वर्ड्स वर्थ

निवेश में काम की 5 बातें

पीपीएफएएस म्‍यूचुअल फंड के सीईओ राजीव ठक्‍कर का अनुभव स्‍मार्ट निवेशक बनने में आपकी मदद कर सकता है

पीपीएफएएस म्‍यूचुअल फंड के सीईओ राजीव ठक्‍कर का अनुभव स्‍मार्ट निवेशक बनने में आपकी मदद कर सकता है

एक युवा के तौर पर 1994 में फाइनेंशियल मार्केट का हिस्‍सा बनने के बाद लंबे सफर में कई बातें सीखने को मिली।

निवेश करते हुए न उठाएं परिस्थितियों का फायदा

पहली सीख मुझे काफी जल्‍दी ही मिल गई और यह थी परिस्थि‍तियों का फायदा उठाने के नुकसान। जिस कंपनी में काम करता था उसने प्रतिभाशाली लोगों में से नियुक्तियां की थी। बहुत से आज भी निवेश की दुनिया बेहतरीन लोगों में शुमार हैं। हालांकि, कंपनी ने इक्विटी इन्‍वेस्‍टमेंट में परिस्थितियों का फायदा उठाया और बहुज जल्‍द ही दिवालिया होने के कगार पर आ गई। इन्‍वेस्‍टमेंट थीसिस कितनी भी अच्‍छी हो अगर उतार चढ़ाव के दौर में आपके पास निवेश बनाए रखने की क्षमता नहीं है तो इसका कोई मतलब नहीं है। आपको ब्रोकर की मार्जिन काल पर या बैंकर/लेंडर के दबाव में निवेश बेचना पड़ेगा।

आसानी से न करें विश्‍वास

फ्रेशर होने की वजह से इन्‍वेस्‍टमेंट-बैंकिंग डिवीजन में इंटर्न था और IPO के लिए ऑफर डाक्‍युमेंट तैयार करने में मदद कर रहा था। जब मैं पीछे मुड़ कर देखता हूं तो पाता हूं कि उस समय की बहुत सी कंपनियां आज नहीं हैं। निश्चित तौर पर आज का IPO मार्केट दशकों पहले की तुलना में काफी बेहतर है। हालांकि निवेश्‍ा करने का फैसला करने से पहले यह जरूरी है कि हाल में खुद को लिस्‍ट कराने वाली कंपनी का व्‍यवहार कुछ वर्षों तक देखा जाए। क्‍योंकि बहुत सी ऐसी कंपनियां को ज्‍यादा लोग नहीं जानते हैं। हालांकि जमे जमाए बिजनेस हाउस या पब्लिक सेक्‍टर कंपनियों के IPO के बारे में यह बात लागू नहीं होती है।

प्रमोटर्स / मैनेजमेंट की क्‍वालिटी

एक ही सेक्‍टर में एक ही समय में शुरू होने वाली बहुत सी कंपनियों में से कुछ ही कंपनियां बहुत सफल हुईं जबकि ज्‍यादातर कंपनियां खास सफलता हासिल नहीं सकीं। इन सभी कंपनियों के लिए नियम कानून, इकोनॉमिक साइकल और प्रतिस्‍पर्धा एक जैसी थी। लेकिन सफल और असफल कंपनियों में अंतर करने वाला सबसे बड़ा फैक्‍टर मैनेजमेंट था। कभी कभ्‍सी अच्‍छे मैनेजमेंट और बुरे मैनेजमेंट में अंतर करना मुश्किल हो जाता है लेकिन ज्‍यादातर समय यह अंतर साफ दिखता है। अच्‍छे मैनेजमेंट को नजरअंदाज करने का नुकसान कभी न कभी उठाना ही पड़ता है।


बिजनेस की क्‍वालिटी

एक ही बिजनेस हाउस एक बिजनेस में बहुत ज्‍यादा सफल हो सकता है जबकि किसी दूसरे बिजनेस में वह बुरी तरह से फेल हो सकता है। कई बार, ऐसा बिजनेस के नेचर की वजह से होता है। आप देखेंगे कि कई एंटरप्रेन्‍योर एक ही सेक्‍टर में फेल हो रहे हैं और कई एंटरप्रेन्‍योर किसी दूसरे सेक्‍टर में सफल हो रहे हैं। उदाहरण के लिए ज्‍यादातर लिस्‍टेड FMCG कंपनियों ने शेयर होल्‍डर्स को शानदार रिटर्न दिया है वहीं ज्‍यादातर लिस्‍टेड एयरलाइंस ने शेयर होल्‍डर्स की रकम गंवाई है। निश्चित तौर पर इसके अपवाद भी हैं। लेकिन आपको रकम बनाने वाले सेक्‍टर्स में निवेश करना चाहिए।

निवेश में सफल होने की चाहत रखने वाले निवेशकों को सिर्फ फाइनेंशियल पैरामीटर्स के अलावा मैनेजमेंट ओर सेक्‍टर की हिस्‍ट्री पर भी गौर करना चाहिए।

हैपी इन्‍वेस्टिंग !

ये लेख पहली बार जनवरी 17, 2022 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

इन 5 इक्विटी फ़ंड की रेटिंग इस महीने 4-स्टार में हुई अपग्रेड

पढ़ने का समय 5 मिनटख्याति सिमरन नंदराजोग

म्यूचुअल फ़ंड के नियम बदल गए: 3 बातें जो सच में मायने रखती हैं

पढ़ने का समय 5 मिनटआशुतोष गुप्ता

FII भारत से पैसा निकाल रहे हैं. लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है

पढ़ने का समय 4 मिनटउदयप्रकाश

आपकी उम्र 47 हो गई है, तो नया निवेश NPS में करें या EPF में?

पढ़ने का समय 5 मिनटआकार रस्तोगी

3 स्मॉल-कैप फ़ंड जिन्होंने ₹10,000 की मंथली SIP को 10 साल में ₹35 लाख में बदला

पढ़ने का समय 3 मिनटख्याति सिमरन नंदराजोग

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

नाम में क्या रखा है!

नाम में क्या रखा है!

जब एक लेबल सब बताए और कुछ न बताए

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी