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गोल्ड, बिटक्वाइन वगैरह

निवेशक, सावधान रहें: गोल्ड और बिटक्वाइन ललचाने के खेल में वापस आ गए हैं.

निवेशक, सावधान रहें: गोल्ड और बिटक्वाइन ललचाने के खेल में वापस आ गए हैं.Anand Kumar

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बिटकॉइन और गोल्ड तेज़ी से बढ़ रहे हैं. ये कोई नई बात नहीं है. जिन चीज़ों का लोग ट्रेड करते हैं वो ऊपर-नीचे होती रहती हैं. इन दो एसेट क्लास में मेरी दिलचस्पी बिल्कुल नहीं है. अक्सर मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि लोग इनमें पैसा लगाते क्यों हैं. सवाल ये भी है कि क्या इन दोनों की मौजूदा तेज़ी में भी समानता है? मोटे तौर पर जवाब हां है. हालांकि, मैं कुछ ऐसा बताऊंगा जो अलग है, भले ही मुझे 'इस बार ये अलग है' जैसे वाक्य से चिढ़ है.

गोल्ड और बिटकॉइन दोनों बेकार की एसेट क्लास हैं, जो किसी भी चीज़ का उत्पादन नहीं करते. अपने वजूद और प्रकृति में, ये और ज़्यादा अलग नहीं हो सकते. सोना, धन का सबसे सरल रूप है - अगर ये वास्तव में सोना है, तो इसका कुछ मूल्य होता है. इसका इस्तेमाल हज़ारों साल से धन और मुद्रा (करंसी) के भंडार के रूप में किया जाता रहा है. बिटकॉइन इसके बिल्कुल उलट है. भौतिक अर्थों में, इसका कोई अस्तित्व ही नहीं है - ये पूरी तरह से टेक्नोलॉजी की उपज है. इसके आविष्कार के पंद्रह साल बाद भी कम ही लोग समझते हैं कि ये क्या है और इसकी वैल्यू क्यों है. मैं नहीं जानता कि कितने लोग असल में समझते हैं कि ब्लॉक-चेन, टोकन या NAFT क्या है या क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन असल में क्या करता है.

फिर भी, इस समय, ग्लोबल फ़ाइनांस में, दोनों का काम एक जैसा है. ये दोनों मुद्रा के तौर पर काम कर रहे हैं जिनका इस्तेमाल अमेरिकी डॉलर की मूसलाधार बारिश से बचने के लिए किया जा रहा है, जो अब बाढ़ का रूप ले चुकी है. इन दोनों के बुनियादी फ़र्क़ के बावजूद, इनके गुपचुप तरीक़े से लेनदेन करने की क्षमता, मौजूदा उथल-पुथल के दौर में इन एसेट क्लास के डाइवर्सिफ़िकेशन के नेरेटिव का सच उजागर करती है कि अमेरिकी डॉलर की बाढ़ संभावित रूप से महंगाई दर और डिवैल्युएशन (अवमूल्यन) के खिलाफ़ उनके एसेट्स की रक्षा कर सकती है. ख़ैर, ये तो सिद्धांत की बात हुई.

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अमेरिकी सरकार अब हर 100 दिन में कुछ ट्रिलियन डॉलर का क़र्ज़ कम कर रही है. जिसे हम गोल्ड या बिटकॉइन की क़ीमत के रूप में देखते हैं उसे मुद्राओं के बीच विनिमय दर के रूप में बेहतर समझा जाता है. आप कह सकते हैं कि डॉलर की तुलना में गोल्ड और बिटकॉइन में तेज़ी चल रही है, या आप कह सकते हैं कि उन दो की तुलना में डॉलर में मंदी है. एक ही बात है. डॉलर की आपूर्ति इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कि बहुत से लोग अमेरिकी मुद्रा के बजाय, सोना और बिटकॉइन रखना पसंद करेंगे. ऐसा लग रहा है कि ये कुछ समय तक ऐसे ही चलता रहेगा. अमेरिका में आर्थिक विकास ठीक-ठाक है, और टैक्स का आधार सामान्य रूप से बढ़ रहा है, यही वजह है कि ये भी सामान्य लग रहा है.

आइए, फ़िलहाल वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक तरफ़ छोड़ दें और उसकी बात करें जो हमें चिंतित करता है - बिटकॉइन का अचानक पुनरुद्धार होना और सोने में तेज़ी आना, घरेलू बचत करने वालों और निवेशकों को बहुत ज़्यादा आकर्षित कर रहा है. ये एसेट क्लास, सट्टेबाजों का इलाक़ा है और होनी भी चाहिए. समझदार निवेशकों को अपने पैसों का भविष्य इन पर आधारित नहीं करना चाहिए.

हालांकि, तुरंत फ़ायदा पाने का आकर्षण पहले इतना कभी नहीं रहा. इनकी तुलना में, पारंपरिक निवेश का रिटर्न बेहद मामूली दिखता है, फिर चाहे ऐसा न भी हो. बिटकॉइन और गोल्ड को लेकर गहमागहमी, सामूहिक तौर पर ऐसे फ़ाइनेंशियल तरीक़े की बात है जिसमें कभी-कभी लॉटरी लग जाती है. ये धन जमा करने की एक ऐसी जगह है, जो सैद्धांतिक तौर पर सरकारों की सनक से कुछ हद तक दूर है, और जिसमें शानदार रिटर्न का एक्स्ट्रा फ़ायदा भी शामिल है.

मगर, ये एक ख़तरनाक भ्रम है. इन दोनों एसेट्स का उतार-चढ़ाव उन्हें लंबे समय में स्थिरता और ग्रोथ चाहने वाले किसी आम निवेशक के लिए बेकार बना देता है. ये सच है कि कुछ लोगों ने बिटकॉइन और गोल्ड की तेज़ी में अपना भाग्य चमकाया है, लेकिन जब उनकी वैल्यू में बिना किसी चेतावनी के गिरावट आई, तो कई लोगों के भारी नुक़सान भी उठाया है. ये एक कसीनो की तरह है, और यहां संभावनाएं शायद ही कभी आपके पक्ष में होती हैं. इसलिए, जहां रातों-रात अमीर होने की कहानियों से उत्साहित होकर, इस लड़ाई में शामिल होना बड़ा लुभावना लगता है, वहीं निवेशकों को समझदारी और सावधानी के साथ क़दम उठाने चाहिए. डाइवर्सिटी, रिसर्च और इंट्रिंसिक वैल्यू वाले ऐसे एसेट्स पर ध्यान देना, जो समय के साथ मुनाफ़ा पैदा करते हैं, अब भी एक अच्छी निवेश रणनीति की आधारशिला हैं.

कुछ भी हो, सबसे पहले हमारा ध्यान व्यापक अंतरराष्ट्रीय संदर्भों पर नज़र रखते हुए, घरेलू निवेश की तरफ़ बना रहना चाहिए. अलग-थलग रहना शायद ही कभी सही हो, ख़ासकर मौजूदा माहौल में तो बिल्कुल नहीं. भारतीय अर्थव्यवस्था और बाज़ार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और हम निवेशकों को इसी पर ध्यान देना चाहिए.

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