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सिल्वर ETF ने एक साल में 56% तक दिया रिटर्न, क्या निवेश करना सही है?

एक साल का रिटर्न बस दो तारीख़ों के बीच की तस्वीर है, उन दोनों के बीच जो हुआ, वो सिल्वर के बारे में कहीं ज़्यादा बताता है

एक साल का रिटर्न बस दो तारीख़ों के बीच की तस्वीर है, उन दोनों के बीच जो हुआ, वो सिल्वर के बारे में कहीं ज़्यादा बताता हैMukul Ojha/AI-Generated Image

सारांशः सिल्वर ETF ने 1 साल में 53 से 56% और 3 साल में सालाना क़रीब 44% दिया है. पर हर सिल्वर ETF में एक ही मेटल है, इसलिए "सबसे अच्छा" ETF चुनने से ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता. और एक साल का आंकड़ा यह छिपा लेता है कि जनवरी 2026 के पीक के बाद सिल्वर का प्राइस लगभग आधा रह गया.

1 साल पहले किसी सिल्वर ETF में लगाए ₹1 लाख आज क़रीब ₹1.54 लाख होते और 3 साल पहले लगाए होते, तो लगभग तीन गुना. इसीलिए सिल्वर ETF इन दिनों बहुत से निवेशकों की वॉचलिस्ट में हैं. पर कोई फ़ैसला करने से पहले यह देखिए कि सिल्वर यहां तक पहुंचा कैसे.

सिल्वर ETF ने कितना रिटर्न दिया

1 साल का रिकॉर्ड 16 सिल्वर ETF के पास है और 3 साल का सिर्फ़ 9 के पास, दोनों में टॉप 5 ये हैं

क्रम सिल्वर ETF 1 साल का रिटर्न (%) एक्सपेंस रेशियो (%) नेट एसेट्स (₹ करोड़)
1 Tata Silver ETF 56.38 0.39 5,440
2 UTI Silver ETF 55.01 0.5 1,546
3 ICICI Prudential Silver ETF 54.22 0.34 15,108
4 Aditya Birla Sun Life Silver ETF 54.18 0.3 2,994
5 DSP Silver ETF 54.14 0.34 1,496

 

क्रम सिल्वर ETF 3 साल का रिटर्न (% सालाना) एक्सपेंस रेशियो (%) नेट एसेट्स (₹ करोड़)
1 Axis Silver ETF 44.24 0.36 2,068
2 HDFC Silver ETF 44.05 0.42 8,313
3 Aditya Birla Sun Life Silver ETF 44.04 0.3 2,994
4 ICICI Prudential Silver ETF 44.03 0.34 15,108
5 Kotak Silver ETF 43.97 0.35 3,955

पर इस रैंकिंग पर मत जाइए. एक साल में सबसे अच्छे और सबसे कमज़ोर सिल्वर ETF के बीच क़रीब 3% पॉइंट का फ़र्क़ है, और ज़्यादातर 1 पॉइंट के दायरे में हैं. तीन साल में यह फ़र्क़ 1 पॉइंट से भी कम है. ऐसा होना ही था, क्योंकि हर सिल्वर ETF असली सिल्वर रखता है और भारत में उसी के प्राइस के साथ चलता है. असल फ़र्क़ तीन बातों में है: ख़र्च, आकार, और यूनिट कितनी आसानी से ख़रीदी-बेची जा सकती हैं.

एक साल का आंकड़ा क्या छिपा लेता है

सिल्वर अक्तूबर 2025 में $50 प्रति औंस के पार गया और जनवरी में लगभग सीधा ऊपर भागकर 29 जनवरी 2026 को क़रीब $121 के रिकॉर्ड पीक पर पहुंचा. अगले ही दिन वो क़रीब 30% गिर गया, जो 1980 के बाद उसकी सबसे बुरी एक दिन की गिरावट थी. आज वो क़रीब $61 पर है, यानी अपने पीक से लगभग आधा.

भारत में भी यही हुआ. जनवरी के बीच सिल्वर क़रीब ₹2.63 लाख प्रति किलो था और 30 सितंबर को MCX पर क़रीब ₹2.26 लाख. सितंबर में भी वो ₹2.40 लाख के ऊपर जाकर वापस गिरा. यानी जिसने जनवरी के बीच या आख़िर में ख़रीदा, वो आज भी घाटे में है, जबकि एक साल का रिटर्न 50% से ऊपर दिख रहा है.

वो 56% बस दो तारीख़ों के बीच की दूरी है. शुरुआत की तारीख़ कुछ महीने खिसका दीजिए, तो पूरी कहानी बदल जाती है.

सिल्वर इतना ऊपर-नीचे क्यों होता है

सिल्वर एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है, जो सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और गाड़ियों में लगती है, और एक क़ीमती मेटल भी, जिसे लोग डर में या तेज़ी देखकर ख़रीदते हैं. जब दोनों तरह की मांग साथ चलती है, तो प्राइस तेज़ भागता है. और जब सट्टे का पैसा निकलता है, तो उतनी ही तेज़ी से गिरता है.

ऊपर से सिल्वर कुछ कमाता नहीं, न डिविडेंड, न ब्याज, न कोई बढ़ता मुनाफ़ा. आपका रिटर्न सिर्फ़ इस पर टिका है कि आगे कोई उसके लिए कितना प्राइस देगा. इसीलिए वो लंबे समय तक कहीं नहीं पहुंचता. उसका 1980 का पीक क़रीब 45 साल तक नहीं टूटा और 2011 में $49 के आसपास के पीक के बाद वो $20 से नीचे फिसल गया था.

एक्सपेंस रेशियो से बड़ा ख़र्च है प्रीमियम

सिल्वर ETF का बेस एक्सपेंस रेशियो 0.30% से 0.50% के बीच है, और आमतौर पर क़रीब 0.38%. सबसे सस्ते Aditya Birla Sun Life और Mirae Asset (0.30%) हैं, फिर Zerodha (0.33%) और ICICI Prudential व DSP (0.34%). ₹1 लाख पर सबसे सस्ते और सबसे महंगे ETF का फ़र्क़ साल का क़रीब ₹200 है. यह छोटा है, पर जब रिटर्न सबका लगभग एक जैसा है, तो ख़र्च ही वो चीज़ है जो आपके हाथ में है. और ध्यान रखिए, सबसे बड़ा सिल्वर ETF, Nippon India (₹32,223 करोड़), सबसे सस्ता नहीं है, उसका रेशियो 0.49% है.

पर ETF में असली ख़र्च अक्सर प्रीमियम होता है. आप एक्सचेंज पर मार्केट प्राइस पर ख़रीदते हैं, जो ETF की NAV से ऊपर जा सकता है. अक्तूबर 2025 में भारत में असली सिल्वर की कमी से सिल्वर ETF अपनी इंडिकेटिव NAV से 5% से 10% ऊपर बिके. SBI, Kotak, UTI, Tata और ICICI Prudential समेत कई फ़ंड हाउस ने अपने सिल्वर FoF में एकमुश्त निवेश कुछ समय के लिए रोक दिया. और 10% का प्रीमियम किसी आम सिल्वर ETF के 25 साल से ज़्यादा के एक्सपेंस रेशियो जितना है, जो एक ही ख़रीद में चला जाता है.

इसलिए ख़रीदने से पहले तीन काम कीजिए

  • iNAV से मिलाइए: फ़ंड हाउस की वेबसाइट पर दिखने वाली iNAV से प्राइस काफ़ी ऊपर हो, तो रुक जाइए.
  • लिमिट ऑर्डर लगाइए: ताकि अपनी तय क़ीमत से ज़्यादा न चुकाएं.
  • बड़ा और ज़्यादा ख़रीदा-बेचा जाने वाला ETF चुनिए: उसमें ख़रीदने और बेचने के प्राइस का फ़र्क़ कम रहता है.

डीमैट अकाउंट नहीं है, तो ज़्यादातर फ़ंड हाउस का सिल्वर FoF भी है, जिसमें NAV पर निवेश और SIP हो सकती है. पर उसके अपने एक्सपेंस रेशियो के ऊपर, उस ETF का ख़र्च भी आप ही उठाते हैं जिसमें वो पैसा लगाता है. पिछले एक साल में हर सिल्वर FoF अपने ही ETF से 0.13% से क़रीब 6% पॉइंट तक पीछे रहा.

सिल्वर ETF पर टैक्स

 
सिल्वर ETF सिल्वर FoF
कितने समय बाद लॉन्ग-टर्म 12 महीने से ज़्यादा 24 महीने से ज़्यादा
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5%, बिना इंडेक्सेशन 12.5%, बिना इंडेक्सेशन
उससे पहले बेचने पर आपके स्लैब की दर से आपके स्लैब की दर से

फ़र्क़ इसलिए है कि सिल्वर ETF एक्सचेंज पर लिस्टेड है और FoF नहीं. लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर ₹1.25 लाख की छूट यहां नहीं मिलती, वो सिर्फ़ शेयर और इक्विटी फ़ंड के लिए है. और अप्रैल 2023 से मार्च 2025 के बीच ख़रीदी यूनिट पर नियम उलझे हुए हैं, इसलिए बेचने से पहले टैक्स सलाहकार से पूछ लीजिए.

तो क्या पैसा लगाएं?

पिछले साल के 56% को देखकर मत लगाइए. ऐसा साल भरोसे की नहीं, सावधानी की वजह है, क्योंकि सुर्ख़ियां चमकने के बाद ख़रीदने वाले ही आज घाटा झेल रहे हैं.

अगर सिल्वर रखना ही है, तो उसे एक छोटे डायवर्सिफ़ायर की तरह रखिए. सिर्फ़ वो पैसा लगाइए, जिसकी कई साल ज़रूरत न हो. एक साथ नहीं, थोड़ा-थोड़ा करके लगाइए. और कम ख़र्च वाला बड़ा ETF चुनकर प्रीमियम ज़रूर देख लीजिए. दौलत बनाने की बुनियाद डायवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड ही है. सिल्वर किनारे पर रह सकता है, बीच में नहीं. 

वैल्यू रिसर्च की राय

सिल्वर के रिटर्न के साथ-साथ उसका उतार-चढ़ाव भी असली है. जो मेटल कुछ महीनों में अपनी आधी क़ीमत गंवा दे, वो एक अच्छे इक्विटी पोर्टफ़ोलियो की जगह नहीं ले सकती. आपके प्लान में सिल्वर, गोल्ड या किसी और फ़ंड की कितनी जगह हो, यह तय करने में वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपके गोल के हिसाब से मदद करता है, पिछले साल के टॉप प्रदर्शन के हिसाब से नहीं.

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