Anand Kumar
सारांशः NPS में अब एक तीसरा रिटायरमेंट ऑप्शन आ गया है, जो पहले नहीं था. यह न एन्युटी है, न एकमुश्त (lumpsum). और सही सब्सक्राइबर के लिए यह वो समस्या सुलझाता है जो इन दोनों में से कोई भी नहीं कर पाता था.
17 साल बाद, 60 साल की उम्र में रिटायर होने वाले NPS सब्सक्राइबर्स के पास सिर्फ़ दो रास्ते थे. 60 प्रतिशत एकमुश्त पैसा कैश में लो. या 6-7 प्रतिशत की एन्युटी ख़रीदो, जो ज़िंदगीभर मिले, लेकिन परिवार के लिए कुछ न बचे. ज़्यादातर ने पहला रास्ता चुना. और ज़्यादातर को एक ही चेक पर 25 साल का सफ़र तय करना उम्मीद से ज़्यादा मुश्किल लगा.
15 मई 2026 को पेंशन फ़ंड रेगुलेट्री एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने तीसरा रास्ता खोला.
रिटायरमेंट इनकम स्कीम (RIS) के ज़रिये आप 60 प्रतिशत एकमुश्त पैसे को NPS में ही छोड़ सकते हैं, जो RIS स्टेडी (Steady) नाम के एक ख़ास लाइफ़साइकिल फ़ंड में निवेशित रहेगा. इसमें से पैसा आप 85 साल की उम्र तक मासिक, तिमाही या सालाना क़िश्तों में निकाल सकते हैं. एसेट मिक्स 60 साल की उम्र पर 35 प्रतिशत इक्विटी से धीरे-धीरे घटकर 75 साल पर 10 प्रतिशत हो जाता है और फिर 85 साल तक 10 प्रतिशत पर टिका रहता है. रिबैलेंसिंग सब्सक्राइबर के जन्मदिन पर होती है. जो भी रक़म बचे, वो नॉमिनी को मिल जाती है. अनिवार्य 40 प्रतिशत एन्युटी में कोई बदलाव नहीं है.
पैसा निकालने के दो तरीक़े
सिस्टमैटिक पेआउट रेट (SPR) डिफ़ॉल्ट ऑप्शन है. यह रेट-आधारित है और एक सरल फ़ॉर्मूले पर चलता है: पेआउट रेट = 1 ÷ (85 − मौजूदा उम्र). यह रेट सब्सक्राइबर के जन्मदिन पर उस वक़्त के कॉर्पस पर लागू होती है और 12 महीने के लिए तय रहती है.
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उम्र
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पेआउट रेट |
| 60 | 4.00% |
| 65 | 5.00% |
| 70 | 6.70% |
| 75 | 10.00% |
| 80 | 20.00% |
| 82 | 33.30% |
| 83 | 50.00% |
| 84 | 100.00% |
सिस्टमैटिक यूनिट रिडेम्शन (SUR)- यह यूनिट-आधारित है. कुल यूनिट बैलेंस को बची हुई क़िश्तों की संख्या से भाग दिया जाता है. मान लीजिए ₹80 लाख का कॉर्पस और 25 साल की मासिक क़िश्तें, तो हर बार 2,666.67 यूनिट रिडीम होंगी. रुपये में रक़म NAV के साथ बदलती रहेगी.
SPR प्रतिशत को स्थिर रखता है. SUR यूनिट काउंट एक जैसा रखता है. दोनों तरीक़ों में तय निकासी अवधि तक कॉर्पस ख़त्म हो जाता है.
एन्युटी से तुलना
₹60 लाख के कॉर्पस पर, 6.5 प्रतिशत के NPS एन्युटी रेट के हिसाब से, ज़िंदगीभर ₹32,500 महीने मिलते हैं. वही ₹60 लाख RIS में 4 प्रतिशत के शुरुआती रेट पर ₹20,000 महीने देता है, लेकिन कॉर्पस बढ़ता रहता है, पेआउट भी बढ़ सकता है और जो बचे वो नॉमिनी को मिलता है. एन्युटी में ज़्यादा, फ़िक्स, मृत्यु पर बंद. RIS में कम शुरुआत, बढ़ सकता है और विरासत में मिल सकता है.
क्या ग़लत हो सकता है
PFRDA ने साफ़ कहा है: कोई गारंटी नहीं, मार्केट रिस्क है, और बचत का कोई भरोसा नहीं. दो और बातें जो सर्कुलर में नहीं हैं: SPR उम्र के साथ तेज़ी से बड़ी रक़म काटता है; 84 साल पर 100 प्रतिशत रेट का मतलब है पूरा कॉर्पस एक साल में ख़त्म. अगर कोई 85 के बाद भी जिए, तो उसके पास सिर्फ़ एन्युटी की इनकम बचेगी. और एक बार धीरे-धीरे पैसा निकालने का ऑप्शन चुन लिया, तो नए NPS कॉन्ट्रिब्यूशन बंद हो जाते हैं. जिस कॉर्पस से शुरुआत होगी, उसी से निकासी होगी.
यह किसके लिए सही है, और क्या करें
RIS उन सब्सक्राइबर्स के लिए है जिनके पास अच्छा-ख़ासा एकमुश्त पैसा है (₹30 लाख से ज़्यादा), दूसरी स्थिर इनकम है, बदलते पेआउट का सामना करने का सब्र है, और विरासत छोड़ने की चाहत है. जिनकी रिटायरमेंट इनकम का इकलौता ज़रिया NPS है, या जो मार्केट के साथ बदलते पेआउट से असहज हों, उनके लिए यह सही नहीं है.
इसके लागू होने की तारीख़ अभी नहीं बताई गई है, लेकिन अगले कुछ महीनों में आने की उम्मीद है. तब तक: CRA पोर्टल से अपना NPS कॉर्पस देखें, NPS ट्रस्ट साइट पर एन्युटी रेट की तुलना करें और ख़ुद से पूछें कि बदलते पेआउट का आप कितना सामना कर सकते हैं. भारतीय NPS सब्सक्राइबर के पास आख़िरकार वो टूलकिट आ गई है जो दुनिया के पुराने पेंशन सिस्टम में बरसों से मौजूद है. सही सब्सक्राइबर के लिए, यह वो काम करता है जो एन्युटी कभी नहीं कर सकती थी, जो है: रिटायरमेंट के दौरान भी कॉर्पस को काम पर लगाए रखना.
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ये लेख पहली बार मई 19, 2026 को पब्लिश हुआ.
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