फंड वायर

आपको लगता है आपके पास 3 फ़ंड हैं, हो सकता है आपके पास एक ही हो

एक ही फ़ंड हाउस के कई फ़ंड एक ही दांव की तरह चल सकते हैं, क्योंकि उन सबको चलाने वाली सोच एक ही होती है.

एक ही फ़ंड हाउस के कई फ़ंड एक ही दांव की तरह चल सकते हैं, क्योंकि उन सबको चलाने वाली सोच एक ही होती है.Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः ज़्यादातर निवेशक जानबूझकर अपना ज़्यादातर पैसा एक ही फ़ंड हाउस में नहीं लगाते. यह बस हो जाता है. और जब ऐसा होता है, तो आपके पास मौजूद कई फ़ंड असल में एक ही निवेश सोच निकल सकते हैं, जो बस अलग-अलग चोला पहने हुए हैं. यह एक ऐसा जोख़िम है जो तभी सामने आता है जब वो सोच बाज़ार में पिछड़ने लगती है.

ज़्यादातर निवेशक जानबूझकर अपना ज़्यादातर पैसा एक ही फ़ंड हाउस में नहीं लगाते. यह बस हो जाता है. शायद आपके बैंक ने एक ही AMC के दो फ़ंड सुझा दिए हों. शायद एक फ़ंड ने अच्छा किया, तो अगला भी उसी ब्रांड से लिया, क्योंकि वो नाम अब सुरक्षित लगने लगा था. हम सबका अपना एक Zara, अपना एक Nike  होता है, वो ब्रांड जिसकी तरफ़ हम बिना सोचे हाथ बढ़ा देते हैं.

म्यूचुअल फ़ंड इस वफ़ादारी का इनाम नहीं देते. एक ही फ़ंड हाउस से कई फ़ंड ख़रीदिए, और हो सकता है आप उतने बंटे हुए (डाइवर्सिफ़ाइड) न हों जितना आप सोचते हैं. आपके पास मौजूद कई फ़ंड असल में एक ही दांव निकल सकते हैं, जो बस अलग-अलग चोला पहने हुए हैं.

एक फ़ंड हाउस, एक निवेश सोच

हर फ़ंड हाउस के निवेश करने का अपना एक तरीक़ा होता है. एक ही रिसर्च टीम हर स्कीम को संभालती है. एक ही चीफ़ इन्वेस्टमेंट ऑफ़िसर पूरे तरीक़े को आकार देता है. बाज़ार और वैल्यूएशन के बारे में एक ही तरह की सोच उस इमारत के हर फ़ंड मैनेजर में बहती है. इसलिए एक ही AMC के अलग-अलग फ़ंड एक ही समय पर एक ही दिशा में चल सकते हैं.

जब वो तरीक़ा बाज़ार के मुताबिक़ बैठता है, तो उस हाउस के कई फ़ंड एक साथ बेहतर करते हैं. और जब वो तरीक़ा पिछड़ता है, तो कई फ़ंड एक साथ जूझते हैं. आप इस बात को निवेश की शैलियों, जैसे ग्रोथ और वैल्यू, या सेक्टरों, जैसे बैंकिंग और टेक्नोलॉजी, के मामले में तो पहले से मानते हैं. यही बात एक स्तर ऊपर, फ़ंड-हाउस के स्तर पर भी लागू होती है.

यह आपकी सोच से कहीं ज़्यादा होता है

हमने छह डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी कैटेगरी लीं, यानी फ़्लेक्सी-कैप, मल्टी-कैप, लार्ज-कैप, लार्ज और मिड-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप, और 2018 से 25 जून 2026 तक के कैलेंडर साल के रिटर्न पर हर फ़ंड को उसकी कैटेगरी के बाक़ी फ़ंड के मुक़ाबले रैंक किया. फिर, हर उस साल के लिए जब किसी हाउस ने इन कैटेगरीज़ में कम से कम चार फ़ंड चलाए, तो हमने एक सवाल पूछा. क्या वो सब अपनी कैटेगरी की रैंकिंग में एक ही तरफ़ रहे, या तो सब ऊपरी आधे में, या सब निचले आधे में?

23 AMC से हमें ऐसे 193 आंकड़े मिले. इनमें से 52 में, हाउस का हर योग्य फ़ंड एक साथ ही रहा, या तो सब ऊपरी आधे में, या सब निचले आधे में. यह 27% है. अगर अलग-अलग कैटेगरीज़ का प्रदर्शन एक-दूसरे से आज़ाद होता, तो सिर्फ़ इत्तेफ़ाक़ से ऐसा एक-सा नतीजा 12.5% से ज़्यादा बार नहीं आता, और आमतौर पर तो उससे भी कहीं कम. 

तो अपना पोर्टफ़ोलियो खोलिए और सिर्फ़ फ़ंड नहीं, फ़ंड हाउस गिनिए. अगर आपका ज़्यादातर पैसा एक ही AMC में रखा है, तो हो सकता है आपके पास एक ही निवेश सोच, कई बार, मौजूद हो.

सबसे अच्छा फ़ंड हाउस शायद ही सबसे अच्छा बना रहता है

इसका सीधा जवाब यह लगता है कि उस एक बेहतरीन AMC को खोजिए और सब कुछ वहीं लगा दो. लेकिन निवेश ऐसे नहीं चलता, क्योंकि कोई भी हाउस लंबे समय तक बेहतरीन नहीं बना रहता. आज रैंकिंग में सबसे आगे चल रहे हाउस अक्सर उनसे बहुत अलग होते हैं जो कुछ साल पहले आगे थे. आज के कुछ सबसे अच्छे फ़ंड, पिछले दौर में सबसे कमज़ोरों में गिने जाते थे. कुछ पुराने अगुवा तब से तेज़ी से पिछड़ गए हैं. निवेश की शैलियां बाज़ार में आती-जाती रहती हैं और जो हाउस एक बाज़ार साइकिल में शानदार दिखता है, वो अगले में मामूली लग सकता है.

जोख़िम क्या है और क्या नहीं है

एक ही हाउस में पैसा जमा होना सुनने में ऐसा लगता है जैसे यह कंपनी के डूबने का जोख़िम हो. पर ऐसा नहीं है. अगर कोई AMC कारोबारी मुश्किल में फंस जाए, तो आपका निवेश ग़ायब नहीं हो जाता. म्यूचुअल फ़ंड की संपत्ति निवेशकों के लिए अलग रखी जाती है और यह AMC की अपनी बैलेंस शीट का हिस्सा नहीं होती.

असली जोख़िम इससे कहीं बारीक है. आप यह मान सकते हैं कि आपके पास एक बंटा हुआ पोर्टफ़ोलियो है, क्योंकि आपके पास कई फ़ंड हैं. लेकिन अगर उन सबकी निवेश सोच एक ही है, तो बाज़ार में मुश्किल हालात पैदा होते ही वो सब एक जैसा बर्ताव कर सकते हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2020 में सामने आया, जब कर्ज़ की मुश्किलों ने Franklin Templeton की छह डेट स्कीमों को बंद करने पर मजबूर कर दिया. जिन निवेशकों के पास उनमें से कई स्कीमें थीं, उन्हें पता चला कि उनका बंटवारा उतना बड़ा नहीं था जितना उन्होंने मान रखा था.

फ़ंड चुनिए, फ़ंड हाउस नहीं

तो कोई कच्चा नियम मत बनाइए, जैसे "एक AMC से दो से ज़्यादा फ़ंड नहीं." इसके बजाय, फ़ंड को दो बातों पर चुनिए: आपके एसेट-एलोकेशन की ज़रूरत, और हर फ़ंड की वो क्षमता कि वो जितना जोख़िम उठाता है, उसके बदले एक जैसा रिटर्न दे. अलग-अलग हाउस में बंटवारा अक्सर अपने आप हो जाता है.

फिर एक छोटी जांच कीजिए. अपने निवेश को AMC के हिसाब से समूह में बांटिए और देखिए कि आपका पैसा कहां रखा है. अगर एक ही हाउस आपके एक्टिव इक्विटी पोर्टफ़ोलियो पर हावी है और उसके फ़ंड एक ही शैली साझा करते हैं, तो ख़ुद से पूछिए कि क्या आपके पास सच में अलग-अलग स्ट्रैटेजी हैं, या बस एक ही स्ट्रैटेजी के अलग-अलग रूप. कोई जादुई नंबर नहीं है. सच में अलग सोच वाले दो या तीन हाउस, आपको उन पांच हाउसों से बेहतर बांटते हैं जो सब एक जैसा सोचते हैं.

और किसी बड़े क़दम की ज़रूरत नहीं है. अपनी आगे की SIP और नए निवेश उन हाउसों की तरफ़ मोड़िए जिनमें आपका पैसा कम है, और जमा होने की इस समस्या को समय से हल होने दीजिए, जो टैक्स लगाने वाली बिक्री से कहीं बेहतर तरीक़े से इसे सुलझा देता है.

यह चेक करना, यह देखना कि आपका पैसा असल में कहां बैठा है और क्या आपके फ़ंड सच में अलग सोचते हैं या बस अलग लेबल पहने हुए हैं, यही काम वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र करता है. यह आपके पोर्टफ़ोलियो के अंदर झांकता है, ताकि आपको अपनी जमा वाली समस्या ग़लत वक़्त पर पता न चले.

जानिए कि आप असल में कहां खड़े हैं.  

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यह भी पढ़ें: पोर्टफ़ोलियो है या चिड़ियाघर? जानें असल डाइवर्सिफ़िकेशन का सच

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