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फीके पड़े फ़्लोटर फ़ंड

ब्‍याज दरों में हो रही कटौती की वजह से ये फ़ंड पटरी से उतर गए हैं

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आइए एक नज़र डालते हैं कि क्या ब्‍याज दरों में हो रही कटौती की वजह से फ़्लोटर फ़ंड पटरी से उतर गए हैं। बढ़ती ब्‍याज दरों के सायकल के इस दौर में, ऊंचे रिटर्न के वादे वाले हर फ़ंड की खूबियों और कमियों की बात कर रहे हैं।

फ्लोटर फ़ंड कैटेगरी में अप्रैल 2020 और अक्‍टूबर 2021 के बीच नेट इनफ़्लो, ₹67,952.74 करोड़ रहा। इस दौरान इन फ़ंड हाउस ने, आक्रामक मार्केटिंग करके एक सपना दिखाया, कि फ़्लोटर फ़ंड को बढ़ती ब्‍याज दरों के सायकल से फ़ायदा होगा। उस समय, यानी 2020 और 2021 में महामारी की वज़ह से ब्‍याज दरें कई साल के निचले स्‍तर पर थीं, ऐसे में बहुत से निवेशकों ने अपने पैसे इन फ़ंड्स में लगाए।

लेकिन लगता है कि यही प्रदर्शन 2022 में दोहराया नहीं जा रहा। ब्‍याज दरों मे इज़ाफ़ा बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए किया गया, लेकिन फ़्लोटर फ़ंड्स, ब्‍याज दरों में तेज़ बढ़ोतरी से अचानक झटका खा गए। इस साल अप्रैल और जनवरी के बीच 1.16% रिटर्न ही दे पाए। ये रिटर्न लिक्विड फ़ंड, ओवरनाइट फ़ंड और लो-ड्यूरेशन फ़ंड से भी कम है।

देवांग शाह जो एक्सिस म्‍यूचुअल फ़ंड में फ़िक्स्ड इनकम सेग्मेंट देखते हैं, उनके मुताबिक़ "बहुत छोटे समय में ब्‍याज दरों में ऐसी बढ़ोतरी से फ्लोटर रेट फ़ंड्स ने अपनी चमक खोनी शुरू कर दी है। फ्लोटर फ़ंड उस समय के लिए अच्‍छे होते हैं जब ब्‍याज दरों में कितना इजाफ़ा होता है, और साथ ही महंगाई और मैक्रोइक्रो-इकोनॉमिक्‍स को लेकर अनिश्चितता रहती है।

फीके पड़े फ़्लोटर फ़ंड

ऐसे में ये चौंकाने वाली बात नहीं है कि निवेशक अपनी रक़म फ्लोटर फ़ंड्स से निकाल रहे हैं। कैटेगरी ने इस साल ₹32,882.01 करोड़ का आउट-फ़्लो देखा है। आउट-फ़्लो की रक़म अप्रैल 2020 से अक्‍टूबर 2021 तक के अच्‍छे दिनों में निवेश की गई रक़म की लगभग आधी है।

ब्‍याज दरों में उम्‍मीद से ज़्यादा इज़ाफ़े ने किस तरह से फ़्लोटर फ़ंड के प्रदर्शन को निचले स्‍तर पर पहुंचा दिया, इस बात को स्‍पष्‍ट करते हुए शाह ने कहा "केंद्रीय बैंकों ने शुरुआत में ही ब्‍याज दरों में बड़ी कटौती करके, बैकिंग लिक्विडिटी कम कर दी”। यही वजह रही कि शॉर्ट और लॉन्‍ग टर्म सभी बॉन्‍ड्स की क़ीमतें नए सिरे से तय हुईं।

शाह ने दूसरे फ़ैक्टर्स का भी हवाला देते हुए कहा कि "रूस-यूक्रेन संकट के बाद सब कुछ बदल गया। कमोडिटी और क्रूड की क़ीमतों में उछाल के साथ महंगाई तेज़ी से बढ़ी है”।
महंगाई को नियंत्रित करके लिए 2022 में भारत के केंद्रीय बैंक ने ब्‍याज दरों में अब तक 140 बेसिस प्‍वाइंट यानी 1.4% का इजाफ़ा किया है।

सवाल है कि अब आगे क्‍या
फ़्लोटर फ़ंड की पोज़िशन ऐसी थी कि उनको बढ़ती ब्‍याज दरों से फ़ायदा लेना था। लेकिन शुरुआत में ही दरें उम्‍मीद से ज़्यादा बढ़ने की वजह से इनका गेम ख़राब हो गया।
मार्केट से जुड़े लोग आगे चल कर ब्‍याज दरों में किसी बड़ी बढ़ोतरी की उम्‍मीद नहीं कर रहे हैं, ऐसे में एक कैटेगरी के तौर पर फ़्लोटर फ़ंड को नज़दीक़ी भविष्‍य में कोई ख़ास मज़बूती नहीं मिलने वाली।

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