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EaseMyTrip की ई-बस क्यों उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है?

OTA इंडस्ट्री के एक दमदार खिलाड़ी के इस डाइवर्सिफ़िकेशन के रिस्क पर ग़ौर करते हैं

OTA इंडस्ट्री के एक दमदार खिलाड़ी के इस डाइवर्सिफ़िकेशन के रिस्क पर ग़ौर करते हैं AI-generated image

एक प्रॉफ़िटेबल ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी (OTA) दुर्लभ है, लेकिन इज़ीमाईट्रिप (इज़ी ट्रिप प्लानर्स) हमेशा एक अपवाद के रूप में सामने आई है. हालांकि, इसके हालिया डाइवर्सिफ़िकेशन प्लान इसके सबसे भरोसेमंद समर्थकों के बीच भी चिंता का कारण बन सकती हैं. OTA ने हाल में इलेक्ट्रिक बस मार्केट में उतरने की एक साहसिक पहल की घोषणा की जिसमें अगले दो से तीन साल में 5,000 बसें बनाने में सक्षम एक मैन्युफ़ैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने के लिए ₹200 करोड़ एलोकेट किए गए.

भले ही, कंपनी का सालाना ₹100 करोड़ कैश पैदा करने का प्रभावशाली ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि पूंजी उसके लिए कोई चिंता का विषय नहीं है, लेकिन इसका हालिया वेंचर एसेट-लाइट बिज़नस मॉडल से एक तेज़ बदलाव को दर्शाता है जिसने इसकी सफलता को प्रेरित किया है. इसीलिए, ये बदलाव एक जोख़िम भरा जुआ हो सकता है.

EaseMyTrip का डिवाइर्सिफ़िकेशन का रिस्की फ़ैसला

FY24 की चौथी तिमाही की अर्निंग्स कॉल में, प्रबंधन ने एसेट लाइट स्ट्रैटजी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा, "हम केवल एसेट-लाइट तरीक़े से ही काम करना चाहते हैं, जहां हमें कुछ भी पहले से बुक करने, कुछ भी पहले से ख़रीदने की ज़रूरत नहीं है, और कोई डिलीवरी भी नहीं करनी है." फिर भी, इलेक्ट्रिक बसों के विनिर्माण में इसका उतरना इस नज़रिये का खंडन करता है. अचानक हुआ ये बदलाव तीन बड़े रिस्क लेकर आता है:

  • कम दक्षता: EaseMyTrip का एसेट-लाइट मॉडल इसके प्रभावशाली प्रदर्शन की रीढ़ रहा है, जिसमें FY21-24 के बीच लगाई गई कैपिटल पर औसत रिटर्न (ROCE) 48 फ़ीसदी रहा. इसके विपरीत, ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक और JBM ऑटो जैसे बड़े इलेक्ट्रिक बस मैन्युफ़ैक्चरर ने इसी अवधि में क्रमशः 11 फ़ीसदी और 18 फ़ीसदी का बहुत कम ROCE दर्ज किया. बड़े स्तर पर पूंजी की ज़रूरत वाले इस मॉडल में बदलाव से जुड़े दक्षता के जोख़िम उजागर होते हैं, जहां निवेश पर कम रिटर्न मिलना आम बात होती है.
  • बड़े स्तर पर कैपिटल की ज़रूरत: मैन्युफ़ैक्चरिंग प्लांट के लिए ₹200 करोड़ का निवेश केवल शुरुआत हो सकती है. 5,000 बसों की क्षमता वाले प्लांट के लिए FY24 में घोषित ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक के ₹700 करोड़ का कैपेक्स प्लान को देखते हुए, ईज़माईट्रिप को प्रतिस्पर्धा करने के लिए काफी ज़्यादा धन की ज़रूरत हो सकती है. इस हालिया कैपेक्स से पहले ओलेक्ट्रा के पास पहले से ही 1,500 बसों का प्लांट था, जिससे ज़ाहिर होता है कि ईज़माईट्रिप को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारी कैपिटल की मागं का सामना करना पड़ सकता है.
  • मांग में अनिश्चितता: प्रबंधन का मानना ​​है कि उसका बस टिकटिंग प्लेटफ़ॉर्म, योलो बस, नए इलेक्ट्रिक बस वेंचर के साथ तालमेल बिठाएगा, जिससे FY27-28 तक 2,000 बसें बेचने में मदद मिलेगी. कंपनी को FY30 तक ई-बस इंडस्ट्री में 24 फ़ीसदी की सालाना ग्रोथ का भी अनुमान है. हालांकि, योलो बस ने पिछले दो फ़ाइनेंशियल ईयर में काफ़ी घाटा दर्ज किया है और ईज़माईट्रिप के पास मैन्युफ़ैक्चरिंग का कोई पूर्व अनुभव नहीं है. इससे बिक्री के भरोसेमंद पूर्वानुमान की बजाय एक अपनी इच्छा जैसा लगता है.

हमारी राय

EaseMyTrip लंबे समय से घाटे से भरा इंडस्ट्री में मुनाफ़ा कमाते हुए एक अलग पहचान बना रही है. इसकी सफलता का श्रेय स्मार्ट कैपिटल मैनेजमेंट और एसेट-लाइट स्ट्रैटजी पर इसके फ़ोकस को दिया जा सकता है. मैन्युफ़ैक्चरिंग में क़दम रखना इस प्रमाणित मॉडल से हटने का पता चलता है, जो ऐसे जोख़िम बढ़ जाते हैं जिन्हें शेयरधारक और संभावित निवेशक अनदेखा नहीं कर सकते.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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