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ULIP का भ्रम फिर लौटा

वो वायरल तुलना बड़ी चतुराई से उस सबसे अहम चीज़ को छुपाती है जो है- आपका पैसा और परिवार की सुरक्षा

वो वायरल तुलना बड़ी चतुराई से उस सबसे अहम चीज़ को छुपाती है जो है- आपका पैसा और परिवार की सुरक्षाAditya Roy/AI-Generated Image

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हर कुछ महीनों में एक आकर्षक तुलना करने वाला चार्ट व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर घूमता है, जो ये साबित करने का दावा करता है कि म्यूचुअल फ़ंड्स की तुलना में ULIP बेहतर हैं. इसका नया वर्ज़न हर सही बॉक्स पर टिक लगाता है: इंश्योरेंस कवर, टैक्स बेनिफ़िट्स, फ़्लेक्सिबिलिटी, डिसिप्लिन और डेथ बेनिफ़िट्स. ये देखने में भरोसेमंद लगता है क्योंकि लिखी गई हर बात तकनीकी रूप से सही होती है. लेकिन सच्चाई ये है कि ये आज के दौर में चल रही सबसे सफल वित्तीय ग़लतफ़हमियों में से एक है. धोखा उन बातों में नहीं है जो इसमें लिखी गई हैं, बल्कि उन बातों में है जिन्हें ये सावधानी से छुपाता है.

सीधे कहें तो: ये तुलना आपको पर्सनल फ़ाइनेंस के सबसे बुनियादी सवाल पर गुमराह करने के लिए बनाई गई है, जो है- परिवार की सुरक्षा और वेल्थ बढ़ाने के काम को सही तरीक़े से कैसे करें. ये ऐसा इसलिए करता है क्योंकि ये दो अलग-अलग ज़रूरतों-बीमा और निवेश-को एक साथ जोड़ देता है और ऐसा दिखाता है जैसे ये आपके हित में है, जबकि असल में इससे इंश्योरेंस कंपनियों का फ़ायदा होता है.

सबसे बुनियादी मुद्दे से शुरू करें: पर्याप्त लाइफ़ इंश्योरेंस होना. वर्षों से मैं लिखता आया हूं कि अगर आपकी आय पर परिवार निर्भर है तो आपके पास सालाना आय का कम-से-कम 10 गुना लाइफ़ कवर होना चाहिए. अब वो गणित देखें, जिसे ULIP प्रमोटर नहीं चाहते कि आप करें: ULIP में जीवन बीमा कवर आमतौर पर वार्षिक प्रीमियम का 10 गुना होता है.

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इससे एक असंभव स्थिति बनती है. मान लीजिए आपकी वार्षिक आय ₹10 लाख है, तो आपको ₹1 करोड़ का लाइफ़ कवर चाहिए. लेकिन ULIP से ₹1 करोड़ का कवर पाने के लिए आपको हर साल ₹10 लाख का प्रीमियम भरना पड़ेगा. यानी पूरी आय यहीं खत्म! यही ULIP का स्ट्रक्चर है-वे कभी भी वाजिब कॉस्ट पर पर्याप्त इंश्योरेंस नहीं दे सकते. और ये कोई खामी नहीं है, बल्कि सोची-समझी रणनीति है.

दूसरी तरफ़, एक साधारण टर्म इंश्योरेंस ₹1 करोड़ का कवर सिर्फ़ ₹30,000 सालाना (लगभग 30 साल की उम्र पर) में दे सकता है. और बाक़ी रकम म्यूचुअल फ़ंड्स में निवेश की जा सकती है, जिससे वेल्थ भी बनेगी और परिवार भी सुरक्षित रहेगा.

अब आते हैं टैक्स से जुड़े तर्क पर. तुलना में बताया जाता है कि ULIP की मैच्योरिटी "पूरी तरह टैक्स-फ़्री" है. मौजूदा नियमों के हिसाब से ये सच है. लेकिन ये फ़ायदा तब बेमानी हो जाता है जब असल रिटर्न ही कमज़ोर हो. और ULIP में रिटर्न कमज़ोर ही रहते हैं क्योंकि इनमें कई तरह के चार्ज छिपे होते हैं: प्रीमियम एलोकेशन चार्ज, पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज, फ़ंड मैनेजमेंट चार्ज, मॉर्टैलिटी चार्ज, सरेंडर चार्ज और न जाने कितने. ये चार्ज न तो पारदर्शी होते हैं और न ही म्यूचुअल फ़ंड्स के ख़र्चों से तुलना योग्य है.

म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री सख्त रेग्युलेशन के तहत चलती है, जहां ख़र्च पर एक सीमा लागू होती, पारदर्शिता ज़रूरी है और निवेशक हितों की रक्षा सुनिश्चित होती है. ULIP अलग रेग्युलेटरी यूनिवर्स में काम करते हैं-जहां नियम पारंपरिक बीमा प्रोडक्ट्स के लिए बने हैं, न कि निवेश प्रोडक्ट्स के लिए. यही अंतर इंश्योरेंस कंपनियों को ऐसे शुल्क लेने की छूट देता है, जिसकी म्यूचुअल फ़ंड्स में कल्पना भी नहीं की जा सकती.

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तुलना पांच साल के लॉक-इन को "अनुशासित बचत" बताती है. ये भाषा छलपूर्ण है. लॉक-इन अनुशासन नहीं है-ये कैद यानि बंधन जैसा है. अगर नौकरी चली जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या फ़ाइनेंशियल क्राइसिस आ जाए, तो पांच साल तक आपका पैसा फंसा रहेगा. असली अनुशासन आपके लक्ष्यों को समझने और उनसे जुड़े रहने में है, न कि कांट्रैक्चुअल पेनाल्टी में.

डेथ बेनिफ़िट की तुलना पूरी बहस की बुनियादी बेईमानी उजागर करती है. इसमें कहा जाता है कि ULIP नॉमिनी को "सम एश्योर्ड या फ़ंड वैल्यू, जो भी ज़्यादा हो" मिलेगा. ये सुनने में अच्छा लगता है. लेकिन ध्यान दें कि ULIP का सम एश्योर्ड शुरू से ही अपर्याप्त होता है. यानी अगर आपके पास पर्याप्त लाइफ़ कवर नहीं है तो मृत्यु की स्थिति में आपके परिवार को वैसे भी कम रक़म मिलेगी-चाहे वो ULIP से आए या किसी और विकल्प से.

सही तरीका हमेशा से यही रहा है और मैंने इसे वर्षों से समझाया है: बीमा और निवेश को पूरी तरह अलग रखें. पहले पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस ख़रीदें-मान लीजिए ₹1 करोड़ का कवर सिर्फ़ ₹30,000 में. अब आपका परिवार सच में सुरक्षित है. फिर बची रकम म्यूचुअल फ़ंड्स में लगाएं-जो पारदर्शी, लिक्विड और कम-ख़र्चीले विकल्प देते हैं और लंबे समय में इंश्योरेंस का लबादा ओढ़े निवेशों से कहीं बेहतर साबित हुए हैं. अगर दुर्भाग्य से कोई हादसा होता है, तो आपके परिवार को ₹1 करोड़ का टर्म इंश्योरेंस मिलेगा और साथ में म्यूचुअल फ़ंड का पूरा निवेश. ये कॉम्बिनेशन किसी भी ULIP से कहीं बेहतर सुरक्षा और रिटर्न देता है.

जो वायरल तुलना आप देखते हैं, वो कोई संयोग नहीं है. ये एक सोची-समझी कोशिश है जिससे ULIP को बेहतर दिखाया जा सके. ऐसा बस सही जानकारी चुनकर और बाक़ी छुपाकर किया जाता है. हर तथ्य सही हो सकता है, लेकिन नतीजा ग़लत है क्योंकि सबसे अहम बातें-पर्याप्त बीमा कवर, असली ख़र्च, निवेश प्रदर्शन और लचीलापन-पूरी तरह गायब कर दी जाती हैं.

जब भी आप ऐसी तुलना देखें, अपने आप से पूछें: बीमा और निवेश को क्यों साथ बांधा जा रहा है? मैं क्यों उतना ही बीमा अलग से नहीं ख़रीद सकता जितनी मुझे सच में ज़रूरत है और निवेश को अलग क्यों नहीं रख सकता? इनके जवाब साफ़ बता देंगे कि इस खेल में किसका हित साधा जा रहा है-और यकीन मानिए, वो आपका नहीं है.

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