फ़र्स्ट पेज

IPO से सीखें और समझें

न्यू एज कंपनियों के स्टॉक्स में भारी भरकम नुक़सान से आप क्या सबक ले सकते हैं

न्यू एज कंपनियों के स्टॉक्स में भारी भरकम नुक़सान से आप क्या सबक ले सकते हैं

back back back
5:59

क्या आप नई पीढ़ी के निवेशक हैं जो नई पीढ़ी के शेयरों (new age companies) यानी न्यू एज स्टॉक्स के साथ बाज़ार के रवैये से नाखुश हैं? अगर ऐसा है तो ऐसा सोचने वाले आप आप अकेले नहीं हैं. ऐसा लगता है कि निवेशकों का एक बहुत बड़ा समूह है, जो लगभग इसी तरह की स्थिति में है. इनमें से कई लोग निराश हैं क्योंकि एक समय शर्तिया पैसे बनाने वाले लग रहे 'न्यू एज डिजिटल IPO' बुनियादी तौर पर असफल हो गए और शायद कई लोगों ने, पिछले कुछ महीनों के दौरान इन दोनों डिजिटल IPO और सेकेंडरी मार्केट में, ट्रेडिंग और निवेश में भारी नुक़सान उठाया है.

ऐसी कुछ ज़रूरी बातें होती हैं जिनके चलते इक्विटी निवेशकों को बड़े स्तर पर नुक़सान की आशंकाएं होती हैं. और वो है - कम उम्र, मार्जिन ट्रेडिंग, डेरिवेटिव ट्रेडिंग, अनुभव की कमी और सभी IPOs के लिए भारी उत्साह. इस प्वाइंट पर, आप में से बहुत से लोगों की नज़र अपवादों पर जा रही होगी. मुझे भी यक़ीन है कि कुछ अपवाद मौजूद हैं. लेकिन, मुद्दा ये नहीं है. ये रुझानों और संभावनाओं की बात है. इन सभी बातों के चलते भारी नुक़सान की आशंकएं बढ़ जाती है और जिन ट्रेडर्स में ये तमाम या बहुत सी 'बातें' मौजूद हैं, उनको कम समय में ऐसे नुक़सान होना तय है.

ऐसे कई सिद्धांतों की तरह, इस सच्चाई को समझने के लिए, इसके विपरीत स्थिति पर विचार करें. एक स्टॉक निवेशक के बारे में सोचिए जिसमें ऊपर बताई गई 'बातों' के विपरीत सभी ख़ूबियां हैं. ये वो शख्स है, जिसकी उम्र 40 साल या उससे ज़्यादा है और वो कैश में डिलीवरी लेता है, केवल स्टॉक्स में इन्वेस्ट करता है, न कि 'बड़े नामों' में. अब वो कम से कम 5-6 साल या उससे ज़्यादा समय से इक्विटी में इन्वेस्ट रहा है और बहुत कम IPO में निवेश करता है. लोग वास्तव में किसमें निवेश करते हैं, इस पर ध्यान दिए बिना मैंने यहां ख़ास विशेषताओं की प्रोफ़ाइल बनाई है. अगर आप 20 से ज़्यादा निवेशकों को जानते हैं तो आप इस बात की सच्चाई को ख़ूब समझते होंगे.

ये भी पढ़िए- हाई रिटर्न देने वाले Mutual Fund आपका पैसा गंवा सकते हैं. जानिए क्यों

मेरे अनुभव में, पहली तरह का निवेशक अक्सर दूसरा जैसा बन जाता है. हर कोई तो नहीं, लेकिन ज़्यादातर ऐसा ही करते हैं. ये एक ऐसा दौर है जिससे लोगों को गुजरना ही पड़ता है. इक्विटी निवेश (और शायद जीवन में कई चीज़ों) के बारे में ये अजीब बात है कि बाहर से और शुरुआत में ये बहुत आसान लगता है. IPO की समस्या इसे और भी बदतर बना देती है तो किसी भी तरह से, IPO में निवेश करना आसान लगता है. इसमें, कब इन्वेस्ट करना है, किस कीमत पर ख़रीदना है, ट्रेड को कब फैलाना है या एक ही बार में खरीदना है जैसे सवालों से जूझना नहीं पड़ता है. आप IPO कंपनियों द्वारा दिए गए सभी बयानों को पढ़ और सुन सकते हैं जो सोशल मीडिया पर मुफ्त में शेयर होते रहते हैं और फिर आप इन्वेस्ट करिए. तब, IPO में निवेश करना आपको आसान लगेगा.

ऐतिहासिक तौर पर, भारत में, IPO निवेश को शुरुआती निवेशक के लिए काफ़ी अनुकूल माना जाता था. एक पॉइंट पर शायद ये सच था लेकिन ये अब अतीत की बात हो चुकी है. अब, IPO निवेश निश्चित रूप से एक सीखने की टेक्निक है, जहां नए लोग सीखते हैं कि चर्चाएं हमेशा सच नहीं होती हैं. किसी भी IPO में, इन्वेस्टर की तुलना में मैनेजमेंट हमेशा फ़ायदे में रहता है क्योंकि सूचना का लाभ इन्वेस्टर को होता है. इस संबंध में वॉरेन बफे़ कह चुके हैं, "IPO एक मोलभाव के बाद किए गए ट्रांजैक्शन की तरह है. इसमें सेलर तय करता है कि कब इसे पब्लिक करना है और ये आपके लिए उचित समय होने की संभावना नहीं है."

कुछ समय बाद, निवेशकों को एहसास होता है कि IPO पर दांव लगाने का कोई सही तरीक़ा नहीं है. क्या आपको मालूम है कि इंफोसिस का मूल IPO असल में जनता को लुभाने में नाकाम रहा? इसका ट्रांसफर हुआ और मर्चेंट बैंकर को बीच में आना पड़ा था? इसकी तुलना PayTm जैसा बिना फ़ायदे वाला बिज़नस और डिजिटल IPOs के साथ कीजिए.

न केवल नए निवेशकों, बल्कि सभी निवेशकों के लिहाज से IPO के लिए सबसे सही रणनीति यही होगी कि उनके पास बिल्कुल न जाएं, दूर रहें! किसी भी समय सेकेंडरी मार्केट्स में हमेशा बेहतर ऑप्शन मौजूद रहते हैं. हालांकि, अगर आप लालच से बच नहीं सकते हैं, तो ये जानते हुए आगे बढ़ें कि ये एक बड़े जोख़िम वाला दांव है. भले ही आपको ऐसा न लगे, लेकिन आपको तब भी ऐसा ही करना चाहिए. मैंने अक्सर फालतू स्टॉक्स के लिए 'फन मनी' एलोकेशन की वकालत की है; शायद एक छोटी सी 'लर्निंग फ़ी' एलोकेशन की भी सलाह दी जाती है जिसके जरिये आप IPO में निवेश कर सकते हैं. नतीजे के तौर पर इसमें कमाई की संभावना कम है, और ये सीखने की संभावना ज़्यादा है कि आपको IPO से बचना चाहिए. यही आपके लिए बेहतर हो सकता है.

इन्हें भी पढ़ें:
नई हाईप की नई रेल
एक असंभव सा IPO संकट

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF: ₹213 की यूनिट में ₹96 प्रीमियम, क्या निवेश करना सही?

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

Rentomojo IPO: मुनाफ़ा असली, लेकिन क्या वैल्यूएशन बहुत महंगी है?

पढ़ने का समय 7 मिनटLekisha Katyal

Fortis vs Aster: दो हॉस्पिटल चेन, लेकिन क्यों एक-दूसरे अलग हैं दांव?

पढ़ने का समय 7 मिनटसत्यजीत सेन

प्रीमियम जो मेरे पिता ने बेच दिया

पढ़ने का समय 5 मिनटधीरेंद्र कुमार

Hero Motors IPO: EV कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन क्या इतनी क़ीमत चुकाना सही है?

पढ़ने का समय 7 मिनटसत्यजीत सेन

स्टॉक पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गिरावट का मतलब नुक़सान नहीं होता

आपकी स्क्रीन पर लाल रंग का नंबर कोई नुक़सान नहीं है, आप उस पर कोई कदम उठाकर ही उसे पक्का करते हैं

अन्य एपिसोड

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी