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सारांशः मोमेंटम इन्वेस्टिंग का मतलब है उन शेयरों में पैसा लगाना जो हाल में सबसे अच्छा कर रहे हों. निफ़्टी 500 मोमेंटम 50 TRI ने 21 साल में सालाना 21.1% दिया. भारत में यह तरीक़ा 2020 में शून्य से शुरू हुआ और 2026 में ₹28,648 करोड़ पर पहुंच गया.
ज़ोमैटो पर किसी रेस्टोरेंट की रेटिंग 4.8 हो और सैकड़ों रिव्यू हों तो हम बिना ज़्यादा सोचे वहीं से ऑर्डर करते हैं जो टॉप ट्रेंडिंग में होता है. शेयर बाज़ार में भी लोग वही ख़रीदते हैं जो पहले से चढ़ रहा हो. यही मोमेंटम है.
और यह सिर्फ़ भावना नहीं है. इसके पीछे दशकों की रिसर्च है.
मोमेंटम काम कैसे करता है?
सुनने में आसान लगता है. लेकिन इसके पीछे एक ठोस तर्क है.
पिछले 6 से 12 महीनों में जो शेयर सबसे ज़्यादा बढ़े हों, उनमें पैसा लगाया जाता है. और जो सबसे ज़्यादा गिरे हों, उनसे दूर रहा जाता है.
यह कंपनी का कारोबार नहीं देखता. सिर्फ़ शेयर की चाल देखता है. कंपनी अच्छी है या बुरी, यह सवाल यहां नहीं पूछा जाता. सवाल बस यह है: क्या इसका शेयर चढ़ रहा है?
यह इसलिए काम करता है क्योंकि बाज़ार किसी भी नई ख़बर को एक दिन में नहीं पचाता. किसी कंपनी के अच्छे नतीजे आए तो शेयर धीरे-धीरे बढ़ता है. पहले बड़े निवेशक ख़रीदते हैं, फिर जानकार लोग, फिर आम निवेशक. यह सिलसिला हफ़्तों और महीनों तक चलता है. मोमेंटम इसी देरी का फ़ायदा उठाता है.
आंकड़े क्या कहते हैं?
बात सिर्फ़ सोच की नहीं है. आंकड़े भी मोमेंटम के पक्ष में हैं. लेकिन साथ में एक बड़ी चेतावनी भी है.
निफ़्टी 500 मोमेंटम 50 TRI ने जनवरी 2005 से मार्च 2026 तक सालाना 21.1% रिटर्न दिया. निफ़्टी 500 TRI ने इसी दौरान 13.6% रिटर्न दिया. हर साल 7.5% का फ़र्क़, लंबे समय में यह बहुत बड़ा अंतर बन जाता है.
अलग-अलग तरीक़ों की तुलना
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इंडेक्स
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सालाना रिटर्न (% में) | सबसे बड़ी गिरावट (% में) | 10 साल का औसत रिटर्न (सलाना %) |
|---|---|---|---|
| निफ़्टी 500 मोमेंटम 50 TRI | 21.1 | -70.2 | 20.2 |
| निफ़्टी 500 मल्टीकैप मोमेंटम क्वालिटी 50 TRI | 19.4 | -53.9 | 18.5 |
| निफ़्टी 500 क्वालिटी 50 TRI | 16.3 | -53.6 | 16.2 |
| निफ़्टी 500 लो वोलैटिलिटी 50 TRI | 17.2 | -48.3 | 15.4 |
| निफ़्टी 500 TRI | 13.6 | -63.7 | 13.6 |
| सोर्स: NSE Indices, Value Research. जनवरी 2005 से मार्च 2026. पिछला प्रदर्शन भविष्य का संकेत नहीं है. | |||
अब वो चेतावनी. मोमेंटम में सबसे बड़ी गिरावट 70.2% रही है. यानी अगर बाज़ार गिरा तो मोमेंटम फ़ंड और ज़्यादा गिरेगा. वजह यह है कि जो शेयर सबसे तेज़ चढ़े होते हैं, वही बाज़ार पलटने पर सबसे तेज़ गिरते भी हैं.
जो इतनी गिरावट नहीं झेल सकते, उनके लिए निफ़्टी 500 मल्टीकैप मोमेंटम क्वालिटी 50 TRI बेहतर है. इसमें सिर्फ़ तेज़ शेयर नहीं, अच्छी कंपनियां भी देखी जाती हैं. इससे गिरावट थोड़ी कम होती है. यह 19.4% रिटर्न देता है और सबसे बड़ी गिरावट -53.9% है.
भारत में मोमेंटम कहां से कहां तक पहुंचा
कुछ साल पहले तक यह तरीक़ा सिर्फ़ बड़े निवेशकों के लिए था. आम निवेशक की पहुंच नहीं थी. अब यह बदल गया है.
2020 में भारत में मोमेंटम फ़ंड नाम की चीज़ नहीं थी. 2026 में 53 स्कीम और ₹28,648 करोड़. छह साल में यह बढ़त दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा इस तरीक़े पर बढ़ा है.
भारत में मोमेंटम फ़ंड की ग्रोथ
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साल
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AUM (₹ करोड़) | स्कीम |
|---|---|---|
| मार्च 2020 | 0 | 0 |
| मार्च 2022 | 1,778 | 5 |
| मार्च 2024 | 10,233 | 20 |
| मार्च 2026 | 28,648 | 53 |
| सोर्स: ICRA, NJ AMC. | ||
यह बढ़त सिर्फ़ अच्छे रिटर्न की वजह से नहीं है. SEBI ने नए नियम बनाए जिससे इन फ़ंड्स को शुरू करना मुमकिन हुआ. इससे आम निवेशक को भी वो तरीक़ा मिला जो पहले सिर्फ़ बड़े फ़ंड हाउस इस्तेमाल करते थे.
किसके लिए सही है?
रिटर्न देखकर उत्साहित होना स्वाभाविक है. लेकिन मोमेंटम हर किसी के लिए नहीं है.
यह उनके लिए है जो कम से कम 5 से 7 साल के लिए पैसा लगा सकते हैं. जो बीच में पोर्टफ़ोलियो 30 से 40% गिरने पर भी नहीं घबराएंगे. असल में, मोमेंटम का असली फ़ायदा तभी मिलता है जब निवेशक बाज़ार के उतार-चढ़ाव में टिका रहता है. जो जल्दी पैसा निकाल सकते हैं या बाज़ार गिरने पर बेच देते हैं, उनके लिए यह सही नहीं है.
हालांकि, यह याद रखना चाहिए कि पिछला डेटा भविष्य का संकेत नहीं होता है.
वैल्यू रिसर्च की राय
मोमेंटम दमदार है लेकिन जोख़िम भी उतना बड़ा है. सही फ़ंड चुनने के लिए वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपके गोल और जोख़िम के हिसाब से मदद करता है.
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यह भी पढ़ें: Nifty 50, Nifty 100 या Nifty 500: आपके लिए कौन सा सही है?
ये लेख पहली बार मई 27, 2026 को पब्लिश हुआ.




