Fund Advisor's Note

निवेश के लिए 12 विकल्प खुले हैं, मगर 4 ही होल्ड करने लायक़ हैं

SEBI की विदेशी सीमा ने ज़्यादातर इंटरनेशनल फ़ंड बंद कर दिए हैं, जो 12 अभी भी पैसे ले रहे हैं, उनमें से सिर्फ़ चार असली कसौटी पर खरे उतरते हैं

SEBI की विदेशी सीमा ने ज़्यादातर इंटरनेशनल फ़ंड बंद कर दिए हैं, जो 12 अभी भी पैसे ले रहे हैं, उनमें से सिर्फ़ चार असली कसौटी पर खरे उतरते हैंVinayak Pathak/AI-Generated Image

SEBI की विदेशी सीमा ने ज़्यादातर इंटरनेशनल फ़ंड बंद कर दिए हैं, जो 12 अभी भी पैसे ले रहे हैं, उनमें से सिर्फ़ चार असली कसौटी पर खरे उतरते हैं पिछले शनिवार के Fund Advisor Live में एक बात सबसे ऊपर थी: जो इंटरनेशनल फ़ंड आप पहले ख़रीद सकते थे, वे अब बंद हो चुके हैं. जो नए फ़ंड हम सुझाते हैं, वे सिर्फ़ SIP के लिए हैं और उनमें हर महीने छोटी-सी रक़म ही डाली जा सकती है. बहुत से निवेशकों को लग रहा है कि वे फंसे हुए हैं. आप जियोग्राफ़िक डाइवर्सिफ़िकेशन चाहते हैं, लेकिन अभी उस पर आसानी से कुछ कर नहीं सकते. तो पहले यह साफ़ कर दें कि क्या नहीं हो रहा. Value Research ने इंटरनेशनल डाइवर्सिफ़िकेशन में अपना भरोसा नहीं खोया है. दुनिया के लिस्टेड कारोबारों में भारत की इक्विटी का हिस्सा महज़ 4.5 प्रतिशत है. जो पोर्टफ़ोलियो बाक़ी 95.5 प्रतिशत को नज़रअंदाज़ करता है, वह चाहे या न चाहे, एक देश पर दांव लगा रहा है. यह तर्क अभी भी उतना ही दुरुस्त है. जो बदला है, वह है सप्लाई. SEBI ने सभी भारतीय म्यूचुअल फ़ंड को मिलाकर लगभग 7 अरब डॉलर के विदेशी शेयर रखने की इजाज़त दे रखी है. इंडस्ट्री ₹80 लाख करोड़ से ज़्यादा मैनेज करती है. पूरा विदेशी कोटा इंडस्ट्री के कुल AUM के 1 प्रतिशत से भी कम है और वह जल्दी भर जाता है. दूसरी सीमा हर फ़ंड हाउस की अपनी है. हर AMC का अलग 1 अरब डॉलर का कोटा होता है. यही वह बात है जो ज़्यादातर निवेशक चूक जाते हैं. किसी एक फ़ंड हाउस के दरवाज़े तब भ

ये लेख पहली बार जून 08, 2026 को पब्लिश हुआ.

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