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RD vs PPF vs फ़्लेक्सी-कैप: किसमें आपका फ़ायदा?

बचत और निवेश के पुराने ढर्रे पर चलते रहने की आपको क्या क़ीमत अदा करनी पड़ती है

बचत और निवेश के पुराने ढर्रे पर चलते रहने की आपको क्या क़ीमत अदा करनी पड़ती है

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सुनने में भले ही घिसा-पिटा लगे, लेकिन बदलाव ही जीवन का इकलौता सच है. बचपन की मासूमियत से लेकर बड़ी उम्र की समझदारी तक हमारा जीवन लगातार बदलता रहता है. इसलिए, अगर वक़्त के साथ हमारे नज़रिए और सोच-समझ में बदलाव आता है, तो ऐसा ही बदलाव हमारे निवेशों में भी क्यों नहीं आना चाहिए?

अब तक तो ज़्यादातर भारतीय परिवार, बैंक डिपॉज़िट और पब्लिक प्रॉविडेंट फ़ंड (PPFs) की क़समें खाते रहे हैं. हमारे माता-पिता अभी भी इन्हीं दो निवेशों की बातें करते हैं. निवेश के ये दोनों तरीक़े पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक विरासत की तरह हैं और आंकड़े भी यही दिखाते हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, 31 मार्च 2023 तक भारतीय परिवारों का 48 फ़ीसदी से ज़्यादा फ़ाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट बैंक डिपॉज़िट और PPF में है.

अगर कोई एक शब्द इस स्थिति के लिए सटीक होगा तो वो है, 'झूठ'. क्योंकि हमारे जीवन की तरह, निवेश की दुनिया का बदल जाना एक सच्चाई है, पर निवेशों को लेकर हमने वक़्त के साथ चलने से इनकार कर दिया है और इस बदलाव की ज़रूरत से आंख मूंद कर बैठे हैं. हम इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि अतीत के ये योद्धा पुराने अवशेषों के सिवा और कुछ नहीं हैं, ख़ासकर जब इनका मुक़ाबला म्यूचुअल फ़ंड्स से किया जाता है.

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परफ़ॉर्मेंस
ये सच है कि PPF में अब भी कुछ ख़ासियतें बरक़रार हैं, ख़ासकर कंज़रवेटिव निवेशकों या 'कम-रिस्क-कम-रिटर्न' के विकल्पों की तलाश करने वालों के लिए, लेकिन क्या आपने फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स के बारे में सुना है, एक तरह का म्यूचुअल फ़ंड, जो अलग-अलग साइज़ की कंपनियों में निवेश कर सकता है? क्या आप जानते हैं कि ये फ़ंड लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं?

आप इन आंकड़ों को देखिए, पिछले 10 साल के सबसे ख़राब फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड की SIP ने, इन दो पुराने दिग्गजों को मात दे दी है. 01 नवंबर 2013 और 31 अक्तूबर 2023 के बीच, SBI रिकरिंग डिपॉज़िट के 8.5 फ़ीसदी और PPF के 7.86 फ़ीसदी के मुक़ाबले फ़्लेक्सी-कैप ने 10.36 फ़ीसदी दिया है.

इसे एक और नज़रिए से देखिए, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में ₹10,000 का मासिक निवेश, 10 साल के आख़िर में बढ़कर ₹21.1 लाख हो जाएगा, जबकि बैंक डिपॉज़िट और PPF, क्रमशः ₹18.95 लाख और ₹18.27 लाख तक पहुंच पाएंगे.

टैक्स के बाद रिटर्न
अगर आप टैक्स को लेकर भी सोचें, तो PPF द्वारा टैक्स-फ़्री रिटर्न की पेशकश के बावजूद सबसे सुस्त फ़्लेक्सी-कैप अभी भी टॉप पर आएगा.

रिकरिंग डिपॉज़िट के लिए टैक्स के बाद रिटर्न और भी ख़राब है क्योंकि जो ब्याज मिलता है उसे आपकी टैक्स की इनकम में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के मुताबिक़ टैक्स लगाया जाता है. इसका मतलब है कि सबसे ऊंचे टैक्स ब्रेकेट में किसी के लिए, ब्याज पर 30 फ़ीसदी टैक्स लगाया जाएगा, जबकि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के मामले में कैपिटल गेन्स टैक्स 10 फ़ीसदी होता है.

हमारी राय

  • PPF एक सुरक्षित और टैक्स-फ़्रेंडली ऑप्शन होने के बावजूद, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड बाज़ार में उतार-चढ़ाव को लेकर मीडियम रिस्क (moderate risk) वाले लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए निवेश का एक विकल्प हो सकता है.
  • सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाले फ़ंड को भूल जाइए, बारीक़ी से जांच करने पर पता चलता है कि 63 फ़ीसदी फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स ने पिछले 10 साल में 14 फ़ीसदी से ज़्यादा रिटर्न दिया है. इसका मतलब ये है कि सही फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड का चुनाव करते वक़्त आपको थम नहीं जाना चाहिए. और आंकड़े बताते हैं, किसी तथाकथित ग़लत फ़ंड में निवेश करना, उसमें निवेश न करने या अतीत में फंसे रहने से कहीं बेहतर हो सकता है.

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