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सारांशः "मैंने NPS अकाउंट सिर्फ़ ₹50,000 की टैक्स छूट के लिए खोला था. नई टैक्स व्यवस्था ने वो फ़ायदा ख़त्म कर दिया. मुझे NPS जारी नहीं रखना. क्या पैसा निकाल सकता हूं? और अगर नहीं तो इसका सबसे अच्छा इस्तेमाल कैसे करूं?"
पिछले साल दिसंबर तक इसका जवाब मुश्किल था. PFRDA संशोधन नियमावली 2025 ने इसे साफ़ कर दिया है, ₹5 लाख की एक सीधी रेखा के साथ.
नए निकासी नियम, आसान भाषा में
PFRDA ने 12 दिसंबर 2025 को निकासी और आहरण (संशोधन) नियमावली अधिसूचित की. इसमें तीन बदलाव मायने रखते हैं.
पांच साल का लॉक-इन ख़त्म हो गया. ग़ैर-सरकारी सदस्य यानी ऑल सिटीज़न मॉडल और कॉर्पोरेट मॉडल वाले अब कभी भी बाहर निकल सकते हैं.
छोटे अकाउंट पूरा पैसा लेकर जा सकते हैं. अगर जमा रक़म ₹5 लाख या उससे कम है तो स्वैच्छिक निकासी पर 100% रक़म एकमुश्त मिलेगी. पहले यह लिमिट ₹2.5 लाख थी.
बड़े अकाउंट एन्युटी की दीवार से टकराते हैं. ₹5 लाख से ऊपर होने पर स्वैच्छिक निकासी में 80% रक़म एन्युटी में जानी ज़रूरी होगी. सिर्फ़ 20% एकमुश्त मिलेगा.
पहला क़दम: CRA पोर्टल पर अपनी जमा रक़म देखें. ₹5 लाख की यह रेखा तय करती है कि आगे क्या होगा.
₹5 लाख से कम: सीधे निकल जाइए
₹50,000 की कटौती के लिए खोले ज़्यादातर अकाउंट ₹50,000 से ₹2 लाख के बीच हैं, यानी लिमिट से काफ़ी नीचे. CRA पोर्टल पर निकासी का आवेदन दीजिए, बैंक अकाउंट सत्यापित कीजिए और 5-10 कार्य दिवसों में पूरी रक़म खाते में आ जाएगी.
टैक्स की एक बात. आयकर क़ानून की धारा 10(12A) एकमुश्त रक़म का 60% टैक्स-फ़्री रखती है. बाकी निकासी के साल आपकी आमदनी में जुड़ेगा और उस पर टैक्स लगेगा. ₹1 लाख की जमा रक़म पर बुनियादी छूट लिमिट इसे ढक लेती है. बड़ी रक़म पर टैक्स का असर होगा.
जो कॉर्पोरेट सेक्टर के सदस्य उस नौकरी को छोड़ चुके हैं, उन्हें पहले PRAN को ऑल सिटीज़न मॉडल में शिफ़्ट करने के लिए Form ISS-1 भरना होगा. PRAN वही रहेगा, जमा रक़म वही रहेगी. यह बस एक प्रक्रियागत क़दम है, कोई रुकावट नहीं.
₹5 लाख से ज़्यादा: एन्युटी का जाल
मान लीजिए आपकी जमा रक़म ₹7 लाख है. स्वैच्छिक निकासी में ₹1.4 लाख एकमुश्त मिलेंगे और ₹5.6 लाख एन्युटी में चले जाएंगे. आज एन्युटी की दरें 60 साल के ख़रीदार के लिए 6 से 6.5% और युवा ख़रीदारों के लिए 4 से 5% हैं, क्योंकि बीमा कंपनियां ज़्यादा सालों के भुगतान का हिसाब लगाती हैं. ₹5.6 लाख पर 5% की दर से यह ₹2,333 महीना बनता है, जो टैक्स स्लैब के हिसाब से कर योग्य है. यह एक कम रिटर्न वाली, बंधी हुई और टैक्स योग्य आमदनी है जिसे आप वापस नहीं कर सकते.
इसके तीन बेहतर विकल्प हैं.
पहला विकल्प: सामान्य निकासी का इंतज़ार करें. सामान्य निकासी अब 15 साल की सदस्यता या 60 साल की उम्र पर होती है, जो पहले आए. सामान्य निकासी पर ₹8 लाख तक के अकाउंट 100% एकमुश्त के लिए योग्य हैं. अगर आपने 2011 या 2012 में अकाउंट खोला था तो आप पहले से 15 साल पर हैं. हर साल न्यूनतम ₹1,000 डालते रहें और पूरी रक़म लेकर निकलें.
दूसरा विकल्प: इसे कम लागत वाले रिटायरमेंट फ़ंड की तरह देखें. NPS पेंशन फ़ंड कॉमन स्कीम में 0.12% और मल्टीपल स्कीम फ़्रेमवर्क में 0.30% तक चार्ज करते हैं, जबकि इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड में 1 से 1.5% लगता है. PFRDA अब 100% इक्विटी की इजाज़त देता है. नया पैसा किसी ज़्यादा इक्विटी वाली स्कीम में लगाएं और रक़म को बढ़ने दें.
तीसरा विकल्प, नौकरीपेशा पाठकों के लिए. अगर आपका नियोक्ता कॉर्पोरेट NPS में पंजीकृत है तो HR या पेरोल से कहें कि आपके CTC का एक हिस्सा 80CCD(2) के तहत NPS में जाए. नई टैक्स व्यवस्था में भी नियोक्ता का योगदान मूल वेतन और महंगाई भत्ते के 14% तक टैक्स-फ़्री है. NPS का यही एक फ़ायदा नई व्यवस्था में भी बचा है.
ध्यान दें
₹5 लाख से कम है तो साफ़ बाहर निकलें. ₹5 लाख से ज़्यादा है तो बिल्कुल मत निकलें. 80% एन्युटी एक ऐसा जाल है जिसे आप वापस नहीं कर सकते. सामान्य निकासी का इंतज़ार करें, अकाउंट को कम लागत वाले रिटायरमेंट फ़ंड की तरह रखें और अगर नियोक्ता की सुविधा हो तो 80CCD(2) का फ़ायदा उठाएं.
NPS में लाने वाली टैक्स बचत अब नहीं रही. रुकना है या जाना, यह अब आपकी जमा रक़म और रिटायरमेंट तक बचे सालों पर निर्भर करता है. दोनों जानी जा सकती हैं. इन्हीं के आधार पर फ़ैसला करें.
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ये लेख पहली बार मई 14, 2026 को पब्लिश हुआ.






