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ये लार्ज-कैप फ़ंड अब IT शेयरों पर क्यों लगा रहा बड़ा दांव?

IT स्टॉक्स में तेज़ गिरावट में फ्रैंकलिन इंडिया लार्ज कैप फ़ंड को बेहतर रिस्क-रिवार्ड का मौक़ा दिख रहा है

IT स्टॉक्स में तेज़ गिरावट में फ्रैंकलिन इंडिया लार्ज कैप फ़ंड को बेहतर रिस्क-रिवार्ड का मौक़ा दिख रहा हैAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर दबाव है और बाज़ार का सेंटीमेंट कमज़ोर बना हुआ है. ऐसे माहौल में एक लार्ज-कैप पोर्टफ़ोलियो के भीतर एक अलग रास्ता बनता दिख रहा है. यहां समझते हैं कि इस फ़ैसले के पीछे क्या वजह है.

पिछले एक साल में भारतीय शेयर बाज़ार के सबसे चुनौतीपूर्ण सेक्टरों में से एक सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT रहा है. ग्लोबल डिमांड में सुस्ती, अमेरिका में टेक ख़र्च का लंबे समय तक दबाव में रहना और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी AI के पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल को प्रभावित करने की आशंका ने सेंटीमेंट पर काफ़ी असर डाला है. नतीजतन, पिछले 12 महीनों में BSE IT इंडेक्स क़रीब 20 प्रतिशत गिर चुका है, जिससे ये इस अवधि में सबसे कमज़ोर परफ़ॉर्म करने वाले सेक्टोरल इंडेक्स में शामिल हो गया है.

ज़्यादातर लार्ज-कैप फ़ंड मैनेजरों के लिए ये सतर्क रहने का संकेत रहा है. लेकिन फ्रैंकलिन इंडिया लार्ज कैप फ़ंड के लिए ये दूसरी दिशा में झुकने का मौक़ा बना.

वैल्यूएशन रीसेट के साथ एक उलटा दांव (contrarian bet)

पिछले छह महीनों में फ्रैंकलिन इंडिया लार्ज कैप फ़ंड ने टेक्नोलॉजी में अपना एलोकेशन धीरे-धीरे बढ़ाया है. जून 2025 में जहां IT एक्सपोज़र 13.7 प्रतिशत था, वहीं नवंबर 2025 तक ये बढ़कर 15.5 प्रतिशत हो गया. अक्तूबर और नवंबर दोनों महीनों में ये एक्सपोज़र 15 प्रतिशत से ऊपर बना रहा.

इस अवधि में ये लार्ज-कैप कैटेगरी का सबसे ज़्यादा टेक्नोलॉजी एक्सपोज़र रखने वाला फ़ंड बन गया है. तुलना करें तो UTI लार्ज कैप फ़ंड में टेक्नोलॉजी का एक्सपोज़र क़रीब 11.5 प्रतिशत है, महिंद्रा मैन्युलाइफ़ लार्ज कैप में 10.8 प्रतिशत और इनवेस्को इंडिया लार्ज कैप में 10.2 प्रतिशत के आसपास है.

टेम्पलटन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स में SVP और पोर्टफ़ोलियो मैनेजर इंडिया इक्विटीज़ और इस स्कीम के को-फ़ंड मैनेजर वेंकटेश संजीवी के मुताबिक़, ये बढ़ोतरी पूरे सेक्टर पर एक साथ लगाया गया दांव नहीं है. टीम ने IT कंपनियों का गहराई से बॉटम-अप एनालेसिस किया है, जिसमें अलग-अलग बिज़नेस सेगमेंट को परखा गया है ताकि ये समझा जा सके कि कौन-से हिस्से AI से होने वाले बदलावों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हैं और कौन-से अपेक्षाकृत सुरक्षित बने हुए हैं.

उनका आकलन है कि AI से कुछ हद तक व्यवधान और प्राइसिंग पर दबाव ज़रूर आएगा, लेकिन अगले कुछ सालों में इसका रेवेन्यू पर असर सीमित रहने की संभावना है. अनुमान के मुताबिक़ ये क़रीब 2 से 3 प्रतिशत हो सकता है. अहम बात ये है कि उनके मुताबिक़ सेक्टर की हालिया कमज़ोर परफ़ॉर्मेंस के बाद ये जोखिम काफ़ी हद तक मौजूदा वैल्यूएशन में पहले ही शामिल हो चुका है.

लार्ज-कैप IT कंपनियां अब क़रीब 20 गुना अर्निंग्स पर ट्रेड कर रही हैं, जिसे संजीवी वाजिब वैल्यूएशन मानते हैं. इसे मज़बूत फ़्री कैश फ़्लो जेनरेशन और लगातार मिलने वाले डिविडेंड का सहारा भी है. हालिया तिमाही नतीजे भी कुल मिलाकर स्थिर रहे हैं, जो ये संकेत देते हैं कि फ़ंडामेंटल्स बाज़ार के सेंटीमेंट से बेहतर बने हुए हैं.

फ़ंड IT में ज़्यादा वेट देने को तैयार क्यों है

वैल्यूएशन के अलावा, फ़ंड को कुछ साइक्लिकल सपोर्ट भी दिखता है. अमेरिका में टेक ख़र्च पिछले लगभग तीन साल से दबाव में रहा है, जिससे ये संभावना बनती है कि जैसे-जैसे अनिश्चितताएं और ट्रेड से जुड़ी दिक़्क़तें कम होंगी, वहां धीरे-धीरे रिकवरी आ सकती है. इसके अलावा, हाल में रुपये की कमजोरी एक्सपोर्ट पर निर्भर IT कंपनियों के मार्जिन को कुछ सहारा दे सकती है.

टेक्नोलॉजी में ये ओवरवेट रुख़ फ्रैंकलिन की उलट निवेश (contrarian investment philosophy) की स्ट्रैटेजी के अनुरूप है. संजीवी ऑटो सेक्टर में फ़ंड के पहले के अनुभव की ओर इशारा करते हैं, जहां उस समय एक्सपोज़र बढ़ाया गया था जब विज़िबिलिटी कम थी लेकिन वैल्यूएशन आकर्षक थे, और बाद में सेक्टर के दोबारा रेट होने पर उसे घटाया गया.

यही अनुशासन टेक्नोलॉजी पर भी लागू होता है. अगर वैल्यूएशन काफ़ी हद तक सामान्य हो जाते हैं या कहीं और बेहतर मौक़े दिखते हैं, तो फ़ंड अपना एक्सपोज़र घटाने के लिए तैयार है. लेकिन फ़िलहाल, टेक्नोलॉजी अनिश्चितता, वाजिब वैल्यूएशन और संभावित अपसाइड का ऐसा मेल पेश कर रही है, जहां फ्रैंकलिन इंडिया लार्ज कैप एक अलग फ़ैसला लेने को तैयार है.

इससे सीख लेने के लिए IT पर कोई राय बनाना ज़रूरी नहीं है. असल बात ये समझना है कि कोई फ़ंड जिस तरह पोज़िशन ले रहा है, उसके पीछे वजह क्या है और क्या वह आपके अपने रिस्क आराम और टाइम होराइज़न से मेल खाती है. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपको फ़ंड पोर्टफ़ोलियो के भीतर झांककर देखने में मदद करता है, ताकि आप शॉर्ट-टर्म सेक्टर शोर पर प्रतिक्रिया देने के बजाय ये तय कर सकें कि कौन-से फ़ंड सच में आपके पोर्टफ़ोलियो में जगह के हक़दार हैं.

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