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वो दिन जब HDFC ने भी सोना ख़रीदने से मना कर दिया

रविवार को PM ने अपील की. मंगलवार को कस्टम ड्यूटी 15% बढ़ी. शाम तक HDFC ने अपना गोल्ड और सिल्वर NFO वापस ले लिया. अपने पोर्टफ़ोलियो के लिए क्या करें, यहां है जवाब.

रविवार को PM ने अपील की. मंगलवार को कस्टम ड्यूटी 15% बढ़ी. शाम तक HDFC ने अपना गोल्ड और सिल्वर NFO वापस ले लिया. अपने पोर्टफ़ोलियो के लिए क्या करें, यहां है जवाब. Aditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः प्रधानमंत्री, सरकार और देश की सबसे बड़ी AMC ने 72 घंटों के अंदर सोने के बारे में एक ही नतीजे पर पहुंचे. ऐसा एक साथ होना बहुत कम होता है. पिछले 16 महीनों में जो हुआ वो बताता है कि यह अब क्यों मायने रखता है.

इस हफ़्ते तीन चीज़ें एक साथ हुईं जो पहले कभी नहीं हुई थीं. रविवार को प्रधानमंत्री ने कहा कि एक साल सोना मत ख़रीदो. मंगलवार को सरकार ने सोने और चांदी पर 15% कस्टम ड्यूटी लगा दी. शाम तक HDFC म्यूचुअल फ़ंड ने अपना गोल्ड और सिल्वर NFO वापस ले लिया जो इसी शुक्रवार खुलने वाला था.

राज्य, राजकोष और देश की सबसे बड़ी AMC ने 72 घंटों में एक ही नतीजा निकाला. सोने का दौर अब ख़त्म हो चुका है.

वो आंकड़ा जिसकी कोई बात नहीं कर रहा

AMFI का फ़्लो डेटा साफ़ तस्वीर देता है (चार्ट देखें). जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में ₹24,040 करोड़ का रिकॉर्ड इनफ़्लो आया. पहली बार यह इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड के इनफ़्लो से ज़्यादा था. अप्रैल तक यह घटकर ₹3,040 करोड़ रह गया. 90 दिनों में 87% की गिरावट. सिल्वर ETF फ़रवरी में ही नेट आउटफ़्लो में चला गया.

पिछले तीन सालों के गोल्ड ETF इनफ़्लो का क़रीब 75% सिर्फ़ आठ महीनों में आया, सितंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच. यह कोई सोची-समझी तब्दीली नहीं थी. यह भगदड़ थी.

भारत में गोल्ड ETF में हर महीने आने वाला निवेश

जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में रिकॉर्ड ₹24,040 करोड़ का निवेश आया.
यह पहली बार था जब गोल्ड ETF में निवेश, इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड्स के इनफ़्लो से भी ज़्यादा रहा.
लेकिन अप्रैल तक यह रकम घटकर ₹3,040 करोड़ रह गई.

₹25,000 करोड़ का नेट इनफ़्लो

नवंबर फ़रवरी मई अगस्त अप्रैल जनवरी

सोर्स: AMFI.

पांच साल और फिर एक खाई

2021 में भारत में 24 कैरेट सोना ₹47,400 प्रति 10 ग्राम था. आज ₹1,62,000 है. इसमें 243% की बढ़ोतरी हुई है, जिसका ज़्यादातर हिस्सा पिछले 16 महीनों में आया. जनवरी के अंत तक सोना अपने ऐतिहासिक औसत से, महंगाई का असर हटाकर देखें तो, बहुत ऊपर था, जैसा रुचिर शर्मा ने फाइनेंशियल टाइम्स में लिखा. जनवरी के आख़िर तक सोना अपने इन्फ्लेशन-एडजस्टेड हिस्टोरिकल नॉर्म से पांच स्टैंडर्ड डेविएशन ऊपर था. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने ख़ुद इस तेज़ी का 80% हिस्सा "जोख़िम और अनिश्चितता" को दिया, यानी ख़रीदारों को भी नहीं पता था कि वो क्यों ख़रीद रहे हैं.

29 जनवरी को सोना $5,595 प्रति औंस तक पहुंचा. 48 घंटों में 21% तक गिर गया. वजह कोई महंगाई का आंकड़ा नहीं था, बल्कि अमेरिका के कर्मचारियों से जुड़ी एक ख़बर थी. मार्च के मध्य तक सोने की कीमत में 27% की और गिरावट आ चुकी थी. जब सब लोग इसे ख़रीद चुके हों तो सुरक्षित ठिकाना सुरक्षित नहीं रहता.

व्यवहार का फ़ासला, सबसे साफ़ रूप में

जब सोना ₹30,000 प्रति 10 ग्राम था तब किसी ने गोल्ड ETF नहीं ख़रीदा. ₹50,000 पर थोड़ी दिलचस्पी. ₹1,30,000 पर यह देश का सबसे लोकप्रिय प्रोडक्ट बन गया. क़ीमत ही एकमात्र संकेत था.

वैल्यू रिसर्च में हम सालों से इस पैटर्न को डॉक्यूमेंट करते आ रहे हैं. 'बिहेवियर गैप' (व्यवहार का अंतर) वह फ़र्क है जो किसी फ़ंड के रिटर्न और उस फ़ंड में निवेश करने वाले औसत निवेशक की असल कमाई के बीच होता है. दुनिया भर में, यह अंतर हर साल 2.5% अंकों का होता है, क्योंकि लोग क़ीमतें बढ़ने के बाद ख़रीदते हैं और कीमतें गिरने के बाद बेचते हैं. पिछले 18 महीनों में भारत के सोने में यह फ़ासला और भी ज़्यादा रहा है.

मेरी राय, अपडेट की हुई

मैं दो दशकों तक सोने को लेकर शक में रहा. अक्टूबर 2024 में मैंने अपनी राय बदली क्योंकि यूक्रेन के भंडार फ़्रीज़ के बाद केंद्रीय बैंकों की ख़रीद ने हिसाब बदल दिया था. पोर्टफ़ोलियो में बीमे की तरह 5 से 10% सोना रखना सही है.

लेकिन इंश्योरेंस वो चीज़ है जिसे आप तब ख़रीदते हैं जब वह सस्ता और बोरिंग हो, न कि तब जब वह महंगा और रोमांचक हो. अभी सोना, जो सामान्य स्तर से पांच स्टैंडर्ड डेविएशन ऊपर है, PM ने इसके ख़िलाफ़ अपील की है, जिस पर आज कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी गई है, और HDFC ने आज शाम अपना NFO वापस ले लिया है. इनमें से कोई भी स्थिति इंश्योरेंस ख़रीदने के लिए सही नहीं है.

जिस इंजन ने इस तेज़ी को गति दी थी, वह अब पहले से ही सुस्त पड़ चुका है. केंद्रीय बैंकों की सोने की ख़रीद 2025 के 27 टन के मासिक औसत से घटकर जनवरी 2026 में 5 टन रह गई. जब ख़रीदार ख़रीदना बंद करे तो क़ीमत उसे दर्शाती है.

इस हफ़्ते तीन काम करें

1. अपने गहने गिनें. ज़्यादातर भारतीय घरों में गहने मिलाकर पहले से 20 से 30% सोना है. ऊपर से गोल्ड ETF जोड़ना डाइवर्सिफ़िकेशन नहीं, एकाग्रता है.

2. अगर आपके पोर्टफ़ोलियो में 10% से ज़्यादा सोना है तो उसे घटाएं. तेज़ी का फ़ायदा उठाकर बैलेंस बनाएं, और जोड़ने के लिए नहीं.

3. इस महीने नई गोल्ड SIP शुरू मत करें. SIP उन संपत्तियों के लिए काम करती है जिनकी लंबे समय की दिशा ऊपर हो और छोटे समय की दिशा अनिश्चित. अभी सोना दोनों पर खरा नहीं उतरता. वो पैसा किसी फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में लगाएं.

जब प्रधानमंत्री, सरकार और सबसे बड़ा AMC 72 घंटों में एक ही बात कहें तो यह शोर नहीं है. यह डेटा है. भारत के म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री ने एक पीढ़ी तक प्रदर्शन के पीछे भागने को बढ़ावा दिया है. व्यवहार का फ़ासला वो क़ीमत है जो निवेशक इस आदत के लिए चुकाते हैं.

सोने की कहानी भारत तक पहुंच गई है. आपके पोर्टफ़ोलियो में इसका एक अध्याय होना ज़रूरी नहीं.

यह भी पढ़ें: मोदी की सात बातें...आइए, डिकोड करते हैं!

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