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हर कोई गोल्ड की बात कर रहा है, लेकिन सिल्वर चुपचाप बन रही विनर

आइए समझते हैं कि क्या चांदी में निवेश करने का यह सही समय है?

आइए समझते हैं कि क्या चांदी में निवेश करने का यह सही समय है?Aditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः हाल के महीनों में, इंडस्ट्रियल डिमांड और कुछ समय की तेज़ी के चलते चांदी ने गोल्ड और इक्विटी दोनों को चुपचाप पीछे छोड़ दिया है. तो क्या ये आपके पोर्टफ़ोलियो के लिए एक मज़बूत निवेश साब़ित होता है? आइए जानते हैं...

जिस मेटल को अक्सर गोल्ड की मूडी छोटी बहन की तरह देखा जाता है, वो इन दिनों ख़ासा चर्चा में है.

भले ही, जियोपॉलिटिकल टेंशन, सेंट्रल बैंकों की ख़रीदारी और इसके पुराने भरोसेमंद "सेफ़ हेवन" टैग की वजह से  गोल्ड सुर्ख़ियों में रहा है, लेकिन चांदी ने चुपचाप अपने चमकदार कजिन को पीछे छोड़ दिया है.

बीते तीन साल में सिल्वर ने 26.5% का रिटर्न दिया है, जो सोने के 24% से कहीं ज़्यादा है. इसी के साथ, चांदी की हालिया तेज़ी और भी ज़्यादा आकर्षक है, जिसने पिछले तीन महीनों में 19.5% की छलांग लगाई और सिर्फ़ एक महीने में क़रीब 8% की बढ़त हासिल की है. ये गोल्ड के एक महीने के रिटर्न से पांच गुना ज़्यादा है.

यहां तक कि इक्विटी फ़ंड्स भी हाल के वक़्त में सिल्वर के सामने फीके साब़ित हुए हैं.

मगर क्या ये सिर्फ़ एक मौसमी चमक़ है या एक और स्थायी चमक की शुरुआत?

चांदी की चांदनी कैसे बढ़ रही है?

गोल्ड के मुक़ाबले, जो ज़्यादातर सेंट्रल बैंक की तिजोरियों में या शादी-ब्याह के गहनों के तौर पर काम आता है, वहीं, चांदी असल में इंडस्ट्री में इस्तेमाल होती है. इसमें सोलर पैनल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियां आदि शामिल हैं. ग्रीन एनर्जी का चलन बढ़ने के साथ, सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड भी लगातार बढ़ रही है. इससे चांदी को डबल इंजन मिलता हैं. असल में, ये एक क़ीमती धातु है और एक कामकाजी मेटल भी है.

इसका मतलब है कि चांदी को न सिर्फ़ बाज़ार में उतार-चढ़ाव से फ़ायदा मिलता है, बल्कि इकोनॉमिक ग्रोथ से भी सपोर्ट मिलता. ऐसी एसेट बहुत कम होती हैं जो दोनों रोल निभा सकें और इसी वजह से ये इस साइकिल में दिलचस्प बन जाती है.

मगर इस चमक में दाग भी हैं

बेशक़, हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती. वैसे ही, चांदी अभी भले ही दमक रही हो, मगर इसका लॉन्ग-टर्म चार्ट में सब्र के साथ एक चेतावनी भी नज़र आती है.

2008 की फ़ाइनेंशियल क्राइसिस के बाद, सिल्वर ने तेज़ी दिखाई. चांदी के दाम 2009 के ₹26,000 से बढ़कर 2011 में ₹61,000 तक पहुंच गए. लेकिन फिर सुस्ती का लंबा दौर आ गया. नौ साल तक दाम या तो गिरे या फिर वहीं के वहीं टिके रहे. कोई भी निवेशक चाहे वो कितना भी सब्र वाला हो - नौ साल तक रिकवरी का इंतज़ार नहीं करना चाहता.

चांदी सोने की तुलना में काफ़ी ज़्यादा अस्थिर होती है और ये उतार-चढ़ाव अनुभवी निवेशकों को भी परेशान कर सकता है. 2020 से अब तक के कैलेंडर ईयर के रिटर्न पर नज़र डालें: silverprice.org के अनुसार, चांदी ने 2020 में शानदार 51.5% की बढ़त देखी तो 2021 में इसमें 9.8% की गिरावट रही. वहीं गोल्ड कहीं ज़्यादा स्थिर रहा: 2020 में 30.4% का रिटर्न मिला और 2021 में मामूली 1.6% का नुक़सान देखा गया.

सिल्वर ETF और FoF का क्या?

भारत में सिल्वर एक इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के तौर पर अब भी नई है. पहला सिल्वर ETF महज़ साढ़े तीन साल पहले ही आया था. ये कोई मामूली बात नहीं है, लेकिन ये अभी इतना पुराना भी नहीं है कि इसे पूरी तरह परखा गया कहा जाए. ज़्यादातर फ़ाइनेंशियल प्लानर मानते हैं कि किसी प्रोडक्ट को कम से कम एक पूरा मार्केट साइकिल (5–7 साल) पार करना चाहिए.

सिल्वर फ़ंड्स के साथ भी कुछ दिक्क़तें हैं. जैसे कि ये हमेशा सिल्वर की असल क़ीमत से मेल नहीं खाते (इसे ट्रैकिंग एरर कहा जाता है). दूसरा, जब मार्केट डाउन हो, तब इन फ़ंड्स को जल्दी बेचना मुश्क़िल हो सकता है.

हक़ीक़त ये है कि अब तक भारत में सिर्फ़ तीन सिल्वर ETF ऐसे हैं जिनका साइज़ ₹1,000 करोड़ के पार गया है - ये बताता है कि ये मार्केट अब भी काफ़ी छोटा है.

क्या आपको निवेश करना चाहिए?

अगर आप थोड़ा FOMO महसूस कर रहे हैं, तो ये बिल्कुल जायज़ है. सिल्वर ने हाल ही में बहुत शानदार रिटर्न दिए हैं. मगर सिर्फ़ चमक देखकर फ़ैसला मत कीजिए.

सबसे बेहतर ये रहेगा कि आप इक्विटी, डेट और थोड़ा सा गोल्ड मिलाकर डाइवर्सिफ़ाई करें.

आज के दौर में पैसा कहां लगाना सही रहेगा?

रिटर्न का पीछा करना आसान है, मगर वैल्थ बनाने के लिए संतुलित योजना की ज़रूरी होती है. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र में हम आपकी मदद करते हैं - एक पर्सनलाइज़्ड एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी के ज़रिए, जो आपके गोल को अहमियत देती है - न कि बाज़ार के शोर-शराबे को.

साथ ही, पाएं हमारे सुझाए गए इक्विटी और डेट फ़ंड्स की लिस्ट.

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ये लेख पहली बार जुलाई 25, 2025 को पब्लिश हुआ.

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