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एक रिटायर्ड व्यक्ति को इक्विटी में कितना निवेश करना चाहिए?

रिटायर्ड लोगों के लिए अलग-अलग तरह के एसेट एलोकेशन की ख़ूबियां और कमियों की बात, जिससे ज़्यादा फ़ायदे वाला निवेश करने में उन्हें मदद मिले.

रिटायर्ड लोगों के लिए अलग-अलग तरह के एसेट एलोकेशन की ख़ूबियां और कमियों की बात, जिससे ज़्यादा फ़ायदे वाला निवेश करने में उन्हें मदद मिले.

पिछली स्टोरी में हमने एक रिटायरमेंट के बाद के इन्वेस्टमेंट प्लान में इक्विटी की अहमियत की बात की थी. हमने बात की थी कि कैसे केवल डेट (debt) इन्वेस्टमेंट वाले पोर्टफ़ोलियो में पूंजी (Corpus) ख़त्म हो जाने का ख़तरा बना रहता है. हमने आपको एक फ़्रेमवर्क भी दिया ताकि रिटायरमेंट के बाद के साल प्लान करने में आपको मदद मिल सके. पर एक सवाल अब भी बना हुआ है: आपको कितना पैसा इक्विटी में रखना चाहिए? इक्विटी और डेट के बीच सही बैलेंस कैसे बनाया जाए? इस स्टोरी में, हम कुछ ऐसे केस के बारे में बात करेंगे, जिनके इन्वेस्टमेंट में इक्विटी का रेशियो अलग-अलग हो. रिटायरमेंट फ़ंड पर पड़ने वाले इसके असर को समझ कर आप ख़ुद तय कर सकेंगे कि अपने रिटायरमेंट फ़ंड का कितना हिस्सा आप इक्विटी में निवेश करना आपके लिए ठीक रहेगा. ये भी पढि़ये- Retirement: इक्विटी आपकी आराम कुर्सी है रिटायरमेंट फ़ंड का कुछ हिस्सा इक्विटी में इन्वेस्ट करने वाली केस स्टडी मान लीजिए आप साल 2000 की शुरुआत में रिटायर हो गए. रिटायमेंट फ़ंड के तौर पर आपके पास ₹1 करोड़ था, और आपकी हर महीने की ज़रूरत ₹40,000 की थी. हमारे रिटायरमेंट पोर्टफ़ोलियो की अप्रोच के मुताबिक़: आपने अपने फ़ंड का एक हिस्सा इक्विटी ( flexi-cap funds ) में और बाक़ी का पैसा डेट ( short-duration funds ) में इन्वेस्ट किया. हर साल की शुरुआत में आपने, अपने साल भर के ख़र्च का पैसा निकाल कर एक लिक्विड फ़ंड में ट्रांसफ़र कर दिया और ख़र्च का पैसा निकालने के लिए एक सिस्टमैटिक विथड्रॉल प्लान (SWP) बनाया. इसके बाद, हर साल की बढ़ती महंगाई दर से निपटने से राहत के लिए आप, हर साल छः प्रतिशत ज़्यादा पैसा निकालते रहे. हालांकि, अगर किसी भी साल, आपको अपने कॉर्पस के छः प्रतिशत से ज़्यादा पैसा निकालना पड़ा, तो आपने अपनी इ

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