
ICICI Prudential Equity & Debt Fund: हमारी 'बेस्ट बाय' (Best Buy) लिस्ट में जुड़ने वाला नया फ़ंड है. इस फ़ंड ने अपनी शुरुआत से अब तक कई मार्केट साइकल देखी हैं. फ़ंड का अनुभवी मैनेजमेंट और इसकी काफ़ी हद तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता इसे भीड़ से अलग खड़ा करती है. और क्योंकि इस फ़ंड का स्टाइल वैल्यू इन्वेस्टिंग का है, इसलिए ये आपके पोर्टफ़ोलियो में स्टाइल की डाइवर्सिटी ला सकता है. ये किसके लिए सही है? ICICI प्रूडेंशियल इक्विटी और डेट फ़ंड जैसे अग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड ज़्यादातर इक्विटी (equity) में निवेश करते हैं और इनके निवेश का कुछ एलोकेशन फ़िक्स्ड-इनकम (debt) में होता है. मार्केट में ज़्यादा उतार-चढ़ाव होने के समय, इनका डेट (debt) में किया गया निवेश इनमें स्थिरता बनाए रखता है. इसलिए, ये फ़ंड बाक़ी के सभी इक्विटी फ़ंड्स से कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं. जहां ये फ़ंड मार्केट की रैली के दौरान बहुत ज़बर्दस्त प्रदर्शन नहीं करते, वहीं मार्केट के बड़ी गिरावट के समय इनमें गिरावट भी कम ही होती है, और ये निवेशकों के लिए राहत की बात रहती है. ये कंज़र्वेटिव, या पहली बार इक्विटी में निवेश करने वाले और मार्केट के तेज़ उतार-चढ़ाव से अंजान निवेशकों के लिए सही रहते हैं. फ़ंड के निवेश का तरीक़ा ICICI प्रूडेंशियल इक्विटी और डेट फ़ंड अपना स्थिर एसेट एलोकेशन बनाए रखता है, जिसके एलोकेशन का 70 प्रतिशत इक्विटी में होता है और बाक़ी का डेट और कैश के तौर पर रखा जाता है. इक्विटी एलोकेशन इस फ़ंड का नेतृत्व संकरन नरेन (Sankaran Naren) कर रहे हैं, जो इंडस्ट्री में वैल्यू स्टाइल की इन्वेस्टिंग के लिए जाने जाते हैं. आपको इनके वैल्यू इन्वेस्टिंग के सिद्धांतों की गहरी छाप इस फ़ंड के निवेश के तरीक़े में दिख जाएगी. इस फ़ंड की क़रीब 40 प्रतिशत होल्डिंग में आपको AMC के पॉपुलर वैल्यू डिस्कवरी की ओवरलैपिंग दिख जाएगी. इस तरह के निवेश की कला पर अमल करने का नरेन का एक दशक पुराना ट्रैक रिकॉर्ड, उन लोगों को करारा जवाब है, जो कहते हैं कि भारत जैसी ग्रोथ ओरिएंटेड इकोनॉमी में क्वालिटी और वैल्यू एक साथ कम ही होते हैं. तो, डाइवर्सिफ़िकेशन के नज़रिए से ये फ़ंड एक अच्छा फ़िट है, क्योंकि हमारी रेकमेंड की हुई लिस्ट के दूसरे फ़ंड, ग्रोथ स्टाइल के झुकाव वाले हैं. ये फ़ंड, इक्विटी निवेश को लेकर AMC का अपना ही प्राइस-टू-बुक (price-to-book) मॉडल फ़ॉलो करता है. ये वैलुएशन पर क़रीब से नज़र रखते हुए, शेयर ख़रीद कर होल्ड (buy-and-hold) के सिद्धांत को मानता है. बाक़ियों से उलट, अगर वैलुएशन स्वीकार किए
खरीदें, होल्ड करें या बदलें। सही सलाह पाएं।
मेरा पोर्टफोलियो कैसा चल रहा है? मुझे क्या सुधार करना चाहिए? मुझे आगे कहाँ निवेश करना चाहिए? फंड एडवाइज़र इन सभी सवालों के जवाब देता है। हर शनिवार एडवाइज़र नोट। हर दूसरे शनिवार धीरेंद्र कुमार के साथ लाइव सत्र।
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