टैक्स बचाने के विकल्प

इस साल टैक्स बचाने का आख़िरी मौक़ा

31 मार्च को FY24 ख़त्म हो रहा है. अगर आपने अभी तक अपना टैक्स-सेविंग निवेश नहीं किया है, तो इस लेख में आप अपनी टैक्सेबल इनकम कम करने के 80C विकल्पों के बारे जान सकते हैं.

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"आपको मेरी सलाह मान लेनी चाहिए थी" कहने वाला आदमी किसी को पसंद नहीं होता. इसलिए, हम ये नहीं कहेंगे कि 'टैक्स-सेविंग निवेश करने का सबसे अच्छा वक़्त साल की शुरुआत में होता है न कि साल के आख़िर में'.

अब जब हमने बात छेड़ ही दी है तो चलिए आगे बात बढ़ाते हैं: आख़िरी मिनट में टैक्स कैसे बचाएं!

ये जानना ज़रूरी है

अगर आपने पुराना टैक्स रीज़ीम (न कि नया) वाला विकल्प चुना है, तो आप इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत अपनी टैक्सेबल इनकम को ₹1.5 लाख तक कम कर सकते हैं.

मिसाल के तौर पर, अगर आप सालाना ₹12 लाख कमाते हैं, तो आप सेक्शन 80C इन्वेस्टमेंट्स में ₹1.5 लाख तक का निवेश कर सकते हैं, जिससे आपकी टैक्सेबल इनकम घटकर ₹10.5 लाख हो जाएगी.

80C इंस्ट्रूमेंट्स क्या हैं?

एम्प्लॉई प्रॉविडेंट फ़ंड (EPF): EPF में आपका योगदान (न कि एम्प्लॉयर का योगदान) सेक्शन 80C के तहत आता है.

इसलिए, अगर आपका EPF योगदान साल में ₹50,000 बनता है, तो आप अपनी टैक्सेबल इनकम कम करने के लिए बाक़ी ₹1 लाख दूसरे टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकते हैं. (आपको फ़िर याद दिला दें कि आप सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकते हैं).

लाइफ़ इंश्योरेंस: वैसे तो इंश्योरेंस ख़रीदना कोई निवेश नहीं है, पर अगर आप के ऊपर कोई फ़ाइनेंशियली निर्भर है तो इंश्योरेंस ख़रीदना ज़रूरी हो जाता है.

बेहतर ये होगा कि एंडोमेंट इंश्योरेंस प्लान्स या यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान्स (ULIPs) न चुनें, क्योंकि वे पर्याप्त इंश्योरेंस कवरेज़ या उचित रिटर्न नहीं देते हैं.

हमेशा टर्म इंश्योरेंस प्लान चुनें . हालांकि इन पॉलिसीज़ में जीवित रहते हुए फ़ायदे कम होते हैं, फ़िर भी ये उचित ख़र्च पर पर्याप्त कवरेज़ देते हैं.

हेल्थ इंश्योरेंस: हेल्थ इंश्योरेंस ख़रीदकर भी आप अपनी टैक्सेबल इनकम कम कर सकते हैं. पर ये सेक्शन 80C के तहत नहीं आता है. ये सेक्शन 80D के तहत आता है. सेक्शन 80D के तहत आप ख़ुद की, पति या पत्नी और बच्चों की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर ₹25,000 (अगर पॉलिसीहोल्डर वरिष्ठ नागरिक है तो ₹50,000) तक की कटौती ले सकते हैं. इसके अलावा, कोई अपने माता-पिता की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर इतनी ही राशि की अतिरिक्त कटौती का दावा कर सकता है.

हमने यहां हेल्थ इंश्योरेंस का सुझाव इसलिए दिया है क्योंकि ये बहुत ज़रूरी है.

ये भी पढ़िए- NSC पर मिले ब्याज़ पर टैक्स कैसे लगता है?

आइए, अब 80C टैक्स-सेविंग इंवेस्टमेंट्स पर नज़र डालें

चूंकि EPF मुख्य रूप से एक रिटायरमेंट फ़ंड है, तो आइए सेक्शन 80C के तहत दूसरे वेल्थ बनाने वाले विकल्पों पर नज़र डालें.

टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फ़ंड्स (ELSS): टैक्स-सेविंग फ़ंड्स अपनी पारदर्शिता, मज़बूत रेगुलेशन और अच्छे लॉन्ग टर्म रिटर्न के कारण आपके 80C निवेश का प्रमुख हिस्सा होने चाहिए. (हमारे सुझाए गए टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फ़ंड्स के बारे में जानने के लिए इस पेज़ के 'टैक्स प्लानिंग' सेक्शन में जाएं.) इसके अलावा, दूसरे सभी टैक्स-सेविंग निवेश विकल्पों की तुलना में इनका लॉक-इन पीरियड सबसे कम -- तीन साल -- होता है.

नेशनल पेंशन स्कीम (NPS): NPS एक कम ख़र्च वाला विकल्प है. इसके अलावा, इसमें निवेश करके आप अपनी टैक्सेबल इनकम को और ₹50,000 कम कर सकते हैं .

हालांकि, आपको पता होना चाहिए कि NPS आपके फ़ंड को 60 साल की उम्र तक लॉक कर देता है, और सिर्फ़ विशेष परिस्थितियों में ही आप इसका कुछ हिस्सा पहले निकाल सकते हैं. इसके अलावा, रिटायर होने पर आपको अपनी NPS पूंजी का कम से कम 40 फ़ीसदी हिस्सा एन्युटी ख़रीदने के लिए इस्तेमाल करना होता है.

अगर आप एक ऐसे रिटायरमेंट निवेश की तलाश में हैं जो टैक्स सेविंग विकल्प के रूप में भी काम करे, तो आपको NPS चुनना चाहिए.

दूसरे विकल्प: वैसे तो पब्लिक प्रॉविडिएंट फ़ंड (PPF) 7.1 फ़ीसदी का टैक्स-फ़्री रिटर्न देता है (तिमाही रिविज़न के आधार पर), पर इसमें 15 साल का लंबा लॉक-इन पीरियड होता है.

इसके अलावा, जो लोग कम मेच्योरिटी पीरियड के साथ फ़िक्स्ड डिपाज़िट जैसा कोई प्लान चाहते हैं, उनके लिए नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (NSC) और पांच साल के बैंक और पोस्टऑफिस डिपाज़िट अच्छे विकल्प हैं.

आपके सभी 80C टैक्स सेविंग विकल्प एक साथ

टैक्स सेविंग म्यूचुअल फ़ंड्स वेल्थ बनाने का सबसे अच्छा जरिया हैं; NPS कुछ इक्विटी एक्सपोज़र वाला एक पेंशन प्लान है; बाकी दूसरे विकल्प डेट-ओरिएंटेड हैं.

प्रोडक्ट लॉक-इन पीरियड सालाना रिटर्न रिटर्न पर टैक्स कम से कम निवेश (₹)
टैक्स सेविंग म्यूचुअल फ़ंड्स (ELSS) 3 साल 3Y: 18.52%*5Y: 17.01%*10Y: 16.45%* एक साल में ₹1 लाख से ज़्यादा के कैपिटल गेन पर 10% टैक्स लगता है 5,000 लंपसम; मासिक 500
नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) टियर I 60 साल की उम्र तक; 3 साल के बाद कुछ हिस्सा पहले निकालने की अनुमति टियर I इक्विटी प्लान्स- 3Y: 17.45%*5Y: 15.87%* कॉर्पस का 60% तक टैक्स-फ़्री विड्रॉल सालाना 1,000
पब्लिक प्रॉविडेंट फ़ंड (PPF) 15 साल; 5 साल के बाद पहले ही निकालने की अनुमति पेनल्टी के साथ दी जाती है 7.1%^ कॉर्पस का 60% तक टैक्स-फ़्री विड्रॉल सालाना 500
5 साल की बैंक FD 5 साल 6.5%^^ स्लैब के अनुसार टैक्स 1,000
5 साल की पोस्ट ऑफिस FD 5 साल 7.50%^ स्लैब के अनुसार टैक्स 1,000
नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (NSC) 5 साल 7.70%^ स्लैब के अनुसार टैक्स 1,000
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) (10 साल तक की लड़कियों के लिए) 21 साल; लड़की की उम्र 18 साल होने या 10वीं कक्षा पास करने के बाद कुछ पैसा निकालने की अनुमति दी जाती है 8.2%^ टैक्स-फ़्री सालाना 250
सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम (SCSS) (60 साल से ऊपर के नागरिकों के लिए) 5 साल; पेनल्टी के साथ जल्दी बंद करने की अनुमति दी जाती है 8.2%^ स्लैब के अनुसार टैक्स 1,000
*22 मार्च 2024 तक ELSS और NPS प्लान्स का औसत रिटर्न. ^जनवरी से मार्च 2024 की अवधि के बीच ब्याज़ दर. हर तिमाही में रिविज़न के आधार पर. ^^22 मार्च 2024 को भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दी गई ब्याज़ दर.

ये भी पढ़िए- क्या मुझे इक्विटी फ़ंड के मुनाफ़े पर टैक्स देना होगा?

ये लेख पहली बार मार्च 29, 2024 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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