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वही पुरानी कहानी

वैल्‍यू रिसर्च लंबे समय से इस बात पर कायम रहा है कि एनफओ में निवेश नहीं करना चाहिए। बड़े पैमाने पर आ रहे एनएफओ के बीच हमारी राय नहीं बदली है

वैल्‍यू रिसर्च लंबे समय से इस बात पर कायम रहा है कि एनफओ में निवेश नहीं करना चाहिए। बड़े पैमाने पर आ रहे एनएफओ के बीच हमारी राय नहीं बदली है

कभी-कभी मैं सोचता हूं कि मैं ओर वैल्‍यू रिसर्च में दूसरे लोग एक ही बात बार बार बताते हुए थक जाएं। हालांकि वह दिन आज तक नहीं आया है। तो हम एक बार फिर कह रहे हैं न्‍यू फंड ऑफर्स यानी एनएफओ में निवेश एक बुरा विचार है और म्‍युचुअल फंड निवेशकों को हमेशा बिना किसी अपवाद के नए फंड को नजरअंदाज करना चाहिए।


सैंद्धांतिक तौर पर मुझे इस संपाकीय को यहीं समाप्‍त कर देना चाहिए क्‍योंकि यही काफी है। लेकिन मैं ऐसा करूंगा नहीं क्‍योंकि हमेशा फंड निवेशकों की नई पीढ़ी आती रहती है फंड बेचने वालों की रणनीति में फंस सकती है। इसके अलावा सच को बार बार दोहराया जाना इसलिए जरूरी है क्‍योंकि फंड बेचने वाले नए फंड को लेकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि लंबे समय से निवेश की दुनिया से जुड़े निवेशकों को भी यह सच बार बार बताने की जरूरत रहती है।


सवाल उठता है कि हम नए फंड के इतने खिलाफ क्‍यों हैं ? इसके बहुत से कारण हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण बहुत सरल है। हम नए फंड के खिलाफ इसलिए हैं क्‍योंकि वे पुराने नहीं हैं। आप एक फंड का आंकलन सिर्फ उसके ट्रैक रिकॉर्ड से कर सकते हैं। और नए फंड का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता है। बात खत्‍म हुई।


नए फंड बेचने वाले हमेशा ऐसा माहौल बनाते हैं कि आपको लगे कि अगर आपने यह फंड नहीं खरीदा तो मुनाफा कमाने का एक बड़ा मौका चूक जाएंगे। वास्‍तविकता यह है कि ऐसा करके सिर्फ एक ही चीज का मौका गवाएंगे वह है कि खराब रिटर्न। हालांकि अगर ऐसा न भी हो और नया फंड अच्‍छा रिटर्न देता है तब भी यह निवेश के लायक नहीं है। क्‍यों ? क्‍योंकि यह एक अंदाजा होगा। ट्रैक रिकॉर्ड के बिना आपके पास यह जानने का कोई आधा नहीं होगा कि किस फंड में निवेश किया जाए।

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