यह है कि क्या कारोबार इतनी तेज़ी से बढ़ सकता है कि उसका वैल्यूएशन घटता रहे, तब भी ख़रीदार को अच्छा रिटर्न मिले.

हमारी कसौटी

हमने ऐसी कंपनियां तलाशीं, जिनमें:

  • P/E पिछले तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर से 50% से ज़्यादा गिर चुका हो
  • पिछले तीन साल में रेवेन्यू और मुनाफ़ा, दोनों हर साल क़रीब 20-22% बढ़े हों
  • शेयर ने पिछले एक साल में नेगेटिव रिटर्न दिया हो

यह स्टोरी इस लिस्ट की दो कंपनियों से जुड़ी है. हर एक के लिए हमने एक ही सवाल पूछा. अगर अगले 10 साल में P/E और गिरता रहे, तो हर साल 15% रिटर्न देने के लिए कमाई को कितनी तेज़ी से बढ़ना होगा और क्या यह कारोबार असल में ऐसा कर सकता है?

1) KFin Technologies: भारत की बचत पर टोल, पर घटती दर पर

KFin भारत के म्यूचुअल फ़ंड्स के पीछे का रिकॉर्ड रखती है. यह दर्ज करती है कि किसके पास कौन सी यूनिट्स हैं, SIP प्रोसेस करती है और पैसा निकालने की अर्ज़ियां संभालती है. किसी भी कंपनी के लिए इसकी जगह लेना मुश्किल है. यह भारत की म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री को सर्विस देने वाले दो बड़े रजिस्ट्रार और ट्रांसफ़र एजेंट में से एक है और फ़ंड हाउस इसे कम ही बदलते हैं, क्योंकि लाखों निवेशकों के अकाउंट दूसरी जगह ले जाना जोखिम भरा और मुश्किल है. इसका फ़ायदा भी उतना ही साफ़ है: हर नई SIP और हर पहली बार का निवेशक, इसके कारोबार को बढ़ाता है.

रेवेन्यू लगातार बढ़ा है, पर मुनाफ़ा उसके साथ नहीं चल पाया. पिछले साल रेवेन्यू क़रीब 20 प्रतिशत बढ़ा, फिर भी मुनाफ़ा लगभग वहीं का वहीं रहा. इसकी एक वजह यह है कि KFin जितना पैसा संभालती है, उसके हर रुपये पर उसकी कमाई घट रही है: फ़ंड हाउस जैसे-जैसे बड़े होते हैं, कम रेट पर भुगतान करते हैं, इसलिए KFin के संभाले जाने वाले एसेट्स उसकी फ़ीस से कहीं तेज़ बढ़ रहे हैं. विदेश में उसके हालिया क़दम, यानी ग्लोबल फ़ंड एडमिनिस्ट्रेटर Ascent की ख़रीद, से रेवेन्यू तो बढ़ा है, पर इसका मार्जिन उसके मुख्य कारोबार से कहीं कम है.

KFin का जवाब है, म्यूचुअल फ़ंड की फ़ीस पर निर्भरता घटाना. मैनेजमेंट का गोल है कि रेवेन्यू में घरेलू म्यूचुअल फ़ंड का हिस्सा आधे से नीचे आ जाए और यह ग्लोबल फ़ंड एडमिनिस्ट्रेशन, पेंशन और अल्टरनेटिव फ़ंड्स के ज़रिये हो, जो उसके मुख्य कारोबार से दो से पांच गुना तेज़ी से बढ़ रहे हैं. FY27 की पहली तिमाही में म्यूचुअल फ़ंड के बाहर का रेवेन्यू बढ़कर 38% हो गया, हालांकि इस बढ़त का बड़ा हिस्सा Ascent की ख़रीद से आया.

अगर आप KFin को उसके मौजूदा 43 गुना P/E पर ख़रीदते हैं और उसका वैल्यूएशन घटता है, तो लंबे समय में अच्छे रिटर्न के लिए उसकी कमाई को हर साल 21% से 28% के बीच बढ़ना होगा. यह इस पर टिका है कि उसकी फ़ीस की दरें थमें और Ascent का मार्जिन सुधरे.

KFin Technologies को कितनी तेज़ी से बढ़ना होगा

10 वर्षों में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न के लिए 43 गुना के एंट्री P/E से

अगर P/E घट जाए हर शेयर पर कमाई (EPS) की अहम सालाना ग्रोथ (%)
25 21
20 24
15 28
सोर्स: हमारा एनालिसिस. डिविडेंड नहीं जोड़ा गया है.

2) Triveni Turbine: डिमांड  पक्की, पर डिलीवरी में उतार-चढ़ाव

Triveni के टर्बाइन फ़ैक्ट्रियों को उनकी अपनी गर्मी और कचरे से बिजली बनाने में मदद करते हैं और हर टर्बाइन दशकों तक सर्विसिंग के ज़रिये कमाई कराता रहता है. इस तरह की भरोसेमंद और सस्ती औद्योगिक बिजली की डिमांड  दुनिया भर में बढ़ रही है और Triveni इसके पीछे विदेश तक जल्दी पहुंचा है. अब उसकी बिक्री का बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट से आता है और ज़्यादा मार्जिन वाला आफ़्टरमार्केट, यानी बिक्री के बाद सर्विसिंग और पुर्ज़ों का काम, उसके ऑर्डर में लगातार बड़ा हिस्सा बन रहा है.

पर यह कारोबार एक सीधी लाइन में नहीं चलता. ऑर्डर बड़े होते हैं, ग्राहक के हिसाब से बनते हैं और उनका प्राइस पहले ही तय हो जाता है. इसलिए किसी एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट में देरी या काम के दौरान कच्चे माल की लागत बढ़ना, तुरंत आंकड़ों में दिख जाता है. पिछले साल रेवेन्यू रिकॉर्ड पर पहुंचा पर मुनाफ़ा फिसल गया. युद्ध और व्यापार के झगड़ों ने ऑर्डर रोके, बिक्री में ज़्यादा मार्जिन वाले आफ़्टरमार्केट का हिस्सा घटा और कम मार्जिन वाले एक रणनीतिक प्रोजेक्ट ने मार्जिन पर दबाव डाला.

ग्रोथ बनाए रखने के लिए Triveni अपने मुख्य कारोबार से आगे देख रही है. तेल रिफ़ाइनरी के लिए टर्बाइन, जो मुनाफ़े का एक बड़ा ज़रिया हैं, तेल के ज़्यादा प्राइस से डिमांड लौटने पर फिर से बढ़ने की उम्मीद है. कंपनी जियोथर्मल पावर में भी उतर रही है और ऐसी टेक्नोलॉजी में भी, जो कम तापमान वाली बेकार गर्मी से बिजली बनाती है. उसका सबसे बड़ा दांव NTPC के लिए कार्बन डाइऑक्साइड पर आधारित एनर्जी स्टोरेज प्लांट है, जिसे टेक्नोलॉजी साबित करने के लिए लगभग बिना मार्जिन के लिया गया था और जो अभी चालू होना बाक़ी है.

यानी अगर आप Triveni को उसके मौजूदा 44 गुना P/E पर ख़रीदते हैं और उसका वैल्यूएशन घटता है, तो लंबे समय में अच्छे रिटर्न के लिए उसकी कमाई को हर साल 22% से 28% के बीच बढ़ना होगा.

Triveni Turbine को कितनी तेज़ी से बढ़ना होगा

10 वर्षों में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न के लिए 44 गुना के एंट्री P/E से

अगर P/E घट जाए हर शेयर पर कमाई (EPS) की ज़रूरी सालाना ग्रोथ (%)
25 22
20 24
15 28
सोर्स: हमारा एनालिसिस. डिविडेंड नहीं जोड़ा गया है.

ध्यान दें!

दोनों कारोबार अच्छे से चलाए जा रहे हैं, जिनके पास असली ताक़त है: KFin दो खिलाड़ियों वाले बाज़ार में है, जहां ग्राहक आसानी से नहीं छोड़ते और Triveni एक ख़ास क्षेत्र में है, जहां उसके पहले से लगे टर्बाइन दशकों तक कमाई कराते रहते हैं. दोनों अब काफ़ी सस्ते भी हो गए हैं. पर रिटर्न की यह कसौटी 10 साल तक हर साल 20% से ज़्यादा कमाई की ग्रोथ डिमांड है और किसी भी क्वालिटी की कम ही कंपनियां ऐसा कर पाती हैं. KFin के लिए यह इस पर टिका है कि फ़ीस की दरें थमें और उसके नए कारोबार अपने दम पर बढ़ें. Triveni के लिए यह इस पर टिका है कि आफ़्टरमार्केट का हिस्सा बढ़ता रहे, अटके हुए ऑर्डर वक़्त पर पूरे हों और उसके नए दांव पक्के कारोबार में बदलें. सस्ता वैल्यूएशन मदद तो करता है, पर ग्रोथ की ज़रूरत को ख़त्म नहीं करता.

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