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क्या टैक्स सेविंग फ़ंड्स में 3 साल का लॉक-इन हर SIP पर लागू होता है?

जानिए, टैक्स सेविंग फ़ंड (ELSS) में SIP के साथ लॉक-इन कैसे काम करता है

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सारांशः एक पाठक सवाल करते हैं कि SIP के ज़रिए ELSS फ़ंड्स में निवेश करने पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड कैसे काम करता है. इसका जवाब टैक्स नियमों और इस निवेश विकल्प की समझ से जुड़ा है.

जब आप ELSS फ़ंड में SIP के ज़रिए निवेश करते हैं, तो हर महीने की किश्त अपने-आप में अलग होती है और उस पर निवेश की तारीख़ से 3 साल का लॉक-इन अलग से लागू होता है. यह एकमुश्त निवेश से अलग है, जहां पूरी रक़म पर एक ही तारीख़ से लॉक-इन लागू होता है. इसलिए सही सवाल यह नहीं है कि “मेरी ELSS SIP कब अनलॉक होगा?” बल्कि यह है कि “हर किश्त कब खुलेगी?”

ELSS (इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम), इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड की एक कैटेगरी है, जिसमें SEBI के नियमों के मुताबिक़ कम से कम 80% पोर्टफ़ोलियो इक्विटी और उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना होता है. हर यूनिट पर 3 साल का लॉक-इन क़ा नियम है. चाहे निवेश SIP से हो या एकमुश्त, किसी भी यूनिट को उसकी निवेश तारीख़ से 3 साल पूरे होने से पहले रिडीम नहीं किया जा सकता.

हर किश्त पर अलग-अलग लॉक-इन होना ही वह मुख्य नियम है, जो ELSS SIP से जुड़े बाकी सभी फ़ैसलों को तय करता है: आप कब निकल सकते हैं, टैक्स प्लानिंग कैसे करेंगे और SIP रोकना समझदारी है या नहीं.

अगर आप ELSS फ़ंड में SIP रोक देते हैं तो क्या होता है?

SIP रोकने से पहले से निवेश की गई रक़म पर कोई असर नहीं पड़ता. हर किश्त अपनी निवेश तारीख़ से 3 साल का लॉक-इन पूरा करती है. SIP बंद करने का मतलब सिर्फ़ इतना है कि आगे नई किश्तें नहीं जुड़ेंगी. इसलिए SIP रोकना और पैसा निकालना, ये दोनों अलग-अलग फ़ैसले हैं.

अगर आप कैश की ज़रूरत के कारण SIP रोक रहे हैं, तो पहले यह देख लें कि कौन सी किश्तें 3 साल पूरा कर चुकी हैं और रिडीम की जा सकती हैं. जो किश्तें 3 साल पहले की हैं, उन्हें आंशिक रूप से निकाला जा सकता है, जबकि नई किश्तें अभी लॉक रहेंगी. डायरेक्ट और रेगुलर ELSS प्लान के ख़र्च के बीच का अंतर, जो आमतौर पर 1 से 1.5 % के आसपास होता है, हर साल बढ़ता रहता है. इसलिए SIP रोकने के बावजूद अपने प्लान का रिव्यू करना सही रहेगा.

ELSS फ़ंड से पूरी तरह कब बाहर निकल सकते हैं?

जब आप 36 महीने तक ELSS SIP करते हैं, तो पूरी रक़म निकालने की तारीख़ पहली किश्त से नहीं, बल्कि आख़िरी किश्त से तय होती है. उदाहरण के लिए, अगर आपने अप्रैल 2026 से SIP शुरू की, तो आप निवेश अप्रैल 2029 में निकाल पाएंगे.

आंशिक निकासी का विकल्प रहता है: जो भी किश्त 3 साल पूरा कर चुकी है, उसे अलग से निकाला जा सकता है, जबकि बाकी यूनिट लॉक रहती हैं. कई निवेशक हर महीने धीरे-धीरे निकासी करने का तरीक़ा अपनाते हैं, ताकि एक साथ पूरी रक़म निकालने की ज़रूरत न पड़े.

ELSS यूनिट रिडीम करने पर कौन सा टैक्स लगता है?

जब ELSS यूनिट 3 साल के लॉक-इन के बाद रिडीम की जाती हैं, तो उस पर मिलने वाला फ़ायदा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है. यानी ELSS पर वही टैक्स नियम लागू होते हैं जो इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड पर होते हैं. लॉक-इन कोई टैक्स छूट नहीं है, बल्कि 80C के फ़ायदे के लिए एक शर्त है.

मौजूदा नियमों के मुताबिक़ इक्विटी फ़ंड से मिलने वाले LTCG पर 12.5 % टैक्स लगता है, लेकिन एक वित्त वर्ष में ₹1.25 लाख तक के गेन पर छूट मिलती है. निवेश के समय ELSS में ₹1.5 लाख तक की रक़म पर 80C के तहत छूट मिल सकती है, लेकिन यह सिर्फ़ पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने वाले निवेशकों के लिए है. नए टैक्स सिस्टम में यह छूट नहीं मिलती.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या मैं ELSS में STP कर सकता हूं और क्या हर ट्रांसफ़र पर अलग लॉक-इन लागू होगा?

अगर आप किसी दूसरे फ़ंड से ELSS में STP करते हैं, तो हर ट्रांसफ़र एक नया निवेश माना जाता है और उस पर अलग से 3 साल का लॉक-इन लागू होता है, ठीक SIP की तरह. हालांकि, अलग-अलग फ़ंड हाउस में STP की सुविधा अलग हो सकती है, इसलिए पहले ही पक्का कर लें.

क्या लॉक-इन खत्म होने के बाद ELSS में एग्ज़िट लोड लगता है?

नहीं. 3 साल का लॉक-इन पूरा होने के बाद ELSS यूनिट पर कोई एग्ज़िट लोड नहीं लगता. उस समय सिर्फ़ LTCG टैक्स ही लागू होता है. SEBI के नियमों के मुताबिक़ लॉक-इन के बाद एग्ज़िट लोड नहीं लिया जा सकता.

अगर मैं एक ELSS से दूसरे ELSS में स्विच करूं, तो क्या लॉक-इन फिर से शुरू होगा?

हां. एक ELSS से दूसरे में स्विच करना पहले फ़ंड से निकलकर नए फ़ंड में निवेश करने जैसा होता है. इसलिए नए फ़ंड में लॉक-इन फिर से 0 से शुरू होता है. लॉक-इन के दौरान स्विच करना संभव नहीं है.

क्या नए टैक्स सिस्टम में ELSS काम का है?

नए टैक्स सिस्टम में 80C की छूट नहीं मिलती, इसलिए ELSS एक सामान्य इक्विटी फ़ंड जैसा ही हो जाता है, जिसमें 3 साल का लॉक-इन होता है. यानी ग्रोथ की संभावना तो रहती है, लेकिन टैक्स का फ़ायदा नहीं मिलता. ऐसे में यह निवेश आपके लिए सही है या नहीं, यह आपकी ज़रूरत और निवेश के तरीक़े पर निर्भर करेगा.

ख़ास बातें जो आपको ध्यान रखनी चाहिए

SIP रोकने से पैसा नहीं खुलता: ELSS SIP बंद करने का मतलब सिर्फ़ नई किश्तें बंद होना है. पुरानी सभी यूनिट अपने-अपने 3 साल के लॉक-इन में रहेंगी. पहले यह देखें कि कौन-सी किश्तें पहले ही खुल चुकी हैं.

निवेश और निकासी पर टैक्स अलग है: ELSS में निवेश करते समय पुराने टैक्स सिस्टम में ₹1.5 लाख तक की छूट मिल सकती है. लेकिन निकालते समय ₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर 12.5 % LTCG टैक्स लगता है. इसलिए निवेश का फ़ैसला लेते समय दोनों बातों को साथ में देखना ज़रूरी है.

यह भी पढ़ें: क्या एक ही AMC के तहत STP पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है?

ये लेख पहली बार अप्रैल 08, 2026 को पब्लिश हुआ.

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