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पूर्वानुमानों को नज़रअंदाज़ करें, प्रक्रिया को दुरुस्त रखें

चतुराई से की गईं भविष्यवाणियां नहीं, धीमा निवेश चुपचाप वेल्थ बनाएगा

चतुराई से की गईं भविष्यवाणियां नहीं, धीमा निवेश चुपचाप वेल्थ बनाएगाAditya Roy/AI-Generated Image

हर साल यही वह समय होता है, जब फ़ाइनेंशियल मीडिया अगले 12 महीनों के लिए अपने अनुमान सामने रख देता है. दिसंबर तक सेंसेक्स कहां होगा? कौन-से सेक्टर बेहतर प्रदर्शन करेंगे? ब्याज़ दरों का क्या होगा? यह सिलसिला पिछले तीन दशकों से देखते आ रहे हैं और इससे कभी कोई ख़ास फ़ायदा नहीं दिखा. फ़रवरी आते-आते ये अनुमान भुला दिए जाते हैं और अगर साल के अंत में कोई इन्हें हक़ीक़त से मिलाकर देखे, तो नतीजे सभी के लिए असहज करने वाले होंगे.

मुद्दा यह नहीं है कि अनुमान लगाने वाले अयोग्य हैं. उनमें से कई काफ़ी समझदार भी होते हैं. असल समस्या यह है कि जिन चीज़ों का अनुमान लगाना वाक़ई मायने रखता है, वे मूल रूप से अनिश्चित होती हैं. और जो चीज़ें अनुमान के दायरे में होती हैं, वे ज़्यादा काम की नहीं होतीं. 2020 में ज़िंदगी को बदल देने वाली महामारी को कोई नहीं देख पाया. बहुत कम लोगों ने रिकवरी की रफ़्तार का अंदाज़ा लगाया था. नीतियों में बदलाव, रेगुलेटरी फ़ैसले और बाज़ार के पसंदीदा नामों का उभरना और गिरना, सब अपने समय पर होता है, फ़ोरकास्ट इंडस्ट्री के शेड्यूल पर नहीं.

इस तर्क के अलग-अलग रूप पहले भी सामने रखे जा चुके हैं. 2017 में यह लिखा गया था कि निवेशकों को 2028 के लिए क्या करना चाहिए, और बात यही थी कि समझदारी भरी निवेश सलाह हर साल नहीं बदलती. अगर किसी फ़ाइनेंशियल स्ट्रैटेजी को बाज़ार के अनुमानों के हिसाब से हर साल फिर से सेट करना पड़े, तो दिक़्क़त फ़ोरकास्ट में नहीं, उस स्ट्रैटेजी में है.

इसलिए अनुमानों के बजाय, मौजूदा हालात पर कुछ ऑब्ज़र्वेशन ज़्यादा उपयोगी हैं. इसलिए नहीं कि ये कोई “कॉल” हैं, बल्कि इसलिए कि ये उन व्यवहारों की ओर इशारा करते हैं, जो बार-बार निवेशकों की मदद भी करते हैं और नुकसान भी पहुंचाते हैं.

डेरिवेटिव ट्रेडिंग को लेकर रिटेल निवेशकों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा. रेगुलेटर्स के जारी किए गए ठोस आंकड़े बताते हैं कि फ़्यूचर्स और ऑप्शंस में ज़्यादातर व्यक्तिगत ट्रेडर्स पैसा गंवाते हैं, फिर भी इसका आकर्षण बना रहता है. जुए की प्रवृत्ति काफ़ी ताक़तवर होती है और उससे कमाई करने वाली मशीनरी हर साल और जटिल होती जा रही है. इस मैदान में जीतने का सबसे सुरक्षित तरीक़ा इसमें उतरना ही नहीं है.

दूसरी ओर, म्यूचुअल फ़ंड धीरे-धीरे मुख्य धारा की बचत का ज़रिया बन चुके हैं. SIP अब मिडिल क्लास के फ़ाइनेंशियल व्यवहार का हिस्सा बन गई है, जो 20 साल पहले कल्पना जैसी लगती. अगली चुनौती लोगों को निवेश के लिए मनाने की नहीं है. चुनौती यह है कि उन्हें उस चीज़ को बेवजह जटिल बनाने से रोका जाए, जो असल में सरल रहनी चाहिए. ज़्यादातर निवेशकों के लिए, तीन या चार सही चुने गए फ़ंड काफ़ी होते हैं, चाहे प्रोडक्ट बेचने वाले कुछ भी कहें.

अफ़सोस की बात है कि इंश्योरेंस की ग़लत बिक्री अब भी बनी हुई है. परिवारों को जिस सुरक्षा की ज़रूरत होती है और जो उन्हें बेची जाती है, उसके बीच का फ़ासला अब भी बड़ा है. टर्म इंश्योरेंस, जिसकी ज़रूरत असल में ज़्यादातर घरों को होती है, आज भी महंगे ट्रेडिशनल प्लान्स और ULIPs के मुक़ाबले कम बेची जाती है, जो ज़्यादातर डिस्ट्रीब्यूटर्स को फ़ायदा पहुंचाते हैं. इंसेंटिव नहीं बदले हैं, इसलिए नतीजे भी नहीं बदलेंगे. कम सुरक्षा के लिए ज़्यादा पैसा देने वाले इस पुराने जाल में न फंसें.

तो इस साल क्या करना चाहिए? वही, जो पिछले साल और उससे पहले के सालों में करना चाहिए था.

अपनी फ़ाइनेंशियल ज़रूरतों को टाइमलाइन पर रखें. अगले दो या तीन साल में जिन पैसों की ज़रूरत है, उन्हें सुरक्षित, फ़िक्स्ड-इनकम निवेश में रखें. लंबे समय के पैसे को कुछ गिने-चुने डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स में लगाएं, बेहतर है कि सिस्टमैटिक प्लान के ज़रिये ऐसा करें. पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ कवर बनाए रखें. इमरजेंसी फ़ंड आसानी से उपलब्ध रहे. और इन्वेस्टमेंट के नाम पर की जा रही सट्टेबाज़ी से दूर रहें.

यह सलाह उबाऊ लगती है, ठीक इसलिए क्योंकि यह काम करती है. यह चुनावी नतीजों, भू-राजनीति या किसी स्ट्रैटेजिस्ट के टार्गेट पर निर्भर नहीं करती. जिसने 2015, 2020 और 2022 में इसे लगातार अपनाया, वह आज लगभग तय तौर पर उस व्यक्ति से बेहतर स्थिति में है, जिसने बाज़ार को टाइम करने या हर साल के फ़ैशनेबल सेक्टर के पीछे भागने की कोशिश की.

आने वाले महीनों में सरप्राइज़ मिलेंगे, कुछ अच्छे, कुछ कम अच्छे. बाज़ार ऐसे तरीक़ों से हिलेंगे, जो बाद में तो साफ़ दिखेंगे, लेकिन पहले से अनुमान लगाना नामुमकिन होगा. समझदार निवेशक की प्रतिक्रिया बेहतर अनुमान लगाना नहीं, बल्कि ऐसा पोर्टफ़ोलियो बनाना है, जो आने वाली हर स्थिति का सामना कर सके.

नया साल मुबारक हो. आपके निवेश बोरिंग बने रहें और रिटर्न पर्याप्त.

यह भी पढ़ेंः निवेश की ज़रूरतों का एक पिरामिड

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