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सारांशः SEBI ने म्यूचुअल फ़ंड में तीसरे पक्ष के भुगतान की इजाज़त देने का प्रस्ताव रखा है. इसमें नियोक्ता की तरफ़ से तनख़्वाह में से SIP काटना, डिस्ट्रीब्यूटरों को कमीशन की जगह म्यूचुअल फ़ंड यूनिट देना और म्यूचुअल फ़ंड के ज़रिए सामाजिक कामों के लिए डोनेशन देना शामिल है. 10 जून 2026 तक जनता की राय मांगी गई है.
अगर हर महीने तनख़्वाह आने पर PF अपने आप कट जाता है तो SIP क्यों नहीं? आप याद रखें या भूल जाएं, पैसा जमा होता रहे. SEBI अब यही करने की सोच रहा है. म्यूचुअल फ़ंड में भी वही अनुशासन जो PF में है. बस एक फ़र्क़ है, इसमें आपकी मर्ज़ी भी रहेगी.
बुधवार को जारी एक कंसल्टेशन पेपर में SEBI ने कुछ ख़ास मामलों में तीसरे पक्ष के भुगतान की इजाज़त देने का प्रस्ताव रखा है. सीधे शब्दों में कहें तो आने वाले वक़्त में आपका नियोक्ता आपकी तरफ़ से म्यूचुअल फ़ंड में पैसा लगा सकता है, बिल्कुल उसी तरह जैसे अभी PF और NPS में लगाता है.
यह प्रस्ताव मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के क़ानून यानी PMLA के तहत निवेशक सुरक्षा के नियमों को कमज़ोर किए बिना म्यूचुअल फ़ंड में निवेश को आसान बनाने की SEBI की बड़ी कोशिश का हिस्सा है. यह बदलाव SEBI के उस नियम में होगा जो म्यूचुअल फ़ंड में पैसा लगाने के तरीक़े तय करता है. यह प्रस्ताव म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री और AMFI की तरफ़ से आई मांगों के बाद आया है.
पहला प्रस्ताव: तनख़्वाह से SIP
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि नियोक्ता अपने कर्मचारियों की तरफ़ से तनख़्वाह काटकर म्यूचुअल फ़ंड में निवेश कर सकेंगे. यह सुविधा सिर्फ़ लिस्टेड कंपनियों, EPFO से रजिस्टर्ड कंपनियों और AMC को मिलेगी.
ज़रूरी बात यह है कि इसमें कर्मचारी की सहमति अनिवार्य होगी. जो कर्मचारी चाहें वो इसमें शामिल हो सकते हैं. निवेश उनके अपने नाम पर होगा, सिर्फ़ पैसा नियोक्ता की तरफ़ से आएगा. यानी PF और NPS की तरह ही काम करेगा, बस म्यूचुअल फ़ंड में. SEBI ने यह भी पूछा है कि क्या नियोक्ताओं को अपनी ही AMC की स्कीम में निवेश करवाने से रोका जाए ताकि हितों का टकराव न हो.
दूसरा प्रस्ताव: डिस्ट्रीब्यूटरों को कमीशन की जगह यूनिट
SEBI ने AMC को यह सुविधा देने का भी प्रस्ताव रखा है कि वो रजिस्टर्ड म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रीब्यूटरों यानी MFD को ट्रेल कमीशन पूरा या आंशिक, नक़द की जगह म्यूचुअल फ़ंड यूनिट में दे सकें. यूनिट सीधे डिस्ट्रीब्यूटर के नाम पर आएंगी.
SEBI का मानना है कि इससे डिस्ट्रीब्यूटर ख़ुद लंबे समय तक निवेशित रहेंगे और उनके फ़ायदे बाज़ार के प्रदर्शन से जुड़ेंगे. हालांकि SEBI ने यह भी माना है कि अगर डिस्ट्रीब्यूटर उन स्कीम को ज़्यादा बेचने लगें जिनसे उन्हें ज़्यादा यूनिट मिलती हैं तो ग़लत बिक्री का ख़तरा हो सकता है. इस पर भी राय मांगी गई है.
तीसरा प्रस्ताव: म्यूचुअल फ़ंड के ज़रिए डोनेशन
SEBI का एक और दिलचस्प प्रस्ताव है. निवेशक अपने म्यूचुअल फ़ंड सब्सक्रिप्शन, डिविडेंड या रिडेम्शन का एक हिस्सा सामाजिक कामों के लिए डोनेशन कर सकेंगे. इसके लिए दो रास्ते सुझाए गए हैं:
पहला, सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर रजिस्टर्ड NGO के ज़ीरो कूपन ज़ीरो प्रिंसिपल यानी ZCZP इंस्ट्रूमेंट ख़रीदना. दूसरा, सीधे चुनिंदा NGO को डोनेशन देना. इसके लिए या तो एक अलग 'सोशल कॉन्ट्रिब्यूशन' म्यूचुअल फ़ंड स्कीम हो सकती है या सभी मौजूदा स्कीम में यह सुविधा जोड़ी जा सकती है.
SEBI का कहना है कि इससे निवेशकों को किसी भरोसेमंद NGO की तलाश का झंझट नहीं रहेगा और डोनेशन एक नियमित और पारदर्शी स्ट्रक्चर में होगा.
मनी लॉन्ड्रिंग पर नज़र बनी रहेगी
इन सब बदलावों के बावजूद SEBI ने साफ़ किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के नियम पूरी तरह लागू रहेंगे. हर भुगतान का इलेक्ट्रॉनिक ट्रेल रखा जाएगा. KYC वेरिफ़िकेशन पक्की होगी. रिडेम्शन और डिविडेंड का पैसा सिर्फ़ असली लाभार्थी के वेरिफ़ाइड बैंक अकाउंट में जाएगा.
SEBI ने प्रस्ताव किया है कि AMFI इन सब के लिए SEBI के साथ मिलकर विस्तृत नियम बनाए.
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है
अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो नौकरीपेशा लोगों के लिए म्यूचुअल फ़ंड में निवेश उतना ही आसान हो जाएगा जितना PF. तनख़्वाह आई नहीं कि SIP कट गई. भूलने का झंझट नहीं, बजट बिगड़ने का डर नहीं.
यह वही अनुशासन है जो PF और NPS ने करोड़ों भारतीयों में बनाया है. अगर म्यूचुअल फ़ंड में भी यही अनुशासन आ गया तो लॉन्ग-टर्म वेल्थ बनाने का सबसे बड़ा रोड़ा यानी "इस महीने नहीं, अगले महीने से निवेश शुरू करूंगा" वाली आदत बदल सकती है.
SEBI ने इन प्रस्तावों पर 10 जून 2026 तक जनता की राय मांगी है. अंतिम सर्कुलर जारी होने के 30 दिन के अंदर नए नियम लागू हो जाएंगे.
वैल्यू रिसर्च की राय
PF की तरह तनख़्वाह से SIP कटना निवेश में अनुशासन का सबसे कारगर तरीक़ा है. लेकिन यह सुविधा मिलने से पहले भी आप यही अनुशासन ख़ुद बना सकते हैं. SIP की तारीख़ तनख़्वाह आने के एक-दो दिन बाद रखें और ऑटोमेट करें. और किस फ़ंड में लगाएं यह जानने के लिए वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपके गोल के हिसाब से सही फ़ंड बताता है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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