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सारांशः ITR भरने और ई-वेरिफ़ाई करने के बाद रिफ़ंड आने में आमतौर पर 4 से 5 हफ़्ते लगते हैं. पर कई बार वो आता ही नहीं. वजह आपके रिटर्न में हो सकती है या आपके बैंक अकाउंट में. यह स्टोरी इससे जुड़ी 10 बातें बताती है. जैसे रिफ़ंड कहां अटका है यह कैसे चेक करें, दोबारा अर्ज़ी कैसे लगाएं, शिकायत कहां करें और वो ब्याज जो देरी होने पर सरकार आपको देती है.
ITR भर दिया, ई-वेरिफ़ाई भी कर दिया, पर इनकम टैक्स रिफ़ंड का पैसा अकाउंट में नहीं आया. यह शिकायत हर साल हज़ारों लोगों की होती है.
पहले एक बात जान लीजिए. इनकम टैक्स विभाग आपके रिटर्न पर काम तभी शुरू करता है, जब वो ई-वेरिफ़ाई हो जाए. और उसके बाद रिफ़ंड आने में आमतौर पर 4 से 5 हफ़्ते लगते हैं.
तो अगर इससे ज़्यादा वक़्त हो गया है, तो बैठकर इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं. आप ख़ुद देख सकते हैं कि आपका रिफ़ंड कहां अटका है और उसी के हिसाब से आगे बढ़ सकते हैं.
आइए, वो 10 बातें एक-एक करके देख लेते हैं. और आख़िर में यह भी, कि इन सबके बाद भी काम न बने तो शिकायत कहां करनी है.
1. पहले देखिए-रिटर्न ई-वेरिफ़ाई हुआ है या नहीं
यह सबसे बुनियादी बात है और सबसे ज़्यादा लोग यहीं चूक जाते हैं.
सिर्फ़ रिटर्न भर देना काफ़ी नहीं होता. उसे भरने के 30 दिन के अंदर ई-वेरिफ़ाई भी करना पड़ता है. और जब तक वो नहीं होता, विभाग उस पर काम शुरू ही नहीं करता. और एक बड़ा ख़तरा भी है. अगर 30 दिन के अंदर ई-वेरिफ़ाई नहीं हुआ, तो आपका रिटर्न अवैध माना जा सकता है. यानी ऐसा, जैसे आपने भरा ही न हो. तब रिफ़ंड की बात तो दूर, आपको दोबारा रिटर्न भरना पड़ेगा.
अगर पोर्टल पर "Submitted, pending verification" लिखा दिख रहा है, तो मतलब साफ़ है. आपका रिटर्न अभी लाइन में लगा ही नहीं है. आधार OTP से तुरंत ई-वेरिफ़ाई कर दीजिए.
2. रिफ़ंड की स्थिति क्या है, यह चेक कीजिए
इसके लिए e-filing पोर्टल पर लॉग-इन कीजिए, और यह रास्ता पकड़िए: e-File > Income Tax Returns > View Filed Returns.
अब जिस असेसमेंट ईयर का मामला है, उसे चुनिए और View Details पर क्लिक कीजिए. यहां आपके रिटर्न की पूरी स्थिति सामने आ जाएगी.
पोर्टल पर आपको इनमें से कोई स्थिति दिख सकती है: रिफ़ंड जारी हुआ, रिफ़ंड का कुछ हिस्सा एडजस्ट हुआ, पूरा रिफ़ंड एडजस्ट हुआ, रिफ़ंड फ़ेल हुआ या रिफ़ंड एक्सपायर हो गया. और यहीं एक बात समझ लीजिए. रिफ़ंड प्रोसेस हो जाने का मतलब यह नहीं है कि पैसा आपके बैंक अकाउंट में पहुंच गया. ये दो अलग बातें हैं.
3. 143(1) की इंटिमेशन डाउनलोड कीजिए, असली हिसाब वहीं है
यह वो काग़ज़ है, जिसे ज़्यादातर लोग खोलकर भी नहीं देखते. जब आपका रिटर्न प्रोसेस हो जाता है, तो विभाग धारा 143(1) के तहत एक इंटिमेशन भेजता है. और असल में आपका रिफ़ंड तभी बनता है, जब यह इंटिमेशन आ जाए. उससे पहले तो आपका रिटर्न बस लाइन में लगा होता है.
इसमें पूरा हिसाब लिखा होता है. आप पर टैक्स कितना बना, आपने कितना चुकाया, रिफ़ंड कितना बना, और उस पर ब्याज कितना जुड़ा. यानी अगर आपको रिफ़ंड की रक़म पर कोई शक़ है, तो उसका जवाब यहीं मिलेगा.
इसे आप e-File > e-Proceedings > View Notices/Orders से डाउनलोड कर सकते हैं.
4. रिफ़ंड जारी हो गया, पर पैसा नहीं आया
ऐसे में सबसे पहले वो बैंक अकाउंट देखिए, जो आपने रिफ़ंड लेने के लिए चुना था. विभाग का नियम साफ़ है. रिफ़ंड सिर्फ़ उसी अकाउंट में आ सकता है, जो वैलिडेट हो चुका है. यानी अकाउंट वैलिडेट नहीं है, तो पैसा आएगा ही नहीं.
और एक बात. रिफ़ंड का पैसा विभाग सीधे नहीं भेजता, वो एक बैंक के ज़रिए आता है, जिसे रिफ़ंड बैंकर कहते हैं. इसलिए इंटिमेशन का ईमेल आने के बाद भी, अकाउंट में पैसा आने में कुछ दिन लग सकते हैं.
5. रिफ़ंड फ़ेल क्यों हुआ, वो 5 वजहें जान लीजिए
विभाग ने रिफ़ंड भेज दिया, पर वो आपके अकाउंट तक नहीं पहुंचा. ऐसा पांच वजहों से हो सकता है, और ये पांचों वजहें विभाग ने ख़ुद गिनाई हैं.
पहली, आपका बैंक अकाउंट पहले से प्री-वैलिडेट नहीं है.
दूसरी, बैंक अकाउंट में लिखे नाम और आपके PAN के नाम में फ़र्क़ है.
तीसरी, IFSC कोड ग़लत है.
चौथी, वो बैंक अकाउंट बंद हो चुका है.
और पांचवीं वजह, जो लोग सबसे ज़्यादा भूलते हैं. अगर आपका PAN, आधार से लिंक नहीं है, तो वो PAN "इनऑपरेटिव" हो जाता है, यानी काम करना बंद कर देता है. और ऐसे PAN पर रिफ़ंड फ़ेल हो जाता है.
6. अपना बैंक अकाउंट दोबारा वैलिडेट कराइए
अपने बैंक अकाउंट की हालत आप पोर्टल पर Profile > My Bank Account में देख सकते हैं. वहां यह भी दिख जाता है कि अकाउंट प्री-वैलिडेट है या नहीं, और उसमें लिखा नाम आपके PAN से मेल खाता है या नहीं.
अगर पहले वैलिडेशन फ़ेल हो गई थी, तो विभाग उसे दोबारा कराने की छूट देता है.
पर उससे पहले कुछ चीज़ें ठीक करनी पड़ सकती हैं. जैसे PAN और बैंक अकाउंट की लिंकिंग में गड़बड़ी, नाम में फ़र्क़, अकाउंट नंबर ग़लत लिखा होना, या वो अकाउंट बंद पड़ा होना.
7. रिफ़ंड री-इश्यू की अर्ज़ी लगाइए
यह वो बात है जो सबसे काम की है, और सबसे कम लोग जानते हैं.
अगर आपका रिफ़ंड फ़ेल हो गया है, तो आपको यह इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है कि विभाग ख़ुद दोबारा पैसा भेजेगा. आप ख़ुद अर्ज़ी लगा सकते हैं. इसके लिए पोर्टल पर Refund Reissue की सुविधा है.
यही रास्ता तब भी काम आता है, जब पोर्टल पर दिखे कि आपका रिफ़ंड एक्सपायर हो गया या वापस लौट आया. यानी विभाग ने पैसा भेजा, पर वो आपके अकाउंट तक पहुंचने के बजाय लौट गया.
इसके लिए दो शर्तें हैं. एक, आपका भरा हुआ रिटर्न ऐसा हो जिसमें रिफ़ंड फ़ेल हुआ है. और दो, आपके पास एक वैलिडेट किया हुआ बैंक अकाउंट हो.
अब तरीक़ा यह है. लॉग-इन करने के बाद Services > Refund Reissue पर जाइए. वहां एक नई अर्ज़ी बनाइए, जिस रिफ़ंड का मामला है उसे चुनिए, और अपना वैलिडेट किया हुआ बैंक अकाउंट चुन लीजिए. इसके बाद उस अर्ज़ी को ई-वेरिफ़ाई करना होता है.
ई-वेरिफ़ाई होने के बाद एक ट्रांजैक्शन ID बन जाती है और आपके रजिस्टर्ड ईमेल व मोबाइल नंबर पर इसका मैसेज भी आ जाता है.
8. कहीं रिफ़ंड किसी पुराने बकाया में एडजस्ट न हो गया हो
कई बार पैसा आता ही नहीं, क्योंकि वो आना ही नहीं था.
हो सकता है आपका रिफ़ंड बैंक में आने के बजाय, धारा 245 के तहत आपके किसी पुराने टैक्स बकाया में काट लिया गया हो. यह कटौती कुछ हिस्से की भी हो सकती है, और पूरे रिफ़ंड की भी.
नियम यह है कि ऐसा करने से पहले विभाग को आपको बताना पड़ता है. अगर आपको कोई सूचना नहीं मिली और रिफ़ंड कट गया, तो यह शिकायत करने की एक ठोस वजह बनती है.
और अगर वो बकाया आपको ग़लत लगता है, तो उसे दी गई मियाद के अंदर चुनौती दे सकते हैं. उसे नज़रअंदाज़ मत कीजिए, क्योंकि उस पर ब्याज बढ़ता रहता है.
9. देरी पर सरकार आपको ब्याज देती है
अब वो बात, जो शायद आप पहली बार पढ़ेंगे.
धारा 244A के तहत, अगर आपका रिफ़ंड तय वक़्त से देर में आया, तो विभाग आपको उस पर ब्याज देता है. और दर है हर महीने 0.5%, यानी पूरे साल का 6%.
अगर आपने रिटर्न आख़िरी तारीख़ से पहले भरा था, तो यह ब्याज असेसमेंट ईयर की 1 अप्रैल से गिना जाता है. और अगर देर से भरा था, तो आपके रिटर्न भरने की तारीख़ से.
पर दो शर्तें भी हैं. पहली, अगर आपका रिफ़ंड, तय हुए टैक्स के 10% से कम है, तो ब्याज नहीं मिलेगा. और दूसरी, अगर देरी आपकी ही किसी ग़लती से हुई है, जैसे ग़लत बैंक डिटेल देना, या विभाग के सवाल का जवाब देर से देना, तो उतने दिनों का ब्याज नहीं मिलेगा.
यह ब्याज आपको अलग से नहीं मिलता, वो रिफ़ंड के साथ ही आ जाता है. और इसका हिसाब आप 143(1) की उसी इंटिमेशन में देख सकते हैं, या फिर फ़ॉर्म 26AS के पार्ट D में.
10. और वो बात, जो लोग सबसे ज़्यादा भूलते हैं: उस ब्याज पर टैक्स लगता है
यह इस पूरे लेख की सबसे अहम बात है.
रिफ़ंड का पैसा अपने आप में टैक्स के दायरे में नहीं आता, क्योंकि वो आपका ही ज़्यादा चुकाया हुआ टैक्स लौट रहा है.
पर उसके साथ मिला 244A का ब्याज आपकी आमदनी माना जाता है. और उस पर "अन्य स्रोतों से आय" के तौर पर टैक्स लगता है.
यहां एक बात साफ़ समझ लीजिए. वो ब्याज उसी वित्त वर्ष की आमदनी माना जाएगा, जिसमें वो आपको मिला है. और उस वित्त वर्ष का रिटर्न आप अगले साल भरेंगे. यानी अभी जो ब्याज आया है, उसे अगली बार रिटर्न भरते वक़्त दिखाना है.
और यहां छिपाने की गुंजाइश भी नहीं है, क्योंकि वो ब्याज आपके AIS में पहले से दर्ज होता है. अगर आप उसे रिटर्न में नहीं दिखाएंगे, तो वो मिसमैच पकड़ में आ जाएगा, और डिमांड या जुर्माने की नौबत आ सकती है.
इसलिए हर साल अपना AIS ज़रूर देख लीजिए कि कहीं 244A का ब्याज आया है या नहीं.
और अगर इन सबके बाद भी कुछ न हो?
तो शिकायत का रास्ता खुला है.
अगर ई-वेरिफ़ाई करने के बाद कई महीने हो चुके हैं, और पोर्टल पर हालत "Under Processing" या "Successfully Verified" पर ही अटकी पड़ी है, तो आप पोर्टल पर Services > Grievances से शिकायत दर्ज करा सकते हैं. उसे CPC-ITR के नाम से भेजिए.
एक बात ध्यान रखिए. शिकायत जितनी ठोस होगी, उतनी तेज़ी से आगे बढ़ेगी. यानी "मेरा रिफ़ंड नहीं आया" लिखने के बजाय यह लिखिए कि "रिटर्न इस तारीख़ को वेरिफ़ाई हुआ था और अब तक प्रोसेस नहीं हुआ". साथ में अपना एक्नॉलेजमेंट नंबर भी दे दीजिए.
और अगर रिफ़ंड की रक़म ही ग़लत लगती है, या उस पर ब्याज नहीं जुड़ा है, तो धारा 154 के तहत रेक्टिफ़िकेशन, यानी सुधार की अर्ज़ी लगाइए.
एक आख़िरी बात
आख़िर में यह भी जान लीजिए कि सब रिटर्न एक रफ़्तार से नहीं निपटते.
अगर आपका रिटर्न सीधा-सादा है, यानी सिर्फ़ सैलरी और स्टैंडर्ड डिडक्शन तक का, तो वो जल्दी निपट जाता है. और अगर उसमें बिज़नेस से आमदनी है, कैपिटल गेन है, या कई तरह की छूट ली गई है, तो ज़्यादा वक़्त लग सकता है. वजह यह कि विभाग ऐसे रिटर्न को ज़्यादा ध्यान से देखता है.
इसलिए घबराने से पहले यह देख लीजिए कि आपका रिटर्न किस तरह का है. और अगर 4 से 5 हफ़्ते से ज़्यादा हो गए हैं, तो तीन काम कीजिए: पोर्टल पर अपने रिटर्न और रिफ़ंड की हालत देखिए, अपना बैंक अकाउंट जांचिए, और यह भी देखिए कि विभाग से कोई सूचना या नोटिस आया है या नहीं.
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ये लेख पहली बार सितंबर 08, 2026 को पब्लिश हुआ.




