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निवेश का अंतिम पड़ाव

निवेश में सफलता की चाभी इस बात को समझना है कि उसे कब और कैसे बेचा जाए

निवेश में सफलता की चाभी इस बात को समझना है कि उसे कब और कैसे बेचा जाएAnand Kumar

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कभी-कभी, बचत और निवेश के बारे में सबसे बुनियादी, और आम सी बात भी कहनी पड़ती हैं, और ये बात ऐसी ही है: निवेश का पूरा उद्देश्य उसे बेचना है. आप अपनी पूंजी बढ़ाने के लिए निवेश करते हैं. जब आप निवेश ख़रीदते हैं, तो आपका पैसा किसी और को मिलता है. और जब आप उसे बेचते हैं तभी आपको पैसा मिलता है. मगर फिर भी, निवेश के बारे में क़रीब-क़रीब पूरी बातचीत ख़रीदने को लेकर ही होती है!

दो दशक से भी ज़्यादा समय पहले, जब 'म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट' को शुरू हुए कुछ ही समय बीता था, तब मैंने एक फ़ंड मैनेजर का इंटरव्यू लिया, जिन्होंने सदी के अंत में IT/ डॉटकॉम बूम के दौरान बहुत अच्छे नतीजे हासिल किए थे, लेकिन उसके बाद की गिरावट में उनका बुरा हाल हुआ था. उन दिनों, इंडस्ट्री या सेक्टर के रिस्क को कम करने के ज़्यादा नियम भी नहीं थे. हालांकि इसके लिए फ़ंड्स में कुछ नियम ज़रूर हुआ करते थे, पर शायद उतने नहीं. मगर उस IT बूम के दौरान, जिन लोगों ने इन नियमों को मानने की कोशिश की, वो भी एक समय के बाद लालच में पड़ गए. और जब IT निवेश कुछ ज़्यादा ही लुभावना हो गया, तब वो भी इस सेक्टर को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाए. बाद में जितने भी बुल रन आए, उनके मुक़ाबले, ये समय ऐसा था जब सेक्टोरल कॉन्सन्ट्रेशन का रिस्क काफ़ी ज़्यादा था क्योंकि IT स्टॉक्स, आम मार्केट के मुक़ाबले काफ़ी बढ़िया नतीजे दे रहे थे. जो फ़ंड अपने निवेश का बड़ा हिस्सा IT स्टॉक में निवेश कर रहे थे, वो डाइवर्सिफ़ाई करने वालों के मुक़ाबले इतने बड़े अंतर से आगे थे कि उसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल था. पीछे मुड़ कर देखने पर लगता है कि इसी वजह से निवेशकों ने इस बूम-और-बस्ट सायकल से जितना सीखा, उतना इसी तरह की बाद में होने वाली घटनाओं ने नहीं सिखाया.

उस ख़ास इंटरव्यू में, जिसका मैं ज़िक्र कर रहा हूं, इस फ़ंड मैनेजर ने मुझसे दुखी होकर कहा, "हमने अच्छी ख़रीद की, लेकिन हमने अच्छी बिक्री नहीं की." उस समय, जब मैं आज की तुलना में क़रीब दो दशक छोटा था (और इस तरह से दो दशक कम अनुभवी भी), तब ये एक दिलचस्प ख़याल लगता था. लगता है जैसे इसमें आत्म-बोध से भरी समझदारी की गूंज है, जो काफ़ी साफ़ तरीक़े से अभिव्यक्त की गई है. मगर बाद में, जब मैंने इसके बारे में ज़्यादा सोचा, तो इस सोच को लेकर मेरा नज़रिया उतना सकारात्मक नहीं रहा. असल में, मेरे लिए ये स्पष्ट हो गया कि ये एक निवेशक के तौर पर बहुत अच्छा रवैया (मैं यहां विनम्रता से कह रहा हूं) नहीं था, और एक पेशेवर फ़ंड मैनेजर के तौर पर ये रवैया कैसा था इसकी तो बात ही छोड़ दें.

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जैसा कि मैंने पहले बताया, निवेश का उद्देश्य ही बेचना है. जब हम निवेश करते हैं तो हमें कुछ हासिल नहीं होता. दरअसल, जब हमारे बैंक खाते में मौजूद पैसा निवेश में बदल जाता है, तो हमारा जोख़िम और अनिश्चितता बढ़ जाते हैं. सिर्फ़ निवेश को बेचने के बाद ही निवेश वापस नक़द पैसे बदलता है और हमारे बैंक अकाउंट तक पहुंचता है, और इसके बाद ही आप अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं.

क्या ये बात मज़ेदार नहीं है कि इस पल, और इस पूरी चीज़ की समझ, एक ओपन-एंड वाले म्यूचुअल फ़ंड के फ़ंड मैनेजर को नहीं होती... असल में, इक्विटी निवेशकों को ये भी महसूस करना चाहिए कि जिस कंपनी के शेयरों में उन्होंने निवेश किया है, उसके मैनेजमेंट के लिए ये पल कभी नहीं आता है. ये एक बारीक़ बात है, इसलिए इस पर थोड़ा ध्यान से सोचें. फ़ंड मैनेजमेंट और बिज़नस चलाना ऐसे काम हैं जिनकी सफलता रोज़ के NAV, सालाना रिटर्न, हर साल के मुनाफ़े जैसी चीज़ों से नापी जाती है. इसलिए, ये पक्का करना हमारे ऊपर है कि हम सिर्फ़ अच्छी ख़रीदारी ही न करें, अच्छी बिक्री भी करें. क्योंकि अच्छी ख़रीदारी जैसी कोई चीज़ नहीं होती; केवल अच्छी बिक्री होती है क्योंकि अगर आप अच्छी बिक्री नहीं करते हैं, तो ख़रीदारी कोई मायने नहीं रखती.

तो, आप अच्छी बिक्री कैसे करते हैं? जवाब साफ़ है: ये केवल अच्छा चुनने और अच्छा ख़रीदने से नहीं होता, बल्कि अपने निवेश की लगातार निगरानी करने और उस पर कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने से होता है. ये कहना जितना आसान है, करना उतना ही आसान है, जैसा कि हमने पिछले महीने के 'म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट' में देखा था, जिसमें ज़्यादातर भारतीय निवेशकों की फ़ंड-इकट्ठा करने की मानसिकता पर रोशनी डाली गई थी.

यही कारण है कि म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट की कवर स्टोरी का हमारा ताज़ा अंक ये पता लगा रहा है कि आपको म्यूचुअल फ़ंड निवेश को कब बेचना चाहिए. हमने उन कारणों का एक बड़ा सर्वे किया है जिसकी वजह से किसी निवेशक को अपना म्यूचुअल फ़ंड निवेश बेचना चाहिए और इसके लिए कुछ ज़रूरी सिफ़ारिशों की एक गाइड भी बनायी है. इसके अलावा उतनी ही महत्वपूर्ण बात ये भी है कि हमने बेचने के 'फ़र्जी' कारणों की चर्चा भी की है, जो बेचने की अच्छी वजहें लगती हैं लेकिन असल में उन्हें नज़रअंदाज किया जाना चाहिए.

उम्मीद है, हमारी कवर स्टोरी से आप अपने म्यूचुअल फ़ंड निवेश के आख़िरी और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचने के लिए बेहतर ढंग से तैयार होंगे.

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