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तेज उतार- चढ़ाव वाले बाजार में असेट अलॉकेशन कितना अहम है ?

धीरेंद्र कुमार असेट अलॉकेशन तय करने के फायदे बता रहे हैं

धीरेंद्र कुमार असेट अलॉकेशन तय करने के फायदे बता रहे हैं


बाजार हमेशा उतार चढ़ाव से भरा होता है। जब बाजार ऊपर जाता है तो लोग यह नहीं कहते हैं कि बाजार की चाल के बारे में अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन जब बाजार गिरता है तो लोग उसी बाजार को अस्थिर कहने लगते हैं। लेकिन बाजार हमेशा उतार चढ़ाव से भरा होता है। बाजार रोज ऊपर नीचे होता है। और कई बार इसका सही कारण बताना भी मुश्किल होता है।

इससे निपटने का एक ही तरीका है और वह से लंबी अवधि को ध्‍यान में रख कर असेट अलॉकेशन करना। असेट अलॉकेशन का मकसद यह फैसला करना होता है कि आप कितना इक्विटी रखना चाहते हैं और कितना डेट। यह पूरी तरह से आपकी जोखिम लेने की क्षमता और सहजता पर निर्भर करता है।

मान लेते हैं कि निवेशक आधा इक्विटी और आधा डेट में निवेश करते हुए असेट अलॉकेशन का फैसला करता है। और जब इक्विटी अच्‍छा प्रदर्शन करता है तो आपका 50 फीसदी निवेश बढ़ कर 55 फीसदी हो जाता है और जब बाजार गिरता है तो आपका 50 फीसदी निवेश घट कर 40 फीसदी हो जाता है। ऐसे में आपका अलॉकेशन बदल कर 35:65 हो जाता है। तो ऐसे में आपको पुराना असेट अलॉकेशन बहाल करने के लिए फिक्‍स्ड इनकम से पैसा निकाल कर इक्विटी में लगाना होगा। तो इस तरह से असेट अलॉकेशन और रीबैलेंसिंग की जाती है। हालांकि ऐसा बहुत जल्‍दी जल्‍दी नहीं करना चाहिए।

इसके बावजूद ऐसा कोई सटीक फार्मूला नहीं है जो यह बताता हो कि एक आदर्श असेट अलॉकेशन क्‍या है। यह कई चीजों जैसे आपकी परिस्थितियों, आपकी पूंजी कितनी है जैसी बातों पर निर्भर करता है। आप इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं कि अगर कोई अनुभवी निवेशक 5 करोड़ रुपए निवेश करता है और यह निवेश 10 फीसदी कम हो जाता है तो हो सकता है कि वह बहुत परेशान न हो। वहीं अगर किसी ने 40 लाख रुपए निवेश किया है और वह हर माह कुछ रकम निकालने का इंतजार कर रहा है तो वह 10 फीसदी गिरावट से बहुत ज्‍यादा तनाव में आए जाएगा। तो कहने का मतलब यह है कि असेट अलॉकेशन कई बातों के आधार पर तय होता है।

तो आदर्श असेट अलॉकेशन का कोई फार्मूला नहीं है लेकिन मेरा मानना है कि रिटायरमेंट के दौरान असेट अलॉकेशन इक्विटी और डेट में 50:50 होना चाहिए। या कम से कम इक्विटी में 35 फीसदी होना चाहिए। वहीं जब आप काम रहे हैं और रिटायरमेंट कॉर्पस बना रहे हैं तो आपका असेट अलॉकेशन 75:25 यानी 75 फीसदी इक्विटी में और 25 फीसदी डेट में होना चाहिए। तो आपको ऐसा करते हुए अपनी सहजता का भी ध्‍यान रखना चाहिए क्‍योंकि असेट अलॉकेशन का कोई फार्मूला नहीं है जो एक्‍सपर्ट आपको बता दे।

ये लेख पहली बार जनवरी 17, 2020 को पब्लिश हुआ.

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