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एक समय टैक्स-सेविंग कैटेगरी में टॉप परफॉर्मर रहे एक्सिस ELSS टैक्स सेवर ने हाल के सालों में मुश्किल दौर का सामना किया है. इसके चलते ये परफ़ॉर्मेंस रैंकिंग में चौथे क्वार्टाइल (निचले स्तर 25%) में चला गया था.
लेकिन, पिछले 12 महीनों में, इस फ़ंड ने धीरे-धीरे शानदार वापसी की है और अब ये दूसरे क्वार्टाइल में पहुंच गया है. इस सुधार के पीछे आशीष नाइक द्वारा अपनाई गई एक नई स्ट्रैटेजी है. इन्होंने दो साल पहले इस फ़ंड की ज़िम्मेदारी संभाली थी.
पिछले दो सालों में एक्सिस ELSS टैक्स सेवर में बड़े बदलाव हुए हैं. पहले ये फ़ंड कुछ ही कंपनियों पर निर्भर था, लेकिन अब ये ज़्यादा डाइवर्सिफ़ाइड और तेज़ी से काम करने वाला बन गया है. श्रेयश देवलकर के साथ इस फ़ंड को मैनेज करने वाले आशीष नाइक का कहना है, “हमने कुछ बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी कम की है, जिससे हमें और कंपनियों में निवेश करने की आज़ादी मिली है.”
नए सेक्टरों में निवेश और छोटी-छोटी पोजिशंस के साथ, ये फ़ंड अब बाज़ार के तेज़ बदलावों के साथ बेहतर तालमेल बिठा पा रहा है. ये फ़ंड अभी भी ग्रोथ और क्वालिटी पर ध्यान देता है, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है और ये नए मौकों का फ़ायदा उठा सकता है.
नाइक कहते हैं, “हमने दायरा बढ़ाते हुए भी सावधानी से निवेश किया है. बाज़ार में उतार-चढ़ाव के समय मज़बूत कंपनियां बेहतर करती हैं. इस वजह से भी फ़ंड के प्रदर्शन को सपोर्ट मिला है.”
बदलाव और ग्रोथ
ये फ़ंड अपनी ग्रोथ और क्वालिटी की सोच को बनाए रखते हुए अब कैपिटल गुड्स, डिफ़ेंस, पॉवर ट्रांसमिशन सेक्टर्स के साथ-साथ फ़ार्मास्यूटिकल्स के कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफै़क्चरिंग (CDMO) जैसे भारत के कैपेक्स रिवाइवल से जुड़े सेक्टर्स में निवेश कर रहा है. इस नए स्ट्रक्चर ने पोर्टफ़ोलियो को उभरते मार्केट साइकिल के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बना दिया है.
एक्सिस ELSS स्कीम के पोर्टफ़ोलियो में हाल के महीनों में कोरोमंडल इंटरनेशनल, क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स, HDFC लाइफ़ इंश्योरेंस और ब्लू स्टार जैसे शेयर शामिल किए गए हैं.
भले ही, ग्रोथ केंद्रित शेयरों की वापसी से मदद मिली है, लेकिन नाइक इस सुधार का श्रेय फ़ंड की एक्टिव स्ट्रैटेजी को देते हैं. ये सिर्फ़ बाज़ार की तेज़ी का फ़ायदा नहीं है. फ़ंड अब ज़्यादा सक्रिय है और कंपनियों के बुनियादी स्ट्रक्चर और मैनेजमेंट की क्वालिटी पर गहरी नज़र रखता है.
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प्रदर्शन
पिछले एक साल में, एक्सिस ELSS Fund ने 5% का रिटर्न दिया है, जो इस कैटेगरी के 4% के एवरेज से थोड़ा ज़्यादा है. ये शुरुआती संकेत है कि स्ट्रैटेजी में किए गए बदलाव काम कर रहे हैं. लेकिन लंबे समय में इसका प्रदर्शन अभी भी कमज़ोर है. पांच साल में फ़ंड ने 18.3% और दस साल में 13.22% का रिटर्न दिया है, जो 24.7% और 14.8% के कैटगरी एवरेज कम है.
फ़ंड बीते तीन, पांच और 10 साल में लगातार चौथे क्वार्टाइल में रैंक करता रहा है. लेकिन पिछले एक साल में ये दूसरे क्वार्टाइल में पहुंच गया है.
हालांकि, 15 साल की अवधि में ये फ़ंड पहले क्वार्टाइल में बना हुआ है.
हाल के कम समय में हुआ सुधार उत्साह बढ़ाने वाला है, लेकिन नाइक मानते हैं कि लंबे समय के प्रदर्शन को ठीक होने में वक्त लगेगा. फिर भी, वो फ़ंड की अहम स्ट्रैटेजी और इसके नए नज़रिए पर भरोसा जताते हैं.
नाइक कहते हैं, “जिन निवेशकों ने धैर्य रखा, उनके लिए हमारा लंबे समय का रिटर्न अच्छा रहा है. रिसर्च के बड़े दायरे और लचीले स्ट्रक्चर के साथ, हम बाज़ार के अलग-अलग दौर में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं.”
₹35,358 करोड़ के एसेट अंडर मैनेजमेंट के साथ, एक्सिस ELSS टैक्स-सेविंग कैटेगरी का सबसे बड़ा फ़ंड है. इसका बदलाव न सिर्फ़ ख़ास है, बल्कि ये बड़ी संख्या में निवेशकों के लिए ज़रूरी है.
आख़िरी बात
एक्सिस ELSS फ़ंड के बीते मुश्किल दौर पर ग़ौर करें तो हालिया रिकवरी बड़ा बदलाव दिखाती है. ऐसा तेज़ सुधार, डायवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो और बेहतर स्टॉक चुनने की वजह से हुआ है. फ़ंड का प्रदर्शन बाज़ार की तेज़ी पर निर्भर नहीं है, बल्कि सोचे-समझे स्ट्रैटेजिक बदलावों, ख़ासकर कई सेक्टरों में निवेश और रिस्क कम करने की वजह से बेहतर हुआ है.
भले ही, शॉर्ट-टर्म के प्रदर्शन में सुधार हुआ है, लेकिन लंबे समय के आंकड़ों में पूरी तरह सुधार के लिए समय चाहिए. जो लोग ELSS विकल्प खोज रहे हैं, वो फ़ंड की एक्टिव स्ट्रैटेजी पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन प्रदर्शन पर नियमित नज़र रखते हुए संतुलित नज़रिया रखना ज़रूरी है.
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