In Practice

एक अच्छे फ़ंड से लेकर मज़बूत पोर्टफ़ोलियो तक

15 फ़ंड की ज़रूरत नहीं होती. ज़्यादातर निवेशकों के लिए सही से चुने गए 4-6 फ़ंड काफ़ी होते हैं.

15 फ़ंड की ज़रूरत नहीं होती. ज़्यादातर निवेशकों के लिए सही से चुने गए 4-6 फ़ंड काफ़ी होते हैं.Adobe Stock

सारांशः कितने फ़ंड ज़्यादा हो जाते हैं? और कितने कम पड़ जाते हैं? यहां बताया गया है कि आप एक अच्छे फ़ंड से शुरुआत करके ऐसा पोर्टफ़ोलियो कैसे बना सकते हैं जो वक़्त के साथ नतीजे दे.

आजकल पोर्टफ़ोलियो की जो सबसे आम समस्या मुझे दिखती है, वो ‘कम विकल्प’ नहीं है. बल्कि वो फ़्रिज है जो बचे-खुचे खाने से ठसाठस भरा होता है.

किसी आम निवेशक का पोर्टफ़ोलियो खोलिए और ये साफ़ दिखेगा. 14 इक्विटी फ़ंड्स, तीन हाइब्रिड, दो ELSS, एक रैंडम इंटरनेशनल फ़ंड जो किसी YouTube वीडियो के बाद लिया गया था और एक NFO जिसका नाम किसी को याद नहीं. आधी SIP ₹1,000 की हैं. किसी को नहीं पता कि कौन-सा फ़ंड क्यों रखा गया है.

फिर वही सवाल आता है. “क्या मेरा पोर्टफ़ोलियो डाइवर्सिफ़ाइड है?

मेरा ईमानदार जवाब होता है. “हां, डाइवर्सिफ़ाइड है. लेकिन ज़्यादातर कन्फ़्यूज़न में.”

इस कॉलम में मैं बिल्कुल उल्टा रास्ता बताना चाहता हूं. एक अच्छे फ़ंड से शुरुआत करना और धीरे-धीरे, सोच-समझकर, ईंट-दर-ईंट पोर्टफ़ोलियो बनाना. बिल्कुल घर बनाने की तरह. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र (VRFA) में हम मॉडल पोर्टफ़ोलियो भी ऐसे ही बनाते हैं. हम ये नहीं पूछते कि “और कितने फ़ंड जोड़ सकते हैं?” हम पूछते हैं, “सबसे कम में काम कैसे चलेगा?”

स्टेप 1: एक सादा लेकिन मज़बूत मुख्य फ़ंड चुनिए

हर मज़बूत पोर्टफ़ोलियो की शुरुआत एक ऐसे कोर इक्विटी फ़ंड से होती है जो सालों तक चुपचाप भारी काम कर सके.

ज़्यादातर लोगों के लिए ये एक ब्रॉड और डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड होता है. एक अच्छा फ़्लेक्सी-कैप, एक लार्ज-कैप या फिर कोई सिंपल इंडेक्स फ़ंड जो पूरे बाज़ार को ट्रैक करता हो. ऐसा फ़ंड जिसे बार-बार देखने की ज़रूरत न पड़े, जो ट्रेंड के पीछे न भागे और कई कंपनियों की टोकरी रखे.

मान लीजिए किसी निवेशक ने सिर्फ़ एक फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में ₹10,000 महीने की SIP शुरू की. अगले पांच साल में सिर्फ़ यही एक फ़ंड ₹9 लाख से ज़्यादा का हो गया.

मतलब साफ़ है. अगर पहला फ़ंड सही चुन लिया, तो अच्छा पोर्टफ़ोलियो बनने का 60-70 प्रतिशत काम वहीं हो गया.

VRFA में भी जब कोई बिना निवेश के या बिखरे पोर्टफ़ोलियो के साथ आता है, तो हम सबसे पहले यही करते हैं. एक मज़बूत कोर फ़ंड पहचानते हैं जो उसके लक्ष्य और रिस्क से मेल खाता हो. इसके बाद ही किसी और चीज़ के बारे में सोचते हैं.

स्टेप 2: दूसरा कोर फ़ंड कब जोड़ें

निवेशकों को जल्दी बेचैनी होने लगती है. पहला फ़ंड ठीक चलता दिखा, तो दिमाग़ कहता है. “अब एक और ले लेते हैं.” ये ठीक है. लेकिन दूसरा फ़ंड भी एक मज़बूत पिलर होना चाहिए, नक़ल नहीं.

दूसरा मुख्य फ़ंड जोड़ने के सही कारण हो सकते हैं:

  • SIP की रक़म काफ़ी बढ़ गई हो
  • कुल इक्विटी पोर्टफ़ोलियो बड़ा हो रहा हो
  • मैनेजर या स्टाइल रिस्क थोड़ा फैलाना चाहते हों

लेकिन ये सही वजह नहीं है. “ये फ़ंड इस महीने ‘टॉप 10 फ़ंड्स’ की लिस्ट में है, तो ले लेते हैं.”

दूसरा कोर फ़ंड या तो थोड़ा अलग स्टाइल लाए, जैसे एक ज़्यादा लार्ज-कैप झुकाव वाला हो और दूसरा मिड-कैप एक्सपोज़र देता हो. या फिर स्ट्रक्चर अलग हो, जैसे फ़्लेक्सी-कैप के साथ लार्ज-एंड-मिड-कैप फ़ंड.

अगर दोनों फ़ंड एक जैसे फ़्लेक्सी-कैप हैं, एक ही तरह की AMC से हैं और टॉप 20 स्टॉक्स भी वही हैं, तो आपके पास दो फ़ंड नहीं हैं. आपके पास एक ही पोर्टफ़ोलियो है, बस स्टेटमेंट दो हैं.

VRFA में जब ऐसा ओवरलैप दिखता है, तो सिस्टम आपको दोनों फ़ंड्स की अंदरूनी होल्डिंग्स जोड़कर दिखा देता है. अक्सर निवेशक देखकर हैरान रह जाते हैं कि उनके ‘पांच अलग-अलग फ़ंड्स’ असल में वही 25-30 कंपनियां रखते हैं, बस अनुपात थोड़ा अलग है. ये डाइवर्सिफ़िकेशन नहीं है. ये काग़ज़ी बोझ है.

स्टेप 3: सैटेलाइट फ़ंड तभी जोड़ें जब कोर मज़बूत हो

कोर तैयार हो जाने के बाद, आम तौर पर दो अच्छे इक्विटी फ़ंड्स के बाद ही, सैटेलाइट फ़ंड के बारे में सोचिए.

सैटेलाइट फ़ंड साइड डिश जैसा होता है. खाने को बेहतर बनाता है, लेकिन उसी पर ज़िंदगी नहीं चलती. आम तौर पर ये होता है:

सैटेलाइट का मक़सद पोर्टफ़ोलियो को थोड़ा झुकाव देना है, उसे पलटना नहीं.

दो कोर इक्विटी फ़ंड्स मिलकर अगर कुल इक्विटी का 70-80 प्रतिशत बनाते हैं, तो एक मिड-कैप फ़ंड 20-30 प्रतिशत के साथ जोड़ा जा सकता है. लंबे समय में कोर स्थिरता देता है और मिड-कैप थोड़ा एक्स्ट्रा रिटर्न जोड़ता है.

याद रखिए. सैटेलाइट हमेशा कोर से छोटा होना चाहिए. अगर मिड-और स्मॉल-कैप मिलकर 60-70 प्रतिशत हो जाएं, तो आप रिटर्न नहीं बढ़ा रहे, आप नींद खोने की संभावना बढ़ा रहे हैं.

VRFA के मॉडल पोर्टफ़ोलियो में ये साफ़ दिखता है. ज़्यादातर निवेशकों के लिए कोर ही ज़्यादातर हिस्सा होता है. सैटेलाइट छोटे, सोच-समझकर चुने गए होते हैं और कई बार बिल्कुल नहीं होते.

स्टेप 4: डेट या हाइब्रिड लेयर, जहां असली रिस्क संभलता है

एक और ज़रूरी हिस्सा है जिसे ज़्यादातर निवेशक नज़रअंदाज़ कर देते हैं, क्योंकि वो रोमांचक नहीं लगताः डेट और हाइब्रिड फ़ंड्स.

अगर लक्ष्य 3-5 साल दूर है, या सफ़र बहुत झटकों वाला नहीं चाहिए, तो पोर्टफ़ोलियो का एक हिस्सा सुरक्षित एसेट्स में होना चाहिए.

ये हो सकता है:

इसे पोर्टफ़ोलियो का शॉक एब्ज़ॉर्बर समझिए. अच्छे समय में ये चमकता नहीं, लेकिन बाज़ार गुस्सा करे तो पूरे प्लान को टूटने से बचाता है.

मान लीजिए लक्ष्य चार साल दूर है. अगर 100 प्रतिशत इक्विटी की जगह इक्विटी सेविंग्स फ़ंड लिया जाए, जिसमें आम तौर पर 30 प्रतिशत इक्विटी होती है, तो मार्च 2020 में जब बाज़ार 23 प्रतिशत गिरा, ऐसा पोर्टफ़ोलियो शायद सिर्फ़ 10 प्रतिशत के आसपास गिरा होता.

यही फ़र्क़ है टिके रहने और घबरा कर बाहर निकलने में.

VRFA में हर सलाह सबसे पहले एसेट एलोकेशन से शुरू होती है. लक्ष्य के हिसाब से इक्विटी कितनी, डेट कितना और जैसे-जैसे लक्ष्य पास आए, वो कैसे बदले. इसके बाद ही फ़ंड चुने जाते हैं.

असली दुश्मन: डुप्लिकेशन और ओवरलैप

अब वापस आते हैं सबसे बड़ी बीमारी पर. एक ही चीज़ के पांच-पांच वर्ज़न रखना.

  • पांच ELSS सिर्फ़ टैक्स बचाने के नाम पर
  • चार फ़्लेक्सी-कैप क्योंकि किसी साल रैंकिंग में थे
  • तीन एग्रेसिव हाइब्रिड जिनका काम लगभग एक जैसा है

अंदर झांकिए तो वही बैंक, IT और कंज़्यूमर स्टॉक्स हर जगह मिलेंगे.

पांच रिटर्न सोर्स की जगह आपने बना लिया है:

  • ज़्यादा काग़ज़ी काम
  • SIP को लेकर ज़्यादा उलझन
  • और असली डाइवर्सिफ़िकेशन शून्य

VRFA में हम सबसे पहले पोर्टफ़ोलियो क्लीन-अप की सलाह देते हैं. मॉडल पोर्टफ़ोलियो खोलिए और अपना उससे मिलाइए:

  • कहां 3-4 फ़ंड एक का काम कर रहे हैं
  • कौन-से फ़ंड बेकार हो चुके हैं
  • इक्विटी-डेट मिक्स लक्ष्य से कितना मेल खाता है

अक्सर सबसे अच्छा नया निवेश होता है. एक पुराना फ़ंड हटाना.

तो 4-6 फ़ंड का समझदारी भरा पोर्टफ़ोलियो कैसा होता है?

सारी बात जोड़कर देखें, तो एक आम लॉन्ग-टर्म निवेशक का साफ़ पोर्टफ़ोलियो कुछ ऐसा हो सकता है:

  • एक या दो कोर इक्विटी फ़ंड
  • एक या दो सैटेलाइट फ़ंड या बिल्कुल नहीं
  • एक या दो डेट या हाइब्रिड फ़ंड

बस. चार से छह फ़ंड. आलस की वजह से नहीं, अनुशासन की वजह से.

15 फ़ंड्स से तुलना करें:

  • एक में हर फ़ंड का रोल साफ़ है
  • दूसरे में बस उम्मीद है कि कुछ तो काम कर जाएगा

VRFA में हर मॉडल पोर्टफ़ोलियो इसी सोच से बनता है. सवाल यही होता है. “अगर निवेशक अगले 10-15 साल कुछ न बदले, बस निवेश करता रहे, तो क्या ये मिक्स उसे मंज़िल तक पहुंचा देगा?”

अपने पोर्टफ़ोलियो में इसे कैसे अपनाएं

अगर आपका पोर्टफ़ोलियो हर लॉन्च हुए फ़ंड का म्यूज़ियम बन चुका है, तो घबराइए मत.

पहला, ये इमरजेंसी सर्जरी नहीं है. ये घर की सफ़ाई जैसा है.

दूसरा, सारे फ़ंड्स एक काग़ज़ पर लिखिए:

  • अपने दो सबसे मज़बूत कोर फ़ंड पहचानिए
  • देखें क्या और कोर फ़ंड वाक़ई ज़रूरी हैं
  • सैटेलाइट छोटे और सही रोल में हैं या नहीं
  • इक्विटी-डेट मिक्स लक्ष्य से मेल खाता है या नहीं

VRFA सब्सक्राइबर के लिए ये और आसान हो जाता है. मॉडल पोर्टफ़ोलियो से मिलान करके साफ़ दिख जाता है कि ज़्यादा फ़ंड नहीं, बेहतर फ़ंड चाहिए.

और अगर सब्सक्राइबर नहीं भी हैं, तो आइडिया अपनाइए. संख्या नहीं, रोल सोचिए. हर फ़ंड एक सवाल का जवाब दे सके:

“अगर तुम्हें हटा दूं, तो कौन-सा ज़रूरी काम रुक जाएगा?”

अगर जवाब है “कुछ ख़ास नहीं”, तो वो फ़ंड सिर्फ़ बोझ है.

मज़बूत पोर्टफ़ोलियो एक वीकेंड में नहीं बनता. वो एक अच्छे कोर फ़ंड से शुरू होकर, छोटी लेकिन व्यवस्थित टीम में बदलता है. चिल्लाने वाले 15 लोग नहीं चाहिए. 4-6 शांत, भरोसेमंद लोग चाहिए जो हर साल अपना काम करते रहें.

लंबे समय में यही तरीक़ा सबसे ज़्यादा शोर मचाने वाली ‘टॉप 10 फ़ंड्स’ लिस्ट से बेहतर साबित होता है.

ये भी पढ़ें: इक्विटी-डेट का मिक्स आपके म्यूचुअल फ़ंड्स से ज़्यादा मायने रखता है

ये लेख पहली बार दिसंबर 29, 2025 को पब्लिश हुआ.

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