Fund Advisor's Note

वो टैक्स बिल, जो ख़राब फ़ंड को ज़िंदा रखता है

सोचने के दो तरीक़े ख़राब फ़ंड को टैक्स बिल से कहीं ज़्यादा समय तक पोर्टफ़ोलियो से बाहर नहीं होने देते

सोचने के दो तरीक़े ख़राब फ़ंड को टैक्स बिल से कहीं ज़्यादा समय तक पोर्टफ़ोलियो से बाहर नहीं होने देतेUjjal Das/AI-Generated Image

सारांशः अशोक के पास 40 फ़ंड हैं. उन्होंने यह कलेक्शन इस तरह बनाया कि जो भी फ़ंड अच्छा परफ़ॉर्म कर रहा था, उसे ख़रीद लिया. अब वे इसे ठीक करना चाहते हैं, लेकिन टैक्स बिल उन्हें रोक रहा है. टैक्स असली है, लेकिन असल रुकावट शायद ही कभी वह होता है. दिमाग़ की दो पुरानी आदतें कहीं ज़्यादा नुक़सान करती हैं.

सारांशः अशोक के पास 40 फ़ंड हैं. उन्होंने यह कलेक्शन इस तरह बनाया कि जो भी फ़ंड अच्छा परफ़ॉर्म कर रहा था, उसे ख़रीद लिया. अब वे इसे ठीक करना चाहते हैं, लेकिन टैक्स बिल उन्हें रोक रहा है. टैक्स असली है, लेकिन असल रुकावट शायद ही कभी वह होता है. दिमाग़ की दो पुरानी आदतें कहीं ज़्यादा नुक़सान करती हैं. कुछ हफ़्ते पहले अशोक कुमार सिंह ने लिखा था. उनके पास लगभग 40 फ़ंड हैं, जो सालों में इस तरह जमा हुए कि उन्होंने पुराना परफ़ॉर्मेंस देखकर जो भी अच्छा चल रहा था, वो ख़रीद लिया. उन्होंने मुझसे दो सवाल पूछे. अगर उनके पास एक ही कैटेगरी के दो या तीन फ़ंड हैं और वे सभी अच्छा कर रहे हैं, तो क्या सिर्फ़ गिनती कम करने के लिए उन्हें कुछ बेचने चाहिए? और क्या हम ऐसा टूल बना सकते हैं जो बताए कि किसी फ़ंड को बेचकर बेहतर फ़ंड में शिफ़्ट होना, कैपिटल गेन्स टैक्स के बाद भी फ़ायदेमंद है या नहीं? उनके दूसरे सवाल में जो टैक्स है, वो असली है. लेकिन मेरे अनुभव में टैक्स का हिसाब-किताब शायद ही कभी किसी को रोकता है. दिमाग़ की दो पुरानी आदतें ख़राब पोर्टफ़ोलियो को बनाए रखने में कहीं ज़्यादा भूमिका निभाती हैं. पहली है एंकरिंग. आप अपना अकाउंट स्टेटमेंट खोलते हैं और एक आंकड़ा देखते हैं. मान लीजिए वो ₹60 लाख है. उस पल से ₹60 लाख आपका पैसा बन जाता है. आपकी कमाई. वो रक़म जो हक़ से आपको घर ले जानी चाहिए. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उसका बड़ा हिस्सा

ये लेख पहली बार जुलाई 21, 2026 को पब्लिश हुआ.

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