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IPO: इंडिया शेल्टर फ़ाइनांस कॉर्पोरेशन की 10 बड़ी बातें

निवेश से पहले इस हाउसिंग फ़ाइनांस कंपनी की हर ज़रूरी बात जानें

निवेश से पहले इस हाउसिंग फ़ाइनांस कंपनी की हर ज़रूरी बात जानें

India Shelter Finance Corporation IPO: इंडिया शेल्टर फ़ाइनांस कॉर्पोरेशन ने 13 दिसंबर 2023 को अपना IPO पेश कर दिया है. यहां हम कंपनी की क्षमताओं, कमज़ोरियों और ग्रोथ की संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं, जिससे इन्वेस्टर्स के लिए इस इशू में निवेश से जुड़ा फैसला लेना आसान हो सकता है. जानिए IPO से जुड़ी 10 बड़ी बातें...

IPO डिटेल

IPO का कुल साइज़ (करोड़ ₹) 1200
ऑफर फॉर सेल (करोड़ ₹) 400
नए इशू (करोड़ ₹) 800
प्राइस बैंड (₹) 469-493
सब्सक्रिप्शन की तारीख 13-15 दिसंबर 2023
इशू का उद्देश्य आगे कर्ज़ देने के लिए पूंजी की ज़रूरतें पूरी करना

IPO के बाद

मार्केट कैप (करोड़ ₹) 5278
नेटवर्थ 2175
प्रमोटर होल्डिंग (%) 48.3
प्राइस/ अर्निंग्स रेशियो (P/E) 26.3
प्राइस/ बुक रेशियो (P/B) 2.4

क्या करते हैं आंकड़े

फ़ाइनेंशियल 2Y CAGR (%) TTM FY23 FY22 FY21
NII (करोड़ ₹) 32 338.26 293.08 225.28 169.22
PAT (करोड़ ₹) 33 200.67 155.34 128.447 87.38
एडवांसेज (करोड़ ₹) 40.8 5180.68 4359.43 3073.293 2198.527
डिपॉजिट (करोड़ ₹) 41.3 3169 2812 1883 1409
नेट वर्थ 15 1375 1241 1076 937
NII यानी नेट इंटरेस्ट इनकम
PAT यानी प्रॉफ़िट आफ्टर टैक्स

प्रमुख रेशियो

रेशियो 3 साल का एवरेज (%) TTM FY23 FY22 FY21
ROE (%) 12 15.92 13.4 12.8 9.8
ROA (%) 4.23 4.72 4.1 4.5 4.1
NIM (%) 5.5 7.96 5.7 5.6 5.2
GNPA (%) 1.7 1 1.13 2.12 1.92
ROE यानी इक्विटी पर रिटर्न
ROA यानी एसेट्स पर रिटर्न
NIM यानी नेट इंटरेस्ट मार्जिन
GNPA यानी ग्रॉस नॉन परफ़ॉर्मिंग एसेट्स

1. क्वालिटी और फ़ाइनांस

  • कंपनी का तीन साल का एवरेज ROE 12 फ़ीसदी और नेट इंटरेस्ट मार्जिन 5.5 फ़ीसदी रहा है.
  • कंपनी ने फ़ाइनेंशियल ईयर 23 में ROE और ROA क्रमशः 13.4 और 4.1 फ़ीसदी दर्ज किया है.
  • 30 सितंबर, 2023 तक उसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 49 फ़ीसदी के स्तर पर था. मज़बूत कैश रिज़र्व और IPO से मिली पूंजी के दम पर उसे बिज़नस ऑपरेशन को टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी.

2. ग्रोथ

पिछले तीन साल के दौरान, इसका सालाना AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) लगभग 41 फ़ीसदी और PAT (प्रॉफ़िट आफ़्टर टैक्स) 33 फ़ीसदी की दर से बढ़ा है.

3. वैल्युएशन

  • स्टॉक का प्राइस 2.4 गुने P/B पर आंका गया है, जबकि उसकी जैसी दूसरी कंपनियों के लिए ये एवरेज 4.3 गुना है.
  • कंपनी 26.3 गुने के P/E रेशियो पर ट्रेड करेगा, जबकि उसकी जैसी दूसरी कंपनियों का P/E 29.9 है.

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4. क्या करती है कंपनी?

1998 में स्थापित, इंडिया शेल्टर फ़ाइनेंस कॉर्पोरेशन एक अफ़ोर्डेबल हाउसिंग फ़ाइनांस कंपनी है जो मुख्य रूप से हाउसिंग लोन (AUM का 58 फ़ीसदी) और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज पर क़र्ज़ (42 फ़ीसदी) देती है. कंपनी 15 राज्यों में मौजूद है और भारत के लगभग 94 फ़ीसदी हाउसिंग फ़ाइनांस मार्केट तक इसकी पहुंच है.

5. मुख्य ताकत

AUM ग्रोथ: पिछले तीन वर्षों में इसने AUM में सालाना लगभग 41 फ़ीसदी की ग्रोथ दर्ज की है.

कम LTV रेशियो: LTV रेशियो, संपत्ति के बदले क़र्ज़ का अनुपात होता है. 30 सितंबर 2023 तक कंपनी ने 50 फ़ीसदी का एवरेज लोन-टू-वैल्यू (LTV) बनाए रखा है.

6. India Shelter Finance की कमज़ोरियां

ऊंचा NPA: बीते तीन साल के दौरान कंपनी का एवरेज नेट NPA 1.3 फ़ीसदी रहा है और फ़ाइनेंशियल ईयर 22 में NPA 2.1 फ़ीसदी रहा. साथ ही, 30 सितंबर 2023 तक उसका प्रोविजन कवरेज रेशियो 28.7 फ़ीसदी के स्तर पर था.

कॉम्पीटिशनः हाउसिंग लोन सेक्टर में कॉम्पीटिशन ख़ासा ज़्यादा है. बैंक सहित कई अन्य कंपनियां इस तरह की सर्विस देती हैं.

7. मैनेजमेंट

  • कंपनी रेग्युलेटरी पेनल्टी से पूरी तरह फ़्री है.
  • 30 सितंबर, 2023 तक उसका प्रोविज़न कवरेज रेशियो 28.7 फ़ीसदी था. ये एक हाउसिंग फ़ाइनांस कंपनी है और मॉर्टगेज के बदले में लोन देती है.

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8. ग्रोथ की संभावनाएं

सरकारी पहल, अनुकूल नीतियों और आमदनी में बढ़ोतरी के चलते फ़ाइनेंशियल ईयर 23-26 के दौरान भारत की हाउसिंग फ़ाइनांस इंडस्ट्री के हर साल क़रीब 13-15 फ़ीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. इससे शहरीकरण को रफ़्तार मिलेगी.

9. लोन बुक

  • उसकी लोन बुक फ़ाइनेंशियल ईयर 21 और 23 के बीच सालाना 51 फ़ीसदी की दर से बढ़ी है.
  • 30 सितंबर 2023 तक इसका AUM ₹5,181 करोड़ के स्तर पर था.

10. कितनी भरोसेमंद

हालांकि, कंपनी की सुरक्षा खाई (MOAT) बहुत भरोसेमंद नहीं है. कई दूसरी NBFC हैं, जो बड़े स्तर पर ऐसी सेवाएं देती हैं. उनकी ब्रांड रिकॉल

डिसक्लेमरः ये कोई निवेश की सलाह नहीं है. निवेश से पहले ख़ुद पर्याप्त विचार कर लें.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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