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सारांशः बीते एक साल में एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स ने औसतन 3.09 प्रतिशत का नुक़सान पहुंचाया है. 33 फ़ंड्स में से सिर्फ़ चार पॉज़िटिव रिटर्न दे पाए, बाक़ी 29 लाल निशान में हैं. पहली नज़र में ये आंकड़ा डराता है. लेकिन इसी दौरान इंडेक्स पर चलने वाले फ़ंड इनसे कहीं ज़्यादा टूटे हैं. यानी नुक़सान तो हुआ, पर फ़ंड मैनेजर्स ने नुक़सान काफ़ी हद तक रोक लिया. ऐसे में निवेशक को क्या करना चाहिए और क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए, आइए समझते हैं.
लार्ज-कैप फ़ंड को इक्विटी की सबसे सुरक्षित कैटेगरी माना जाता है. देश की सबसे बड़ी और जमी-जमाई कंपनियों में पैसा लगता है, इसलिए उम्मीद रहती है कि यहां झटके कम लगेंगे. पर पिछले एक साल का हिसाब देखें तो यहां भी निवेशकों का पैसा घटा है.
Value Research के 20 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक़, एक्टिव लार्ज-कैप कैटेगरी के 33 में से सिर्फ़ चार फ़ंड ही पिछले एक साल में पॉज़िटिव रिटर्न दे पाए. बाक़ी 29 घाटे में हैं. कैटेगरी का औसत रिटर्न -3.09 प्रतिशत रहा.
अब सवाल ये है कि जिन लोगों का पैसा इनमें लगा है, वो क्या करें? या क्या नए निवेशकों को लार्ज-कैप फ़ंड में निवेश करना चाहिए? जवाब देने से पहले पूरी तस्वीर देख लेते हैं.
ध्यान रहे कि सभी आंकड़े डायरेक्ट प्लान के हैं. Parag Parikh Large Cap Fund और JioBlackRock Large Cap Fund नए हैं और एक साल पूरा नहीं हुआ. इसलिए लिस्ट से बाहर हैं.
जिन चार फ़ंड्स ने पॉजिटिव रिटर्न दिया
| फ़ंड | 1 साल रिटर्न (%) | VR रेटिंग | एक्सपेंस रेशियो (%) | एसेट (₹ करोड़) |
|---|---|---|---|---|
| Quant Large Cap Fund | 5.68 | 3 | 0.45 | 3,651 |
| Taurus Large Cap Fund | 5.13 | 3 | 1.88 | 60 |
| Bank of India Large Cap Fund | 2.84 | 4 | 0.87 | 231 |
| Invesco India Large Cap Fund | 1.3 | 5 | 0.66 | 2,021 |
| आंकड़े: Value Research, 21 सितंबर 2026 तक. डायरेक्ट प्लान. | ||||
दूसरे छोर पर कौन
लिस्ट में सबसे नीचे Samco Large Cap Fund है, जिसे 9.08 प्रतिशत का नुक़सान हुआ. उसके ऊपर DSP Large Cap Fund (-6.56 प्रतिशत), UTI Large Cap Fund (-6.37 प्रतिशत) और Mahindra Manulife Large Cap Fund (-6.30 प्रतिशत) हैं.
सबसे ऊपर वाले Quant Large Cap Fund और सबसे नीचे वाले Samco Large Cap Fund के बीच क़रीब 15 प्रतिशत का फ़ासला है. एक ही कैटेगरी में, लगभग एक जैसी कंपनियों में पैसा लगाने के बावजूद ऐसा हुआ है. यही फ़र्क़ बताता है कि फ़ंड का चुनाव मायने रखता है.
अब असली बात: इंडेक्स का क्या हाल रहा?
यहीं तस्वीर बदल जाती है. इसी एक साल में Nifty 50 पर चलने वाले इंडेक्स फ़ंड क़रीब 7.3 प्रतिशत टूटे. सेंसेक्स पर आधारित इंडेक्स फ़ंड 9.8 प्रतिशत तक गिरे. निफ़्टी 100 इंडेक्स फ़ंड 5.4 प्रतिशत नीचे रहा.
अब इनकी तुलना एक्टिव फ़ंड्स के -3.09 प्रतिशत औसत से कीजिए:
- 33 में से 32 फ़ंड्स ने Nifty 50 index fund से बेहतर किया
- 33 में से 25 फ़ंड्स ने Nifty 100 index fund से बेहतर किया
यानी नुक़सान सबको हुआ, पर एक्टिव फ़ंड मैनेजर्स ने इंडेक्स के मुक़ाबले नुक़सान काफ़ी कम रखा. ये वही कैटेगरी है जिसके बारे में सालों से कहा जाता रहा है कि यहां एक्टिव फ़ंड इंडेक्स को हरा नहीं पाते. हालांकि, पिछले एक साल में इसका उल्टा हुआ.
ऐसा हुआ क्यों?
वजह बाज़ार के अंदर छिपी है. इस साल सबसे ज़्यादा पिटाई सबसे बड़ी कंपनियों की हुई.
- सबसे बड़ी 10 कंपनियों को बराबर वेट देने वाला इंडेक्स फ़ंड 12.4 प्रतिशत गिरा
- सेंसेक्स की 30 कंपनियों वाला इंडेक्स फ़ंड 9.8 प्रतिशत गिरा
- लेकिन निफ़्टी नेक्स्ट 50 (यानी 51 से 100 नंबर की कंपनियां) वाला इंडेक्स फ़ंड 4.4 प्रतिशत चढ़ा
- निफ़्टी 100 की सभी कंपनियों को बराबर वेट देने वाला इंडेक्स फ़ंड भी 1.3 प्रतिशत पॉज़िटिव रहा
मतलब साफ़ है. जिन फ़ंड्स ने सबसे बड़े नामों पर पूरा दांव लगाया, वो पिटे. जिन्होंने पोर्टफ़ोलियो थोड़ा फैलाकर रखा, उन्होंने बचाव कर लिया. Nifty 50 index fund इसी वजह से पिछड़ा -उसमें ऊपर की चंद कंपनियों का वेट बहुत ज़्यादा होता है और उसके पास वहां से हटने का विकल्प नहीं होता. एक्टिव फ़ंड मैनेजर के पास यह विकल्प होता है.
बड़े फ़ंड्स ने ज़्यादा निराश किया
ऊपर की दूसरी टेबल देखिए. कैटेगरी के पांच सबसे बड़े फ़ंड्स में से एक भी पॉज़िटिव नहीं है और तीन तो कैटेगरी औसत से भी नीचे हैं. इनके अलावा Aditya Birla Sun Life Large Cap Fund (₹29,711 करोड़) 5.14 प्रतिशत और Axis Large Cap Fund (₹31,376 करोड़) 4.09 प्रतिशत गिरा.
सबसे बड़े 5 फ़ंड्स का हाल
| फ़ंड | एसेट (₹ करोड़) | 1 साल रिटर्न (%) | VR रेटिंग | एक्सपेंस रेशियो (%) |
|---|---|---|---|---|
| ICICI Prudential Large Cap Fund | 80,206 | -6.04 | 5 | 0.71 |
| SBI Large Cap Fund | 55,140 | -2.63 | 3 | 0.68 |
| Nippon India Large Cap Fund | 54,134 | -5.83 | 5 | 0.57 |
| HDFC Large Cap Fund | 39,933 | -3.95 | 4 | 0.83 |
| Mirae Asset Large Cap Fund | 38,166 | -4.16 | 3 | 0.5 |
| आंकड़े: Value Research, 21 सितंबर 2026 तक. डायरेक्ट प्लान. | ||||
पॉज़िटिव रिटर्न देने वाले चार फ़ंड्स में से तीन फ़ंड छोटे हैं. Taurus Large Cap Fund के पास सिर्फ़ ₹60 करोड़ हैं और उसका एक्सपेंस रेशियो 1.88 प्रतिशत है, कैटेगरी में सबसे ज़्यादा. Bank of India Large Cap Fund ₹231 करोड़ का है. असल में छोटे फ़ंड के लिए पोर्टफ़ोलियो बदलना आसान होता है, इसलिए एक-दो सही दांव पूरा साल बना देते हैं. पर यही बात उल्टी दिशा में भी चलती है.
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तो निवेशक क्या करें?
1. सबसे पहले, कुछ मत कीजिए
एक बुरा साल देखकर फ़ंड बेचना निवेश की सबसे महंगी आदतों में से एक है. आप नीचे बेचकर ऊपर ख़रीदते हैं और हर बार टैक्स और एग्ज़िट लोड भी भरते हैं. इक्विटी में एक साल कुछ साबित नहीं करता.
2. अपने फ़ंड का 3 और 5 साल का रिकॉर्ड देखिए
एक साल के नंबर पर फ़ैसला मत लीजिए. अपने फ़ंड का तीन साल और पांच साल का रिटर्न कैटेगरी औसत से मिलाइए. अगर वो वहां भी लगातार पिछड़ रहा है, तभी बदलने की सोचिए.
3. रेटिंग को एक साल के रिटर्न से मत जोड़िए
लिस्ट में ICICI Prudential Large Cap Fund और Nippon India Large Cap Fund, दोनों 5-स्टार वाले, नीचे के हिस्से में हैं. वहीं 2-स्टार वाला Axis Large Cap Fund इनसे ऊपर है.
इसमें कोई गड़बड़ी नहीं. रेटिंग एक साल पर नहीं बनती, वो तीन और पांच साल के रिस्क-एडजस्टेड प्रदर्शन को देखकर बनती है. एक बुरा साल किसी फ़ंड के लंबे समय के रिकॉर्ड को नहीं मिटाता और एक अच्छा साल किसी कमज़ोर फ़ंड को अच्छा नहीं बना देता.
4. टॉप-4 की लिस्ट देखकर उनमें मत कूदिए
जो रणनीति इस साल चली, ज़रूरी नहीं अगले साल भी चले. हर साल की टॉप लिस्ट अलग होती है. रैंकिंग के पीछे भागना - यानी हर साल पिछले साल का विनर ख़रीदना - लंबे समय में सबसे ख़राब नतीजे देता है.
5. SIP हर हाल में चालू रखिए
गिरते बाज़ार में की गई ख़रीद ही आगे चलकर सबसे अच्छा काम करती है. जिन्होंने पिछले एक साल में SIP बंद नहीं की, उन्होंने सस्ते में यूनिट जोड़े हैं. SIP रोकने का मतलब है डिस्काउंट वाली सेल में दुकान से बाहर निकल जाना.
6. एक्सपेंस रेशियो पर नज़र डाल लीजिए
लिस्ट में एक्सपेंस रेशियो 0.45 प्रतिशत से 1.88 प्रतिशत तक है. ये फ़र्क़ एक साल में छोटा लगता है, पर 15-20 साल में लाखों का हो जाता है. इसे आप पूरी तरह कंट्रोल कर सकते हैं, रिटर्न को नहीं.
7. अपना एसेट अलोकेशन देख लीजिए
अगर एक साल का घाटा देखकर आपकी नींद उड़ रही है, तो शायद आपने इक्विटी में ज़रूरत से ज़्यादा पैसा डाल रखा है. ये संकेत फ़ंड बदलने का नहीं, अपना एलोकेशन ठीक करने का है.
जोखिम: क्या याद रखें
लार्ज कैप का मतलब यह नहीं है कि "घाटा नहीं होगा." ये कैटेगरी मिड और स्मॉल कैप से कम उतार-चढ़ाव वाली है, बस इतना. इसमें भी निगेटिव साल आते हैं और आगे भी आएंगे.
छोटे फ़ंड के ऊंचे रिटर्न को थोड़ा शक़ से देखिए. आकार छोटा हो तो उतार-चढ़ाव दोनों तरफ़ तेज़ होता है.
पांच साल से कम का पैसा इक्विटी में मत रखिए. अगर अगले दो-तीन साल में पैसे की ज़रूरत है तो वो लार्ज-कैप फ़ंड में भी नहीं होना चाहिए.
आख़िर में
पिछला एक साल लार्ज-कैप निवेशकों के लिए अच्छा नहीं रहा, इसमें कोई दो राय नहीं. पर “सिर्फ़ 4 फ़ंड पॉज़िटिव” वाली सुर्ख़ी अधूरी कहानी है. इसी दौरान इंडेक्स और भी ज़्यादा गिरा और ज़्यादातर फ़ंड मैनेजर्स ने उससे बेहतर संभाला.
निवेशक के लिए सबसे सही क़दम अक्सर सबसे बोरिंग होता है - कुछ मत कीजिए, SIP चलने दीजिए, और तीन साल बाद फिर देखिए.
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