Adobe Stock
म्यूचुअल फ़ंड में तीन साल का ट्रैक रिकॉर्ड बहुत लंबा नहीं माना जाता, लेकिन इस दौरान अगर कोई फ़ंड अपने बेंचमार्क को लगातार पीछे छोड़ता दिखे, तो उस पर नजर जरूर जाती है. WhiteOak Capital Mid Cap Fund के साथ भी कुछ ऐसा ही है. सितंबर 2022 में शुरू हुआ यह फ़ंड अभी करीब चार साल पुराना है. हालांकि, हमने यहां 1 और 3 साल के रिटर्न के डेटा पर ही ग़ौर किया है. इस दौरान इसके प्रदर्शन का चार्ट लगातार बेंचमार्क BSE 150 MidCap TRI से ऊपर नजर आता है.
31 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, फ़ंड का तीन साल का सालाना रिटर्न करीब 23.5 प्रतिशत रहा है. इसकी तुलना में मिडकैप कैटेगरी का तीन साल का औसत रिटर्न करीब 18.4 प्रतिशत है. यानी फ़ंड ने कैटेगरी की तुलना में 5 प्रतिशत से ज़्यादा का अल्फ़ा दिया है. वहीं, बीते एक साल में फ़ंड ने 7 प्रतिशत का तगड़ा अल्फ़ा दिया है. फ़ंड ने पिछले एक साल में बेंचमार्क रिटर्न 12.58 प्रतिशत की तुलना में 19.4 प्रतिशत का रिटर्न दिया है.
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में अपना ठीक तीसरा साल पूरा होने पर इस फ़ंड ने 26.3 प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया था, जो मिडकैप कैटेगरी में दूसरा सबसे ऊंचा रिटर्न था. इसके बाद जनवरी-मार्च 2026 में मिडकैप शेयरों में आई तेज गिरावट (कैटेगरी का उस तिमाही का रिटर्न करीब -12.3 प्रतिशत रहा) की वजह से यह तीन साल का सालाना रिटर्न कुछ नरम होकर मौजूदा स्तर पर आ गया है.
लेकिन सवाल यह है कि महज तीन साल पुराने इस फ़ंड के पोर्टफोलियो में ऐसा क्या है, जो इसे लगातार बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर रहा है?
स्मॉल-कैप स्टॉक्स पर लगाया दोगुना दांव
जुलाई 2026 के पोर्टफोलियो को देखें तो फ़ंड की करीब 96.8 प्रतिशत एसेट इक्विटी में थी. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि मार्केट-कैप के हिसाब से यह फ़ंड लार्ज-कैप की तरफ नहीं, बल्कि स्मॉल-कैप की तरफ ज्यादा झुका हुआ है - जो आम मिडकैप फ़ंड की सोच से अलग है.
| मार्केट-कैप कैटेगरी | फ़ंड में वेट (इक्विटी का %) | मिडकैप कैटेगरी एवरेज |
|---|---|---|
| लार्ज कैप | 6.16% | 12.77% |
| मिड कैप | 72.44% | 76.46% |
| स्मॉल कैप | 21.39% | 11.46% |
| औसत मार्केट कैप | ₹51,944 करोड़ | ₹67,952 करोड़ |
यानी फ़ंड का लार्ज-कैप एक्सपोज़र कैटेगरी एवरेज से आधे से भी कम है, जबकि स्मॉल-कैप एक्सपोज़र कैटेगरी एवरेज से करीब दोगुना है. फ़ंड का औसत मार्केट कैप (₹51,944 करोड़) भी कैटेगरी एवरेज (₹67,952 करोड़) से काफ़ी नीचे है यानी फ़ंड तुलनात्मक रूप से छोटी कंपनियों पर ज़्यादा दांव लगाता है.
यह भी पढ़ेंः 9 दमदार फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड, 10 साल में दिया 15% से ज़्यादा का रिटर्न
यह स्ट्रैटेजी फ़ंड हाउस के अपने बयान से भी मेल खाती है. वैल्यू रिसर्च को दिए एक इंटरव्यू में फ़ंड हाउस के CIO रमेश मंत्री ने कहा था कि उनका पोर्टफोलियो जानबूझकर स्मॉल-कैप और मिडकैप शेयरों का मिक्स है - यानी इस उम्मीद के साथ "आज के मिडकैप और कल के मिडकैप (आज के स्मॉल-कैप)" पर दांव लगाए गए कि आज के स्मॉल-कैप शेयर समय के साथ मिडकैप में शिफ़्ट हो जाएंगे.
इसका असर इसकी प्रमुख होल्डिंग्स में भी दिखता है. जुलाई में Max Financial Services 3.11 प्रतिशत वेट के साथ सबसे बड़ी होल्डिंग थी.
पोर्टफ़ोलियो में शामिल टॉप 10 शेयर
| कंपनी | वेट (%) |
|---|---|
| Max Financial Services | 3.11 |
| Bharti Hexacom | 2.9 |
| The Federal Bank | 2.84 |
| Laurus Labs | 2.46 |
| Coforge | 2.43 |
| Fortis Healthcare | 2.3 |
| PB Fintech | 2.16 |
| The Phoenix Mills | 2.12 |
| Vishal Mega Mart | 1.88 |
| Bharat Heavy Electricals | 1.81 |
| टॉप 10 का कुल वजन | 24 |
यानी किसी एक-दो शेयर पर बहुत ज़्यादा निर्भरता नहीं है.
फ़ाइनेंशियल और हेल्थकेयर कंपनियों पर भरोसा
सेक्टर के स्तर पर Financial सबसे बड़ा दांव है, जिसका वेट करीब 23.3 प्रतिशत था. इसके बाद Healthcare 14.9 प्रतिशत, Services 11.6 प्रतिशत और Capital Goods 8.6 प्रतिशत थे.
| सेक्टर | वेट (%) |
|---|---|
| Financial | 23.3 |
| Healthcare | 14.9 |
| Services | 11.6 |
| Capital Goods | 8.6 |
| Technology | 6.5 |
| Automobile | 4.7 |
| Metals & Mining | 4.5 |
| Consumer Staples | 4.4 |
| Energy | 3.5 |
| Construction | 3.4 |
लंबे समय से पोर्टफ़ोलियो में बनी हैं 26 कंपनियां
दिलचस्प बात यह है कि पोर्टफोलियो में कुछ कंपनियां लंबे समय से बनी हुई हैं. जुलाई 2026 तक के लगभग 3 साल के डेटा पर ग़ौर करें तो 26 कंपनियां ऐसी हैं, जो हर महीने पोर्टफ़ोलियो का हिस्सा रहीं.
| 360 One Wam | Federal Bank | Muthoot Finance |
| 3M India | Fortis Healthcare | Navin Fluorine International |
| AIA Engineering | Hindustan Petroleum | Neuland Laboratories |
| AU Small Finance Bank | Info Edge (India) | Page Industries |
| Abbott India | Ipca Laboratories | Persistent Systems |
| Ajanta Pharma | Krishna Institute of Medical Sciences | Poly Medicure |
| Coforge | Metro Brands | REC |
| Coromandel International | Safari Industries | |
| Cummins India | The Phoenix Mills | |
| Dixon Technologies |
इससे संकेत मिलता है कि फ़ंड मैनेजर सिर्फ बाज़ार की छोटी अवधि की तेज़ी पकड़ने के लिए लगातार शेयर बदलने के बजाय कुछ कंपनियों पर लंबे समय तक भरोसा भी रखते हैं.
कैटेगरी के मुकाबले फ़ंड की तस्वीर
संदर्भ के लिए, वैल्यू रिसर्च के फ़ंड मॉनिटर के मुताबिक अगस्त 2026 तक इक्विटी मिडकैप कैटेगरी का ट्रेलिंग रिटर्न इस तरह रहा है:
| अवधि | कैटेगरी रिटर्न (%) | WhiteOak Capital Mid Cap (%) |
|---|---|---|
| 1 साल | 12.58 | 19.4 |
| 3 साल | 18.43 | 24.24 |
इसकी तुलना में WhiteOak Capital Mid Cap Fund का तीन साल का 23.5 प्रतिशत रिटर्न कैटेगरी एवरेज से करीब 5 प्रतिशत अंक ज्यादा है.
रोलिंग रिटर्न भी बढ़त की पुष्टि करता है
सिर्फ एक तारीख का प्वाइंट-टू-प्वाइंट रिटर्न देखकर किसी फ़ंड को परखना ठीक नहीं होता, इसलिए 3-साल के रोलिंग रिटर्न पर भी नजर डालना जरूरी है. पिछले छह महीनों (फरवरी से अगस्त 2026) के आंकड़े देखें तो फ़ंड का 3-साल रोलिंग रिटर्न फरवरी में करीब 28 प्रतिशत से शुरू होकर जून तक घटकर लगभग 24 प्रतिशत पर आ गया, और अगस्त तक 23-24 प्रतिशत के आसपास स्थिर बना हुआ है. इसी दौरान बेंचमार्क BSE 150 MidCap TRI और मिडकैप कैटेगरी का रोलिंग रिटर्न भी करीब 23 प्रतिशत से घटकर 19-20 प्रतिशत पर आ गया - यानी बेंचमार्क और कैटेगरी, दोनों की लाइनें लगभग एक-दूसरे पर ओवरलैप करती हैं. सबसे अहम बात यह है कि इस पूरी छह महीने की अवधि में फ़ंड की लाइन बेंचमार्क और कैटेगरी की लाइनों से लगातार ऊपर रही, और दोनों के बीच का फासला करीब 4-5 प्रतिशत अंक पर स्थिर बना रहा. यानी बाज़ार में आई हालिया सुस्ती के दौरान भी फ़ंड की बढ़त कम नहीं हुई, बल्कि बरकरार रही - जो इस बात का संकेत है कि फ़ंड का बेंचमार्क को पीछे छोड़ना किसी एक तिमाही की तेजी का नतीजा नहीं, बल्कि लगातार बना हुआ रुझान है.
अभी ट्रैक रिकॉर्ड छोटा है
WhiteOak Capital Mid Cap Fund का प्रदर्शन अब तक मजबूत रहा है, लेकिन तीन साल का अच्छा प्रदर्शन इसे लंबे समय का विजेता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. फ़ंड का जोखिम स्तर ज़्यादा है और मिडकैप निवेश में बाज़ार गिरने पर तेज़ उतार-चढ़ाव संभव है. जनवरी-मार्च 2026 की गिरावट में पूरी मिडकैप कैटेगरी को झटका लगा था और इस फ़ंड का सालाना रिटर्न भी उस दौर में नरम हुआ.
इसलिए इसकी लगातार बेंचमार्क से बढ़त निश्चित रूप से ध्यान देने लायक है, लेकिन निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि फ़ंड पूरे मार्केट साइकिल-ख़ासकर लंबी गिरावट और सुस्त दौर-में कैसा प्रदर्शन करता है. अभी तक की कहानी मजबूत है, लेकिन असली परीक्षा आगे है.
यह भी पढ़ेंः PSU स्टॉक्स की रैली का फ़ायदा उठाने का पैसिव तरीक़ा



