बड़े सवाल

Nasdaq FOF: दूसरों से 60% ज़्यादा रिटर्न देने वाला फ़ंड?

क्या वजह रहीं कि इस एक नैस्डैक FoF ने इतने बड़े अंतर से अपने जैसे दूसरे फ़ंड्स को पछाड़ा

क्या वजह रहीं कि इस एक नैस्डैक FoF ने इतने बड़े अंतर से अपने जैसे दूसरे फ़ंड्स को पछाड़ा

कल्पना करें, आप अपने पोर्टफ़ोलियो में दो नैस्डैक-100-फ़ोकस्ड म्यूचुअल फ़ंड ट्रैक कर रहे हैं. दोनों एक ही इंडेक्स में निवेश करते हैं, दोनों का लक्ष्य अमेरिका के टेक-हैवी नैस्डैक-100 के प्रदर्शन को दोहराना है. फिर भी, जब आप उनके एक साल के रिटर्न (18 दिसंबर, 2024 तक) देखते हैं, तो आप चौंक जाते हैं:

ये 21 फ़ीसदी का अंतर है, जिसमें मोतीलाल ओसवाल ने कोटक के मुक़ाबले 60 फ़ीसदी ज़्यादा रिटर्न दिया है. एक ही इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फ़ंड्स के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे हो सकता है? आइए इसे समझें.

ETF प्रीमियम: एक अहम फ़ैक्टर

अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि ये फ़ंड कहां निवेश करते हैं:

  • कोटक नैस्डैक-100 FOF आईशेयर्स नैस्डैक 100 UCITS ETF में पैसा लगाता है, जो ग्लोबल मार्केट्स में ट्रेड होते हैं.
  • मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक-100 FOF मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक-100 ETF में निवेश करता है, जो भारत में ट्रेड होता है.

यहां कुछ बातें काफ़ी दिलचस्प हैं:
मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक-100 ETF जैसे भारतीय ETF वर्तमान में अपने वास्तविक मूल्य (यानि प्रीमियम) से ज़्यादा क़ीमत पर ट्रेड कर रहे हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत में म्यूचुअल फ़ंड विदेशी बाज़ारों में कितना निवेश कर सकते हैं, इस पर रेग्युलेटरी सीमाएं पहले ही पूरी हो गई हैं. नतीजा, निवेशकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय शेयरों में निवेश करने के लिए बहुत कम विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे मोतीलाल जैसे भारत में लिस्टेड ETF की मांग बढ़ रही है.

इसके उलट, कोटक जिस आईशेयर्स ETF में निवेश करता है, वो वैश्विक स्तर पर ट्रेड होता है, जहां कीमतें नैस्डैक-100 इंडेक्स के वास्तविक मूल्य को फ़ॉलो करती हैं. कोटक के रिटर्न में अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रुपये के क़मजोर होने का फ़ायदा भी शामिल है, जो विदेशी बाज़ारों में निवेश किए गए फ़ंड के रिटर्न को बढ़ाता है.

क्या ज़्यादा रिटर्न के पीछे भागना सही?
मोतीलाल के ज़्यादा रिटर्न आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इसकी बड़ी वजह इससे संबंधित ETF की ऊंची क़ीमत होना है और मांग में कमी या रेग्युलेशन में बदलाव होने पर इसमें गिरावट आ सकती है. इसका मतलब है कि भविष्य में रिटर्न इतना ज़्यादा नहीं रह सकता है.

लंबे समय के निवेशकों के लिए, सबसे ज़्यादा मायने ये रखता है कि नैस्डैक-100 इंडेक्स कैसा प्रदर्शन करता है न कि क़ीमत में असामान्य अंतर के कारण होने वाला कम समय का फ़ायदा.

निष्कर्ष

कोटक और मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक-100 FOF के बीच रिटर्न में बड़ा अंतर दिखाता है कि बाज़ार की मांग, प्राइसिंग और रेग्युलेशन जैसी चीज़ें म्यूचुअल फ़ंड के प्रदर्शन को कैसे प्रभावित कर सकती हैं. अगर आप अंतर्राष्ट्रीय फ़ंड में निवेश कर रहे हैं, तो केवल आंकड़ों को न देखें - समझें कि उनके रिटर्न पर किन बातों का असर दिख रहा है. इससे बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिलेगी.

ये भी पढ़िए - NASDAQ क्या NIFTY से बेहतर है?

ये लेख पहली बार दिसंबर 20, 2024 को पब्लिश हुआ.

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