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सारांशः Sovereign Gold Bonds की एक ख़ासियत थी जो उन्हें बाक़ी सबसे अलग बनाती थी - मैच्योरिटी तक होल्ड करो और कैपिटल गेन्स पूरी तरह टैक्स-फ़्री. बजट 2026 ने इसी नियम को बदल दिया है. और, यह बदलाव आप पर असर डालेगा या नहीं, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि आपने अपना SGB कहां से ख़रीदा था.
कई सालों से Sovereign Gold Bonds का टैक्स का पहलू लगभग बेदाग़ था - मैच्योरिटी तक होल्ड करो और कैपिटल गेन्स पूरी तरह टैक्स-फ़्री, चाहे बॉन्ड आपने कहीं से भी ख़रीदा हो. इसी एक बात ने SGB को भारत में सोना रखने का सबसे टैक्स-एफ़िशिएंट तरीक़ा बना दिया था. बजट 2026 ने इसी बात को बदल दिया है. एग्ज़ेम्पशन अभी भी है - बस अब हर उस शख़्स को नहीं मिलता, जो सोचता था कि उसे मिलेगा.
एक लाइन में समझें तो - 1 अप्रैल 2026 से, SGB मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन्स एग्ज़ेम्पशन सिर्फ़ उन निवेशकों को मिलेगा जिन्होंने RBI के ओरिजिनल इश्यू में सब्सक्राइब किया था और मैच्योरिटी तक लगातार उसे होल्ड किया. अगर आपने SGB सेकेंडरी मार्केट - NSE या BSE - से ख़रीदा था तो मैच्योरिटी पर भी टैक्स-फ़्री बेनेफ़िट नहीं मिलेगा, चाहे आप आख़िर तक होल्ड करें. यह बदलाव इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 70(1)(x) में किया गया है और RBI के हर SGB ट्रेंच पर लागू होता है.
यह बदलाव क्यों?
असल में, पुराना नियम एक साफ़ आर्बिट्राज़ का मौक़ा देता था. पुरानी SGB सीरीज़ अक्सर एक्सचेंज पर सोने की असली क़ीमत से कम पर मिलती थीं. कोई भी उन्हें सस्ते में ख़रीदकर मैच्योरिटी तक होल्ड कर सकता था और पूरा फ़ायदा टैक्स-फ़्री उठा सकता था. यह छूट असल में उन लोगों के लिए थी जिन्होंने सरकार के गोल्ड प्रोग्राम में शुरुआत से पैसा लगाया था. बजट 2026 ने यह रास्ता बंद कर दिया. अब एग्ज़ेम्पशन वहीं जाएगी जहां सरकार की मंशा थी - उस निवेशक को, जिसने इश्यू के वक़्त सरकार के पास पैसा लगाया, न कि उसे जिसने बाद में सिर्फ़ टैक्स बचाने के लिए वह पेपर ख़रीदा.
तो आपके लिए बस एक सवाल मायने रखता है: आपने अपना SGB कहां से लिया था?
अगर आपने ओरिजिनल इश्यू में सब्सक्राइब किया था (यानी सीधे RBI से, अपने बैंक, ब्रोकर, या पोस्ट ऑफ़िस के ज़रिए, किसी इश्यू विंडो के दौरान) और तब से होल्ड किए हैं, तो आपके लिए कुछ नहीं बदला. मैच्योरिटी पर मिलने वाली रक़म पूरी तरह टैक्स-फ़्री रहेगी. ऐसे ज़्यादातर रिटेल निवेशक हैं जिन्होंने नियमित इश्यू विंडो में ख़रीदारी की.
अगर आपने सेकेंडरी मार्केट से ख़रीदा था (यानी एक्सचेंज से, किसी दूसरे सेलर से), तो 1 अप्रैल 2026 से मैच्योरिटी पर मिलने वाला गेन टैक्सेबल होगा. लॉन्ग-टर्म गेन्स (12 महीने से ज़्यादा होल्डिंग) पर 12.5 प्रतिशत; शॉर्ट-टर्म गेन्स पर आपके स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा.
हर साल मिलने वाला 2.5 प्रतिशत ब्याज पहले भी इनकम के तौर पर टैक्सेबल था - यह किसी के लिए नहीं बदला. मैच्योरिटी से पहले एक्सचेंज पर बेचने पर कैपिटल गेन्स टैक्स पहले भी लगता था - वह भी नहीं बदला. जो बदला है वह सीमित और साफ़ है: सेकेंडरी मार्केट से ख़रीदे गए SGB पर मैच्योरिटी का वह टैक्स-फ़्री फ़ायदा, जो पहले मिल रहा था.
क्या करें
अपनी SGB होल्डिंग स्टेटमेंट निकालें और हर ट्रेंच का सोर्स चेक करें. अगर सब कुछ ओरिजिनल इश्यू में ख़रीदा है, तो कुछ करने की ज़रूरत नहीं - होल्ड करते रहें. अगर कोई हिस्सा सेकेंडरी मार्केट से आया है, तो मैच्योरिटी की कैलकुलेशन में 12.5 प्रतिशत LTCG का हिसाब जोड़ें. और सोचें कि अब जब टैक्स का वह फ़ायदा नहीं रहा, तो क्या मैच्योरिटी तक होल्ड करना सही है या बेच देना बेहतर? सेकेंडरी मार्केट के बॉन्ड को बाद में ओरिजिनल सब्सक्रिप्शन में तब्दील करने का कोई रास्ता नहीं है, इसलिए फ़ैसला सिर्फ़ आगे के बारे में है: होल्ड करें और टैक्स दें, या बेचें और टैक्स दें - एग्ज़ेम्पशन अब दोनों सूरतों में नहीं है.
SGB अभी भी सोने में निवेश करने का सरकारी गारंटी वाला, सुविधाजनक तरीक़ा है. ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स के लिए यह पहले जितना ही टैक्स-एफ़िशिएंट है. बाक़ी सभी के लिए, बजट 2026 ने इसे एक टैक्स-फ़्री इंस्ट्रूमेंट से एक साधारण इंस्ट्रूमेंट बना दिया है - और यह जानना ज़रूरी है कि आपके हाथ में इन दोनों में से कौन सा बॉन्ड है.
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ये लेख पहली बार जून 08, 2026 को पब्लिश हुआ.
