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सबसे एग्रेसिव 5 मल्टी-कैप फ़ंड और उनका प्रदर्शन

आइए विस्तार से जानते हैं

आइए विस्तार से जानते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः हर निवेशक ऐसे फ़ंड को पसंद करता है जो साहसिक दांव लगाता हो. लेकिन क्या बड़ा जोखिम हमेशा बड़े रिटर्न की गारंटी देता है? हमने पिछले 12 महीनों के पांच सबसे आक्रामक मल्टी-कैप फ़ंड्स का डेटा खंगाला - और नतीजे आधे अनुमानित, आधे हैरान करने वाले निकले.

पहला मल्टी-कैप फ़ंड 2021 में लॉन्च हुआ था. और, 2025 तक आते-आते इस कैटेगरी तेज़ रफ्तार पकड़ ली. आज 32 एक्टिवली-मैनेज्ड मल्टी-कैप फ़ंड निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं.

हालांकि, इनमें से कई फ़ंड अभी तीन साल की अहम सीमा तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन जिन्होंने ये मील का पत्थर पार कर लिया है, वे पहले ही शानदार शुरुआत कर चुके हैं. औसतन, इन फ़ंड्स ने सालाना लगभग 19% रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड ने क़रीब 16% रिटर्न दिया.

जैसा कहा जाता है, अच्छी शुरुआत आधी जीत होती है - और निवेशक भी इस बात से सहमत नज़र आ रहे हैं. AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, मल्टी-कैप फ़ंड अब ₹2.2 लाख करोड़ से ज़्यादा की एसेट मैनेज कर रहे हैं, जिनमें सिर्फ़ अक्तूबर में ही ₹2,500 करोड़ का नया इनफ़्लो आया.

तो आखिर मल्टी-कैप फ़ंड्स सुर्खियों में क्यों हैं?

कागज़ों पर देखें तो फ़्लेक्सी-कैप और मल्टी-कैप फ़ंड एक जैसे लगते हैं. दोनों लार्ज, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों में निवेश करते हैं. लेकिन एक अहम फ़र्क़ है, जो इन्हें अलग बनाता है.

फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स पर कोई तय सीमा नहीं होती. वे किसी भी रेशियो में लार्ज, मिड या स्मॉल कैप में निवेश कर सकते हैं. लेकिन चूंकि उनके प्रदर्शन की तुलना एक व्यापक 500-स्टॉक इंडेक्स से की जाती है, इसलिए वे उसी के क़रीब रहते हैं. और, चूंकि उस इंडेक्स में लगभग 75% वेटेज लार्ज कैप का होता है, इसलिए फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड भी लार्ज कैप पर ज़्यादा केंद्रित रहते हैं. फिलहाल ये फ़ंड औसतन 61% पैसा लार्ज-कैप स्टॉक्स में लगाते हैं.

वहीं, मल्टी-कैप फ़ंड कुछ सख़्त नियमों के तहत चलते हैं - और यही बात इन्हें दिलचस्प बनाती है.

SEBI के निर्देशों के मुताबिक़, मल्टी-कैप फ़ंड्स को अपने कॉर्पस का कम से कम 25% लार्ज, मिड और स्मॉल कैप, तीनों में निवेश करना अनिवार्य है.

ये अनुशासन इन्हें केवल सुरक्षित बड़े शेयरों से आगे बढ़कर छोटे, जोखिम भरे लेकिन तेज़ी से बढ़ने वाले अवसरों की तरफ़ झुकने के लिए प्रेरित करता है. इस समय औसतन मल्टी-कैप फ़ंड 40% लार्ज कैप, 29% मिड कैप और 30% स्मॉल कैप में निवेशित हैं.

इनमें सबसे एग्रेसिव कौन है?

हमने एक कदम आगे बढ़कर उन पांच मल्टी-कैप फ़ंड्स को चिह्नित किया जो मिड और स्मॉल कैप्स की तरफ़ और भी ज़्यादा झुके हुए हैं (डेटा: 31 अक्टूबर 2025 तक). और यहां जो तस्वीर उभरी, वो दिलचस्प है.

फ़ंड (डायरेक्ट प्लान)
मिड-कैप होल्डिंग (%) स्मॉल-कैप होल्डिंग (%) मिड/स्मॉल-कैप में कुल एक्सपोज़र (%)
Samco Multi Cap Fund  22.7 55 77.7
Motilal Oswal Multi Cap Fund  41.8 31.6 73.4
DSP Multicap Fund 29.4 41.4 70.8
Invesco India Multicap Fund 39.5 27.5 67
Groww Multicap Fund 29.6 35.8 65.5

क्या छोटी कंपनियों में ज़्यादा निवेश सच में फ़ायदे का सौदा है?

ये जानने के लिए कि मिड और स्मॉल-कैप्स पर ज़्यादा दांव लगाने वाले फ़ंड्स ने वाक़ई बेहतर प्रदर्शन किया या नहीं, हमने पिछले 12 महीनों में इन कैटेगरीज़ में सबसे ज़्यादा एक्सपोज़र वाले पांच मल्टी-कैप फ़ंड के एक साल के प्रदर्शन की तुलना की.

नतीजे उम्मीद से कुछ अलग निकले.

मल्टी-कैप फ़ंड्स  (डायरेक्ट प्लान्स) 12-महीने की औसत मिड-कैप होल्डिंग (%) 12-महीने की एवरेज स्मॉल-कैप होल्डिंग (%) पिछले 12 महीनों की कुल मिड एंड स्मॉल-कैप होल्डिंग (%) रिटर्न (%)
Motilal Oswal 38.5 31.2 69.7 15.7
DSP 29.3 40.3 69.6 0.6
WhiteOak 28.5 33.5 62 11.5
Bank of India 30.2 31.7 61.9 5.6
Invesco India 33.4 28.1 61.5 -0.4
1 नवंबर, 2024 से 11 नवंबर, 2025 के बीच का प्रदर्शन (%). ग्रो और सैमको फ़ंड इस लिस्ट में नहीं हैं, क्योंकि उनके अभी 12 महीने पूरे होने बाक़ी हैं.

1 नवंबर, 2024 से 11 नवंबर, 2025 के बीच का प्रदर्शन (%). ग्रो और सैमको फ़ंड इस लिस्ट में नहीं हैं, क्योंकि उनके अभी 12 महीने पूरे होने बाक़ी हैं.

मिड और स्मॉल कैप्स में ज़्यादा हिस्सेदारी का मतलब हमेशा ऊंचा रिटर्न नहीं होता. बेशक, एक साल का समय किसी निर्णायक निष्कर्ष के लिए छोटा है, लेकिन फिर भी तुलना दिलचस्प है.

उदाहरण के लिए, मोतीलाल ओसवाल मल्टी कैप फ़ंड और व्हाइटओक मल्टी कैप फ़ंड दोनों ने अपने निफ़्टी 500 TRI बेंचमार्क को आराम से पछाड़ा - क्रमशः 15.7% और 11.5% रिटर्न के साथ, जबकि बेंचमार्क का रिटर्न सिर्फ़ 5.4% रहा.

वहीं, मिड और स्मॉल कैप में भारी एक्सपोज़र लेने वाला DSP मल्टी कैप फ़ंड कमज़ोर रहा, जिसका रिटर्न मात्र 0.6% रहा. दरअसल, बाकी दो फ़ंड्स (इन्वेस्को इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया मल्टी कैप फ़ंड) या तो बेंचमार्क से पीछे रहे या मामूली बढ़त ही बना सके.

निष्कर्ष

मल्टी-कैप फ़ंड्स की ख़ासियत ये है कि वे तीनों मार्केट कैप्स में संतुलित निवेश करते हुए जोखिम को संभालते हैं और ग्रोथ का अवसर भी पकड़ते हैं. लेकिन ये डेटा बताता है कि सबसे एग्रेसिव पोर्टफ़ोलियो भी हमेशा बेहतर प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते. मिड और स्मॉल कैप्स का ऊंचा रेशियो रिटर्न को बढ़ा सकता है, लेकिन वोलैटिलिटी भी उतनी ही बढ़ा देता है. आख़िर में बात वहीं आती है कि स्टॉक सलेक्शन ही असली कुंजी है, चाहे निवेश लार्ज, मिड या स्मॉल कैप में हो.

तो अगर आप सोच रहे हैं कि कौन-सा मल्टी-कैप फ़ंड आपके पैसे का हक़दार है, तो सिर्फ़ रिटर्न चार्ट्स देखकर फैसला न करें. हर निवेशक के लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता अलग होती है - और यही जगह है जहां वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपकी मदद करता है.

हमारे एनालिस्ट्स लगातार हर फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो, प्रदर्शन की स्थिरता, वोलैटिलिटी और फ़ंड मैनेजर की रणनीति पर नज़र रखते हैं. इसी गहन रिसर्च के आधार पर, हम आपके जोखिम प्रोफ़ाइल, निवेश अवधि और फ़ाइनेंशियल गोल्स के अनुरूप पर्सनलाइज्ड फ़ंड रिकमेंडेशन तैयार करते हैं.

सीधे शब्दों में कहें - यहां आपको सिर्फ़ ‘टॉप परफॉर्मर्स’ की लिस्ट नहीं, बल्कि आपके लिए सही फ़ंड्स की शॉर्टलिस्ट मिलती है.

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ये भी पढ़ेंः 3 टॉप मल्टी-कैप फ़ंड, जो जोखिम लेने से पीछे नहीं हटते

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