बजट स्पेशल

Union Budget 2025: बजट क्यों हमारे लिए महत्वपूर्ण है?

भारत के सालाना फ़ाइनेंशियल ब्लूप्रिंट का हम सब पर और देश पर इसका असर समझें

भारत के सालाना फ़ाइनेंशियल ब्लूप्रिंट का हम सब पर और देश पर इसका असर समझें

कल्पना करें, आप एक ऐसा घर चला रहे हैं जहां आपको किचन का सामान, किराया और स्कूल की फ़ीस की प्लानिंग करनी है, साथ ही परिवार के साथ छुट्टियों में घूमने जाने के लिए बचत भी करनी है. अब, यही काम देश के 140 करोड़ लोगों के लिए भी किया जाना है. सुनने में मुश्किल लग रहा है न? यहीं पर केंद्रीय बजट की भूमिका शुरू होती है, जो मूल रूप से एक साल के लिए भारत का फ़ाइनेंशियल प्लान होता है. चाहे डिफ़ेंस के लिए फ़ंडिंग हो, राजमार्गों का निर्माण हो या आपका टैक्स तय करना हो, बजट देश के हर विषय और हमारे-आपके जीवन पर सीधा असर करता है.

केंद्रीय बजट क्या है? (What is the Union Budget?)

इसे सरकार की सालाना "मनी डायरी" समझिए. ये सिर्फ़ आंकड़े नहीं - एक बड़ी बात है. बजट हमें बताता है कि सरकार स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों जैसी तमाम ज़रूरतों पर कितना ख़र्च करेगी और टैक्स से कितना पैसा जमा करेगी. साथ ही, ये रोज़गार बढ़ाने, मुद्रास्फ़ीति और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे बड़े मुद्दों से निपटने का मास्टर प्लान होता है.

और, आपके घर के बजट की तरह, इसके भी दो हिस्से हैं:

  • रेवेन्यू बजट: वेतन, सब्सिडी आदि "रोज़मर्रा की" ज़रूरतें.
  • कैपिटल बजट: "बड़े-बड़े" काम जैसे-राजमार्गों, बिजली संयंत्रों का निर्माण और लंबे समय के दूसरे निवेश.

क्यों आपको केंद्रीय बजट पर नज़र रखनी चाहिए?

बढ़िया सवाल है! असल में, ये लगभग हर उस चीज़ को प्रभावित करता है जो आपके लिए मायने रखती है, जिसमें टैक्स, पेट्रोल की क़ीमतें, आपके स्टार्टअप के लिए फ़ंडिंग की संभावनाएं और यहां तक कि आपके मैगी के पैकेट की क़ीमत भी शामिल है.

उदाहरण के लिए, केंद्रीय बजट 2024-2025 में, सरकार ने ₹48.2 लाख करोड़ आवंटित किए. इसमें से ₹11.1 लाख करोड़ पूंजी निवेश के लिए अलग रखी गई, जो पिछले साल की तुलना में 17 फ़ीसदी ज़्यादा थी. उम्मीद थी कि इससे ज़्यादा नौकरियां पैदा होंगी, बुनियादी ढांचा सुधरेगा और सड़कें बेहतर होंगी.

केंद्रीय बजट के तीन हिस्से

बजट को समझना मुश्किल लग सकता है, लेकिन इसे कुछ हिस्सों बांट देंगे तो समझने में मदद मिलेगी:

  • प्राप्तियां (receivables): ये सरकार की "आमदनी" है, जिसमें टैक्स (GST और इनकम टैक्स के बारे में सोचें) और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों से डिविडेंड जैसे नॉन-टैक्स रेवेन्यू शामिल हैं.
  • व्यय (expenditure): ये सरकार का "ख़र्च" है, जिसे रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (जैसे-वेतन का भुगतान) और कैपिटल एक्सपेंडिचर (जैसे-एक नया राजमार्ग बनाना) में बांटा गया है.
  • घाटा (deficit): जब सरकार अपनी कमाई से ज़्यादा ख़र्च करती है, तो घाटे में चली जाती है. इसे राजकोषीय घाटा कहा जाता है, जिसका मतलब है कि उसे अंतर को पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ता है।

अब आप जान चुके होंगे सरकार और हममें से ज़्यादातर लोगों में एक बात समान है, जो है: समय-समय पर कुछ अतिरिक्त नक़दी की ज़रूरत.

बजट के अतीत से एक धमाका

क्या आप जानते हैं कि भारत में केंद्रीय बजट की अवधारणा ब्रिटिश शासन के समय से चली आ रही है? पहला बजट 1860 में जेम्स विल्सन द्वारा पेश किया गया था. 1947 में, जब स्वतंत्र भारत का पहला बजट आर. के. शनमुखम चेट्टी द्वारा पेश किया गया था. ये एक छोटा भाषण था (सिर्फ 15 मिनट!), जो विभाजन से उबर रही अर्थव्यवस्था में स्थायित्व लाने पर केंद्रित था.

मजेदार बात: 2000 तक, बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था, जो अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही परंपरा थी, ताकि वे लंदन से आराम से इसे सुन सकें.

किस तरह बदलता गया बजट?

हाथ से लिखे गए बजट दस्तावेजों (कागज़ों की कटाई की कल्पना करें!) के दिन चले गए हैं. आज, लाइव स्ट्रीमिंग के साथ ये सब डिजिटल है. शुरुआती बजट खाद्यान्न की कमी और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित थे, जबकि हाल के बजट ग्रीन एनर्जी और डिजिटल ट्रांसमिशन जैसे भविष्य के लक्ष्यों से निपटते हैं.

डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा पेश 1991 के बजट को लें - इसने भारत के उदारीकरण की शुरुआत की. या 2023 के बजट को लें, जिसमें राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को ₹19,700 करोड़ आवंटित किए गए, जिसने भारत को रिन्युएबल एनर्जी इनोवेशन के मानचित्र पर ला खड़ा किया.

केंद्रीय बजट एक राष्ट्र की वित्तीय नब्ज है

केंद्रीय बजट केवल उबाऊ आंकड़ों का एक समूह नहीं है, बल्कि ये राष्ट्र की धड़कन है. ये हमें बताता है कि हम कहां जा रहे हैं, क्या महत्वपूर्ण है और हम वहां कैसे पहुंचने की योजना बना रहे हैं. किसान से लेकर तकनीकी विशेषज्ञ तक, हर कोई इसका प्रभाव महसूस करता है.

तो, अगली बार जब बजट का दिन आए, तो केवल सुर्खियों पर ही ध्यान न दें. इसमें डूब जाएं. ये केवल अर्थव्यवस्था के बारे में नहीं है; ये इस बारे में है कि भारत किस तरह से आगे बढ़ने, नवाचार और उन्नति की योजना बना रहा है. और कौन जानता है? हो सकता है कि आप अपनी अगली पार्टी में एक या दो फ़ैक्ट बता दें और सबका ध्यान अपनी ओर खींच लें.

ये भी पढ़ें: बाज़ार में गिरावट के दौरान कौन सा म्यूचुअल फ़ंड चुनें?

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