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नए साल में लीजिए ये 5 रिजॉल्यूशन, हो जाएंगे फ़ाइनेंशियली सिक्योर

आपके पैसे को बढ़ाने के लिए हम यहां कुछ टिप्स सुझा रहे हैं

आपके पैसे को बढ़ाने के लिए हम यहां कुछ टिप्स सुझा रहे हैं

साल 2024 शुरू हो गया है. नए साल पर कई लोग अपनी ज़िंदगी को बेहतर करने के लिए तरह-तरह के रिज़ॉल्यूशन लेते हैं या ख़ुद से वादे करते हैं. पर, ध्यान देने की बात ये है कि 2024 के लिए आपने पैसे से जुड़ा कौन सा रिजॉल्यूशन लिया है?

आर्थिक अनिश्चितता और जीवनयापन की बढ़ती लागत ने बता दिया है कि फ़ाइनेंशियल प्लानिंग कितनी ज़रूरी है. शुरुआत में थोड़ी मुश्किल होती है, लेकिन पैसों से जुड़े लक्ष्य बनाने और उन्हें हासिल करने से आपकी लाइफ़ बेहतर हो सकती है.

इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए, आइए नए साल के रिजॉल्यूशन के बारे में जानते हैं. इससे आप अपने लिए एक शानदार फ़ाइनेंशियल प्लान बना सकते हैं.

1. लाइफ़ इंश्योरेंस ख़रीदें
साल की शुरुआत में ही अपने लिए लाइफ़ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस ख़रीद लें.

लाइफ़ इंश्योरेंस बहुत ज़रूरी है. इससे आपके न होने की स्थिति में आपके आश्रितों को फ़ाइनेंशियल सपोर्ट मिलता है. आपको एक टर्म प्लान लेने की सलाह दी जाती है, जो अपनी लाइफ़ को इंश्योर करने का सबसे किफायती तरीक़ा है.

आपको कितना कवरेज चाहिए? ये आपकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है. उदाहरण के तौर पर, एक 60 साल के व्यक्ति जिसने अपने सभी लोन चुका दिए हैं और उसके बच्चे काम कर रहे हैं, उसकी तुलना में 30 साल के व्यक्ति के लिए ज़्यादा लाइफ़ इंश्योरेंस कवरेज की ज़रूरत होती है. अमूमन, आपका कवरेज आपके बकाया लोन को चुकाने और परिवार की वित्तीय सुरक्षा के लिए होना चाहिए, जब तक कि वे फ़ाइनेंशियली सिक्योर न हो जाए. और, ध्यान रखें कि आपकी ज़रूरतें बदल सकती हैं, इसलिए वर्तमान बीमा पर ग़ौर करें और ज़रूरत के हिसाब से कवरेज बढ़ाएं.

हेल्थ इंश्योरेंस का भी यही नियम है की पहले ₹3 से 5 लाख का कवरेज काफ़ी था, लेकिन अब बढ़ती हेल्थ कॉस्ट के चलते ज़्यादा कवरेज की ज़रूरत है. अगर आपके परिवार में कोई बुजुर्ग हैं, तो हेल्थ इमरजेंसी की संभावना बढ़ जाती है. इसीलिए आपको हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है.

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2. टैक्स प्लानिंग में देर न करें
कई लोग टैक्स प्लानिंग आखिरी समय में करने की ग़लती करते हैं और ज़्यादार लोग इन्वेस्टमेंट प्लानिंग किए बिना ही टैक्स सेविंग स्कीम्स में इन्वेस्ट कर देते हैं.

तो इन्वेस्टमेंट प्लानिंग का सही समय क्या है? अगर आपने पिछले साल अप्रैल में शुरुआत की है तो बहुत अच्छा है. इससे आपको सोच-समझकर इन्वेस्टमेंट के फैसले लेने में मदद मिलेगी और शानदार रिटर्न मिल सकता है.

मिसाल के तौर पर, मान लीजिए कि आपने टैक्स बचाने के लिए जल्दबाजी में पैसा PPF में डाल दिया. ये बात सही है कि PPF फ़ायदे की सेविंग स्कीम है, लेकिन अगर आपने उन पैसे को टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फ़ंड में इन्वेस्ट किया होता, तो आपको ज़्यादा रिटर्न मिल सकता था.

3. रिटायरमेंट प्लानिंग करें शुरू
अगर आपको 20-30 की उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग करना जल्दबाज़ी लगती है, तो आप इस पर फिर से विचार करें.

आज के दौर में भारत में ज़्यादातर लोग निजी क्षेत्र में काम कर रहे हैं. पेंशन प्लान सभी को सही रूप से कवर नहीं करतीं, और EPF और PPF रिटायरमेंट प्लानिंग के बाद की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पातीं. साथ ही, महंगाई बढ़ने का मतलब है कि आपको हाल की परिस्थितियों को जान के भी यह पता नहीं चलता कि आने वाले 30 या 40 साल में रिटायरमेंट के बाद कितना ख़र्च होगा.

अभी से ही रिटायरमेंट प्लानिंग करना कितना बेहतर हो सकता है.

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मान लीजिए, आप 30 साल की उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग करना शुरू करते हैं और आपका लक्ष्य ₹5 करोड़ है तो आपको हर महीने 12 प्रतिशत की कमाई वाले इक्विटी फ़ंड में हर महीने ₹14,200 की SIP करनी होगी. वहीं, अगर आप 45 साल की उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग करने पर मासिक SIP की रक़म ₹99,100 तक बढ़ सकती है, जिससे आपको 12 प्रतिशत तक का रिटर्न होगा! इसलिए, अभी से इनवेस्टमेंट शुरू करना ही सबसे बेहतर है.

4. सिर्फ रिटर्न के आधार पर इन्वेस्ट न करें
ज़्यादातर इन्वेस्टर सिर्फ़ अतीत के रिटर्न के आधार पर बिना प्लानिंग के इन्वेस्ट करते हैं. वो इस पर विचार नहीं करते कि संबंधित विकल्प उनके लिए सही है या नहीं. यही वजह है कि उनका इन्वेस्टमेंट बिगड़ जाता है.

किसी भी फ़ंड या स्टॉक में अपना पैसा इन्वेस्ट से पहले खु़द ये सवाल ज़रूर करें:

  • आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं?
  • मैं इन्वेस्टमेंट क्यों कर रहा हूं?
  • आप अपने पैसों के साथ कितना रिस्क उठा सकते हैं?

इन सवालों के जवाब मिलने पर आप स्पष्ट रूप से ये समझ जाएंगे कि कौन सा इन्वेस्टमेंट सही है.

लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए, इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड एक अच्छा ऑप्शन है, जबकि शॉर्ट ड्यूरेशन म्यूचुअल फ़ंड उन लोगों के लिए सही हैं, जिनके गोल कम समय के हैं.

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5. बाज़ार को टाइम मत करें
बाज़ार में उतार-चढ़ाव लगे रहते है, इस पर ध्यान न देते हुए आपको एसेट एलोकेशन प्लान बनाना चाहिए.

एसेट एलोकेशन से हमारा मतलब है, पोर्टफ़ोलियो को इक्विटी और डेट (Debt) में डिवाइड कीजिए. इक्विटी की तुलना में डेट निवेश का सुरक्षित विकल्प है, लेकिन कम रिटर्न है. वहीं, इक्विटी में महंगाई को मात देने वाला रिटर्न मिलता है लेकिन उसमें कम समय में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

अगर आप लंबे समय के लिए इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो ज़्यादा इक्विटी एलोकेशन करें. अपने गोल के करीब पहुंचने पर,आप अपने पैसों को डेट (Debt) सिक्योरिटीज़ में शिफ़्ट कर सकते हैं.

2024 में ये रिजॉल्युशन को लेने से आप जल्दी ही सुरक्षित और बेहतरीन फ़्यूचर की ओर बढ़ने लगेंगे.

ये लेख पहली बार जनवरी 02, 2024 को पब्लिश हुआ.

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