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सब्सक्राइबर्स हैंगआउट: सितंबर एडिशन

धीरेंद्र कुमार और उनकी फ़ंड एनेलिस्ट्स की टीम म्यूचुअल फ़ंड्स और उनसे जुड़े कई विषयों पर आपके सवालों के जवाब दे रही है

धीरेंद्र कुमार और उनकी फ़ंड एनेलिस्ट्स की टीम म्यूचुअल फ़ंड्स और उनसे जुड़े कई विषयों पर आपके सवालों के जवाब दे रही है

स्नेहा सूरी: हम हाज़िर हैं सबस्क्राइबर्स हैंगआउट के सितंबर एडिशन के साथ. शुरुआत करते हैं आपके पहले सवाल से. जिनेश गोपानी ने एक्सिस इक्विटी के फ़ंड मैनेजर पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. आपके जिन सब्सक्राइबरों ने इस फ़ंड को अपने पोर्टफ़ोलियो में रखा है उनके लिए आपकी क्या सलाह है? धीरेंद्र कुमार: हां, एक्सिस के साथ जो कुछ भी हुआ, वो बहुत निराशाजनक रहा है और ये पूरी तरह से अप्रत्याशित था. और ऐसी किसी चीज़ का नतीजा लोगों के मनोबल या उनके निवेश की दिशा पर बहुत अहम असर हो सकता है. लेकिन ये ऐसे समय में हुआ, जो बहुत सही नहीं था. क्योंकि एक्सिस के ज़्यादातर इक्विटी फ़ंड्स द्वारा अपनाई गई स्ट्रैटजी कुछ ऐसी है जिसने उनके लिए काम किया है. और ये फ़ैसला पूरी तरह से सही नहीं लग रहा है क्योंकि पिछले समय में इन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया. इसलिए ये और भी ज़्यादा बड़ा दिखाई दे रहा है. इस सवाल के उठने का ये बड़ा कारण है. लेकिन बुनियादी तौर पर हम म्यूचुअल फ़ंड के डिजाइन के स्ट्रक्चर पर भरोसा करते हैं. कोई भी आपका पैसा नहीं चुरा सकता. हालांकि, हमने देखा है कि, पहले कुछ ग़लतियां ज़रूर हुई हैं. और सेबी का आदेश भी एक लटकती हुई तलवार है. जो घटित होगा उसे स्पष्ट होने में बहुत लंबा समय लग सकता है. तो इसमें देर हो सकती है. लेकिन मुझे लगता है कि क्योंकि उनकी स्ट्रैटजी अभी के हिसाब से फ़ेवर में नहीं या कहें कि अनुकूल नहीं है, और अच्छे दिन जल्दी ही आ सकते हैं या इसमें कुछ दूरी हो सकती है, इसलिए हम इस बात पर कोई एक रुख़ अपनाने के लिए इंतज़ार करेंगे कि क्या हमें इस फ़ंड को छोड़ देना चाहिए या उस फ़ंड नहीं छोड़ना चाहिए. लेकिन निश्चित तौर पर अभी तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. स्नेहा सूरी: अगला सवाल हमारे एक यूज़र बिमल का है. वो जानना चाहते हैं कि आप इक्विटी इन्वेस्टमेंट का कुछ हिस्सा नैस्डेक फ़ंड में रखने का सुझाव दे रहे हैं ताकि भारतीय इक्विटी में बड़ी गिरावट आने पर ज्योग्राफ़िक डाइवर्सिटी मिल सके और पोर्टफ़ोलियो पर बड़ा असर न पड़े. हालांकि, हर कोई भारतीय अर्थव्यवस्था पर बुलिश है, और इसे ज़िंदगी में एक ही बार आने वाला मौक़े के तौर पर देख रहा है. तो उनका सवाल है कि क्या ये सही नहीं होगा कि आने वाले कुछ समय तक सिर्फ़ भारतीय इक्विटी में ही निवेश किया जा

ये लेख पहली बार सितंबर 20, 2023 को पब्लिश हुआ.

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