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खुद बनें अपने फाइनेंशियल एडवाइजर

फाइनेंशियल एडवाइजर हमेशा अपने फायदे के लिए काम करते हैं। ऐसे में बेहतर है कि आप खुद निवेश करना सीखें

फाइनेंशियल एडवाइजर हमेशा अपने फायदे के लिए काम करते हैं। ऐसे में बेहतर है कि आप खुद निवेश करना सीखें

मेरे पास रीडर के बहुत सारे ईमेल आते हैं। ये ईमेल उनकी पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी समस्‍याओं के बारे में होते हैं। इन समस्‍याओं में एक कैटेगरी ऐसी है जिसका कोई सटीक जवाब देना मेरे लिए असंभव होता है। सवाल फाइनेंशियल एडवाइजर की जरूरत को लेकर होता है। इसका जवाब देना आसान नहीं है या आप कहें कि इसका जवाब बहुत जटिल है।

अगर यह बताना हो कि एक पर्सनल फाइनेंशियल एडवाइजर आपके लिए क्‍या कर सकता है तो यह बहुत सरल और सीधा है। फाइनेंशियल एडवाइजर आपसे आपकी जरूरत के बारे में कुछ सवाल पूछता है और आपको निवेश के कुछ विकल्‍प बताता है जो आपकी जरूरत को पूरा कर सकते हैं। इसके बाद एडवाइजर आपको बताता है कि निवेश के प्रदर्शन पर कैसे नजर रखनी है। या आपके चाहने पर वह खुद आपके लिए यह काम करता है। अगर कोई निवेश उम्‍मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करता है या आपकी जरूरत बदल जाती है तो एडवाइजर विकल्‍प चुनने में और पहले वाला निवेश बेच कर दूसरे विकल्‍प में निवेश करने में मदद करता है। इसके अलावा कुछ निवेश जैसे इक्विटी में तेज उतार चढ़ाव आता है जिसकी उम्‍मीद शायद एक नया निवेशक नहीं करता है। ऐसे दौर में फाइनेंशियल एडवाइजर सही सलाह के जरिए आपके डर को दूर करता है और निवेश को बनाए रखने में मदद करता है। अगर आपको अपने निवेश से कुछ रकम की जरूरत पड़ती है तो फाइनेंशियल एडवाइजर आपको बताता है कि आपको किस निवेश को बेच कर कैश की जरूरत को पूरा करना है। और इसका सही तरीका क्‍या है।

अगर आप थोड़ा गौर करें तो पाएंगे ये सब चीजें बहुत मुश्किल नहीं है। बहुत से बचत कर्ता किताब, पत्रिका और वेबसाइट की मदद इसके बारे में आसानी से सीख सकते हैं। हालांकि बहुत से लोग ऐसा नहीं करते हैं। इसलिए उनको फाइनेंशियल एडवाइजर की जरूरत होती है। आप फाइनेंशियल एडवाइजार की मदद लेकर भी निवेशक के तौर पर अच्‍छा करेंगे यह सिर्फ आप पर नहीं बल्कि काफी हद तक फाइनेंशियल एडवाइजर पर निर्भर है।

कुछ समय पहले मैं ब्‍लूमबर्गडॉटकॉम के यूएस संस्‍करण में एक लेख पढ़ा था। उस लेख में बताया गया था कि जिन लोगों ने प्रोफेशनल फाइनें‍शियल एडवाइर्स की सेवाएं ली थीं उनको निवेश के मोर्चे पर काफी नुकसान उठाना पड़ा। एक स्‍टडी में रिसर्च वर्कर संभावित कस्‍टमर बन कर फाइनेंशियल एडवाइजर्स के पास गए। रिसर्च वर्कर्स ने उनके ऐसे निवेश के बारे में सलाह मांगी जो उनके पोर्टफोलियो में पहले से थे। ये निवेश कम लागत वाले थे और उनका पोर्टफोलियो डायवर्सीफिकेशन के मोर्चे पर भी अच्‍छा था। कुल मिला कर यह पोर्टफोलियो ऐसा था कि उसमें निवेशक को निवेश बनाए रखने की जरूरत थी। हालांकि आपको यह जानकार शायद झटका लगे कि 85 फीसदी फाइनेंशियल एडवाइजर्स ने पोर्टफोलियो में बदलाव की सलाह दी और ऐसे विकल्‍पों में निवेश को कहा जो न सिर्फ पहले के निवेश की तुलना में खराब विकल्‍प थे बल्कि वे ब्रोकर को ज्‍यादा कमीशन देने वाले भी थे। एक और स्‍टडी में पाया गया कि ब्रोकर्स ने जिन निवेशकों को सलाह दी थी उनको सालाना 3 फीसदी कम रिटर्न मिला।

भारत में फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज के लिए हर तरह के नियम कानून हैं लेकिन फाइनेंशियल एडवाइर हमेशा अपने मुनाफे के लिए ही काम करते हैं। चाहे इन्‍श्‍योरेंस हो, म्‍युचुअल फंड हो या स्‍टॉक का मामला हो। उनकी सलाह इस बात को ध्‍यान में रख कर होती है कि प्रोडक्‍ट बेचने वाले को कितना इन्‍सेंटिव या कमीशन मिलेगा। हर तरह के नियम कानून के बावजूद खराब सलाह को अब तक रोका नहीं जा सका है। इसकी वजह बहुत सरल है। बाजार में कोई भी ऐसा फाइनेंशियल प्रोडक्‍ट नहीं है जिसमें प्रोडक्‍ट बेचने वाले और खरीदने वाले यानी निवेशक का हित समान हो।
म्‍युचुअल फंड में बाजार नियामक ने फंड बेचने वाले को मिलने वाले एकमुश्‍त कमीशन को कम करने का प्रयास किया है लेकिन जब तक हर क्षेत्र में ऐसा नहीं किया जाता है तब तक बड़े पैमाने पर हालात बेहतर नहीं होंगे। क्‍योंकि एडवाइर्स को निवेशक को सिर्फ दूसरे प्रोडक्‍ट की ओर गाइड करना है।
हालात मुश्किल हैं और इसका कोई कारगर समाधान न देने के लिए माफी चाहता हूं। मैं यही कह सकता हूं कि किसी भी कीमत पर आपको प्रयास करके खुद निवेश करना सीखना चाहिए और आप अपने फाइनेंशियल एडवाइजर खुद बनें।

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