हाऊस वॉयस

'सीधे स्टॉक में पैसा लगाना निवेश इंडस्ट्री के लिए बुरा नहीं है'

नवीन अग्रवाल, एम.डी. और सी.ई.ओ., मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, इंडस्ट्री से जुड़ी कई बातों का जवाब दे रहे हैं

नवीन अग्रवाल, एम.डी. और सी.ई.ओ., मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, इंडस्ट्री से जुड़ी कई बातों का जवाब दे रहे हैं


बढ़ते हुए डायरेक्ट प्लान और नए प्लेटफॉर्म कैसे इन तीन स्टेकहोल्डरों के बीच के आयाम बदल रहे हैं - निवेशक, डिस्ट्रीब्यूटर, और मैन्युफ़ैक्चरर (ए.एम.सी.)?
डायरेक्ट प्लान को इन्स्टीट्यूशनल क्लायंट, और फ़ैमली ऑफ़िस दोनों ही पसंद कर रहे हैं। डायरेक्ट प्लान में दूसरे स्रोतों से भी निवेश बढ़ रहा है, क्योंकि ख़ुद से (Do-it-Yourself प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए) म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना, पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गया है। जहां कंपनियां और फ़ैमिली ऑफ़िसों में क्वालिफ़ाइड लोग होते हैं, जो उनके निवेश को ट्रैक और मैनेज करते हैं, वहीं ज़्यादातर ख़ुद निवेश करने वाले लोग सही फ़ंड का चुनाव करने में उतने माहिर नहीं होते। ये लोग रिस्क लेने की अपनी क्षमता, और मार्केट में उतार-चढ़ाव का दौर में निवेश को लेकर क्या फ़ैसला करें, ये नहीं समझ पाते। मार्केट में जब मुश्किल वक़्त आता है तब एक अच्छे एडवाइज़र की असल ज़रूरत होती है।

निवेश के एडवाइज़र का रोल अब फ़ंड के चुनाव तक ही सीमित नहीं रह गया है, इसमें अब निवेश से की जा रही अपेक्षाओं को मैनेज करना, और मुश्किल वक़्त में निवेशक को सही सलाह देना भी शामिल हो गया है। जैसा कि निक मर्री कहते हैं, "निवेश का परफॉर्मेंस असल ज़िंदगी के रिटर्न नहीं बताता, निवेशक का व्यवहार ये बात ज़ाहिर करता है"। ऐसी स्थिति में सलाह देने वाला सबसे ज़्यादा काम आता है। जहां तक ए.एम.सी. (एसेट मैनेजमेंट कंपनी) का ताल्लुक़ है, ये बचत को फ़ाइनेंस में बदलने की जागरुकता फैलाने, और समझदार संस्थागत निवेशकों के बीच एक बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

कई लोग आजकल सीधे स्टॉक ख़रीद कर इक्विटी में निवेश कर रहे हैं। स्मॉलकेस जैसे नए प्लेटफ़ॉर्म इसे और आसान बना रहे हैं। आप म्यूचुअल फ़ंड के बिज़नस पर इसका क्या असर देखते हैं? क्या ये बदलाव फ़ंड इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है?
पिछले एक साल में कई युवाओं ने सीधे स्टॉक में निवेश करना शुरु कर दिया है, इसका एक बड़ा कारण, लॉकडाउन के दौरान मिला खाली समय है। साथ ही मार्च 2020 से शुरु हुई मार्केट की वी-शेप, तेज़ रैली भी इसकी वजह रही है। इसके अलावा इस ट्रेंड में एक और बात सहायक रही है, वो है फ़िनटेक के क्षेत्र में नया इनोवेशन, जिनसे इक्विटी में निवेश बहुत आसान कर दिया है। हम नहीं समझते इससे इंडस्ट्री की ग्रोथ पर कोई ख़राब असर होगा। म्यूचुअल फ़ंड और सीधे इक्विटी में निवेश की कई और गुना ग्रोथ की गुंजाइश है, क्योंकि बहुत ही कम भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश करते रहे हैं।
सिस्टमिक इन्वेस्टमेंट प्लान, रिटेल इन्वेस्टर के लिए पहली पंसद बन कर उभरे हैं। अगस्त 2021 में एस.आई.पी. के ज़रिए जो कुल रक़म मिली, वो ₹9,923 करोड़ रही, ये पिछले साल के मुक़ाबले 27 पर्सेंट बढ़ी है। और पिछले पांच साल में क़रीब तीन गुना बढ़ गई है।

स्मॉलकेस जैसे एप्लीकेशन ने इक्विटी ख़रीदने को बहुत आसान बना दिया है, मगर थोड़े समय में फ़ायदा कमाने के लिए स्टॉक ख़रीदने, और निवेश करने में फ़र्क है। इसके अलावा छोटे म्यूचुअल फ़ंड निवेश का सबसे सरल तरीक़ा हैं, बजाए इसके कि आप कई मापदंडों के आधार पर पोर्टफ़ोलियो बनाएं, और इसे समय-समय पर री-बैलेंस करें या इससे बाहर निकलें।

हमारे फ़ाउंडर, रामदेव अग्रवाल ने हाल ही में ये प्रेज़ेंट किया, कि कैसे सेनसेक्स दस साल में 2,00,000 और म्यूचुअल फ़ंड का ए.यू.एम. (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 100 ट्रिलियन पर पहुंचना संभव है। बढ़ती हुई इक्विटी में हिस्सेदारी, देश को और आगे ले जाएगी, और मेरे ख़याल में भारत की ग्रोथ स्टोरी सही मायनों में विजेता रहेगी।

रैपिड-फ़ायर सैक्शन:

निवेश गुरु/ मैनेजर जिसे आप सबसे ज़्यादा पसंद करते हैं: चार्ली मंगर
वो बिज़नस लीडर जिसकी तरह आप होना चाहेंगे: जेमी डाइमन
अब तक का सबसे सफल फ़ाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट जो आपने किया: मोतीलाल ओसवाल फ़ाइनेंशियल सर्विसिज़
आपका मनी-मंत्र क्या है: सही ख़रीदो शांत बैठो
अगर आप मनी मैनेजर नहीं होते, तो क्या होते: एक रिसर्च एनेलिस्ट

ये लेख पहली बार नवंबर 26, 2021 को पब्लिश हुआ.

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