एन.पी.एस.

क्या 60 की उम्र से पहले NPS से बाहर निकलना चाहते हैं? जान लीजिए नियम

आप NPS को जल्दी बंद कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए इन शर्तों को पूरा करना होगा

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साल 2021 में, 29 साल के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल रवि ने दूसरे कोविड लॉकडाउन का इस्तेमाल अपनी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग को दुरुस्त करने के लिए किया. टैक्स बचाने और निवेश के विकल्पों में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) उनके लिए ख़ास तौर पर आकर्षक लगा. ये न सिर्फ़ सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त टैक्स छूट देता था, बल्कि रिटायरमेंट के लिए कम लागत वाला और डाइवर्सिफ़ाइड निवेश का रास्ता भी खोलता था.

आज, रवि की उम्र 34 साल है और उनकी फ़ाइनेंशियल स्थिति बदल चुकी है. उन्होंने एक बड़ा इमरजेंसी फ़ंड बनाया है, नियमित रूप से म्यूचुअल फ़ंड और स्टॉक में निवेश करते हैं. इन बदलावों को देखते हुए, उनके मन में सवाल उठा: “जब मैं अपने निवेश में पहले से ही अनुशासित हूं और नियमित निवेश कर रहा हूं, तो क्या मुझे वाकई NPS अकाउंट बनाए रखने की ज़रूरत है?”

ये सवाल असंतोष से नहीं, बल्कि जिज्ञासा से उपजा था. NPS ने उनका अच्छे से साथ दिया था. लेकिन वे सोच रहे थे: अगर मेरी प्राथमिकताएं बदल गई हैं, तो क्या मैं इससे बाहर निकल सकता हूं?

NPS से बाहर निकलने के नियम

कोई फ़ैसला लेने से पहले, रवि को NPS के एग्ज़िट से जुड़े नियमों को समझना था. ये ख़ासकर उन लोगों के लिए ज़रूरी है जो 60 साल से पहले बाहर निकलना चाहते हैं और सरकारी कर्मचारी नहीं हैं.

उन्हें ये बातें पता चलीं:

  • पांच साल का नियम: रिटायरमेंट, मृत्यु या गंभीर बीमारी के कारण निकासी को छोड़ दें तो NPS से बाहर निकलने की अनुमति तभी मिलती है, जब आपने पांच साल तक योगदान दिया हो.
  • निकासी आपके कॉर्पस के आकार पर निर्भर करती है:
    • अगर आपका कॉर्पस ₹2.5 लाख या उससे कम है, तो आप पूरी राशि एकमुश्त निकाल सकते हैं.
    • अगर कॉर्पस ₹2.5 लाख से ज़्यादा है, तो आपको कम से कम 80 प्रतिशत राशि एन्युटी (रिटायरमेंट के दौरान नियमित आमदनी देने वाला प्लान) ख़रीदने में लगानी होगी. बाक़ी 20 प्रतिशत रक़म ही एकमुश्त निकाली जा सकती है.

ये तरीक़ा सुनिश्चित करता है कि NPS अपने मूल उद्देश्य-रिटायरमेंट इनकम की सुरक्षा-को पूरा करता रहे, साथ ही छोटी राशियों के लिए लचीलापन भी मिले.

रवि ने क्या किया?

रवि ने अपने NPS अकाउंट को जस का तस छोड़ दिया. सबसे पहले, उन्होंने अभी तक पांच साल का अनिवार्य योगदान पूरा नहीं किया था. दूसरा, उनका कॉर्पस ₹2.5 लाख से ज़्यादा था. इसलिए, अगले साल जब लॉक-इन पीरियड खत्म हो जाएगा, तब भी ख़ासकर NPS की कम लागत और इक्विटी-डेट के मिश्रण की वजह से वे इसमें निवेशित रहेंगे और कम्पाउंडिंग की पावर का फ़ायदा उठाएंगे.

ये भी पढ़ेंः ₹50,000 की मासिक पेंशन के लिए कितना निवेश करना होगा?

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आप NPS से बाहर निकलने की सोच रहे हैं:

  • सुनिश्चित करें कि आपने सिस्टम में पांच साल पूरे कर लिए हैं.
  • चेक करें कि आपका कॉर्पस ₹2.5 लाख से कम है या नहीं, ताकि पूरी निकासी हो सके.
  • अगर कॉर्पस इससे ज़्यादा है, तो 80 प्रतिशत राशि एन्युटी में लगाने के लिए तैयार रहें.

लेकिन अहम बात ये है: एन्युटी इनकम रिटायरमेंट के दौरान सबसे ज़्यादा उपयोगी होती है, जब आपकी नियमित सैलरी बंद हो जाती है और आपको टिकाऊ इनकम की ज़रूरत होती है. अगर आप अभी युवा हैं या रिटायरमेंट से दूर हैं, तो अभी अपनी राशि को एन्युटी में बांधना आपके निवेश का सबसे अच्छा इस्तेमाल नहीं हो सकता.

इसके बजाय, NPS में निवेशित रहना, अपने पैसे को बढ़ने देना और एन्युटी को तब तक टालना ज़्यादा समझदारी हो सकती है, जब तक ये वाकई रिटायरमेंट के दौरान स्थिर, आजीवन इनकम देने के अपने उद्देश्य को पूरा न कर सके.

NPS: तनावमुक्त रिटायरमेंट का सबसे अच्छा दांव

पिछले साल ही, वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने बताया था कि NPS हर किसी के लिए एक बेहतरीन रिटायरमेंट प्लान क्यों है. आप उनका पूरा तर्क खुद पढ़ सकते हैं, लेकिन यहां इसका एक छोटा सा सार है कि NPS को क्या ख़ास बनाता है:

  • बेहद कम लागत: NPS सबसे सस्ती रिटायरमेंट स्कीम्स में से एक है, जो लंबे समय तक वैल्थ बढ़ाने के लिए आदर्श है.
  • विविध निवेश + इक्विटी एक्सपोज़र: इक्विटी, बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज़ का संतुलन, जो बिना ज़्यादा उतार-चढ़ाव के महंगाई को मात देने वाली बढ़त देता है.
  • टैक्स के बाद बेहतर रिटर्न: ऐतिहासिक रूप से म्यूचुअल फ़ंड जैसे निवेश की तुलना में टैक्स के बाद ज़्यादा कॉर्पस देता है.
  • 1.5 लाख से ज़्यादा की टैक्स छूट: अतिरिक्त ₹50,000 की छूट देता है.
  • लचीली रीबैलेंसिंग: साल में चार बार टैक्स-फ़्री पोर्टफ़ोलियो रीएलोकेशन की अनुमति.
  • अनुशासित लॉक-इन: 60 साल तक निकासी पर रोक, जिससे भावनाओं में बहकर लिए जाने वाले फ़ैसलों से बचना संभव होता है और लंबे समय तक बचत बढ़ती रहती है.

हां, NPS में कुछ कमियां हैं, लेकिन जो लोग बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने के बारे में गंभीर हैं, उनके लिए ये सबसे भरोसेमंद, टैक्स के लिहाज़ से किफायती और कम लागत वाला विकल्प है. आखिरकार, रिटायरमेंट प्लानिंग में गति नहीं, बल्कि भरोसा मायने रखता है.

ये भी पढ़ेंः NPS इन्वेस्टर्स न करें ये ग़लती

ये लेख पहली बार जून 20, 2025 को पब्लिश हुआ.

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